भारतीय मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल पहुंचने के अनुमान में फिर बदलाव किया है। मौसमीय परिस्थितियों में बदलाव के चलते अब इसके 4 जून के आसपास पहुंचने की संभावना जताई गई है, जबकि शुरुआती अनुमान मई के अंतिम सप्ताह का था।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का इंतजार कर रहे देश के लिए भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने नया अपडेट जारी किया है। विभाग के अनुसार मानसून अब 4 जून के आसपास केरल में प्रवेश कर सकता है। इससे पहले जारी अलग-अलग अनुमानों में 26 मई से लेकर 2 से 6 जून के बीच इसके पहुंचने की संभावना जताई गई थी, लेकिन मौसमीय परिस्थितियों में बदलाव के चलते समय-सीमा में संशोधन किया गया।
IMD हर साल अप्रैल में केरल में मानसून के आगमन का प्रारंभिक अनुमान जारी करता है। यह आकलन लंबी अवधि के औसत (LPA), समुद्री परिस्थितियों और मौसम मॉडल्स के आधार पर तैयार किया जाता है। इस वर्ष शुरुआती अनुमान में मानसून के सामान्य समय से पहले पहुंचने की संभावना भी जताई गई थी, जिसमें 26 मई जैसी तारीख शामिल थी।
हालांकि मई के अंतिम दिनों में अरब सागर और आसपास के क्षेत्रों में अपेक्षित तेजी से मौसमीय परिस्थितियां विकसित नहीं हो सकीं। मानसून के आगे बढ़ने के लिए जरूरी ऊपरी स्तर की हवाएं और बादलों का संगठित स्वरूप पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाया, जिसके चलते अनुमान में बार-बार बदलाव देखने को मिला। पहले 29 मई, फिर जून के शुरुआती सप्ताह और अब 4 जून के आसपास की नई संभावित तारीख सामने आई है।
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मौसम विभाग की ताजा प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अगले 24 घंटों के दौरान केरल में मानसून की शुरुआत के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। साथ ही तिरुवनंतपुरम और आसपास के दक्षिणी हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश दर्ज की गई है। कुछ स्थानों पर 2.5 सेंटीमीटर या उससे अधिक वर्षा भी हुई है, जिसे मानसून की औपचारिक शुरुआत के मानकों में एक अहम संकेत माना जाता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार केवल बारिश का होना ही पर्याप्त नहीं होता। मानसून की आधिकारिक घोषणा के लिए हवाओं की दिशा, बादलों का फैलाव और वायुमंडलीय संरचना जैसे कई मानकों का एक साथ अनुकूल होना जरूरी होता है। यही कारण है कि कई बार जमीन पर बारिश शुरू होने के बावजूद औपचारिक घोषणा में समय लग जाता है।
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इस बार मानसून को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू मौसमी पूर्वानुमान से जुड़ा है। IMD ने जून से सितंबर के बीच देश में कुल वर्षा के सामान्य से कम रहने की संभावना जताई है। अनुमान के मुताबिक इस अवधि में बारिश लंबी अवधि के औसत का लगभग 92 से 95 प्रतिशत रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे एल नीनो जैसी समुद्री परिस्थितियां एक प्रमुख वजह हो सकती हैं।
मौसम विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मानसून की शुरुआती प्रगति धीमी रह सकती है, लेकिन जून के पहले सप्ताह के बाद हवाओं के पैटर्न में सुधार होने पर बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। इसका असर खासकर दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
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मानसून की इस देरी और अनिश्चितता का असर कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। खरीफ फसलों की बुवाई का कार्यक्रम कई राज्यों में बारिश पर निर्भर रहता है। ऐसे में समय पर और समान रूप से वर्षा न होने पर बुवाई की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। हालांकि स्थिति पूरी तरह मानसून के वास्तविक आगमन और उसके वितरण पर निर्भर करेगी।
फिलहाल IMD लगातार मौसमीय परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति को लेकर और अपडेट जारी किए जाने की संभावना है। केरल में मानसून की औपचारिक शुरुआत अब अगले कुछ दिनों के मौसम बदलाव पर निर्भर मानी जा रही है।
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