भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 3 जून से देश के 17 राज्यों में तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक की चेतावनी जारी की है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है, जबकि कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। मौसम में बदलाव से भीषण गर्मी और लू से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन तेज हवाओं, बिजली बाधित होने, पेड़ गिरने और जलभराव जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। वहीं, दक्षिण-पश्चिम मानसून के 4 जून के आसपास केरल तट पर पहुंचने की संभावना जताई गई है, जिसके बाद यह धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ेगा। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है।
17 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट, केरल में मानसून की दस्तक के साथ मौसम बदलेगा देश का मिजाज देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच मौसम में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 3 जून से देश के 17 राज्यों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल तट पर पहुंचने की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो सकती हैं, जिससे जहां लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं कई क्षेत्रों में मौसम से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। कई इलाकों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में इससे भी अधिक गति वाली हवाओं और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
पिछले कुछ महीनों से देश के कई हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में रहे हैं। मार्च से शुरू हुई गर्मी ने अप्रैल और मई में अधिक तीखा रूप ले लिया। उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी भारत के कई शहरों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। कई क्षेत्रों में लू के लंबे दौर ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया और लोगों को दिन के समय घरों में रहने के लिए मजबूर किया।
ऐसे समय में मौसम विभाग की ओर से जारी बारिश और आंधी की चेतावनी को राहत की खबर माना जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बादल, बारिश और तेज हवाएं तापमान में गिरावट ला सकती हैं। इससे कई राज्यों में लू की स्थिति कमजोर पड़ सकती है और लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में 3 से 5 जून के बीच मौसम बदलने की संभावना जताई गई है। यहां गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे अधिकतम तापमान में कुछ कमी आने की उम्मीद है। पिछले कुछ दिनों से राजधानी क्षेत्र में गर्मी और उमस दोनों बढ़ी हुई थीं, जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
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उत्तर प्रदेश और बिहार में भी मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना व्यक्त की है। कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। हालांकि मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ इलाकों में गर्मी और लू का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं होगा और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। राजस्थान में विशेष रूप से पश्चिमी हिस्सों में आंधी और धूल भरे तूफान की संभावना जताई गई है। जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जैसे जिलों में तेज हवाओं का असर अधिक देखने को मिल सकता है। रेगिस्तानी क्षेत्रों में धूल भरी आंधियां आम हैं, लेकिन जब इनके साथ तेज हवाएं और बारिश जुड़ जाती हैं तो जनजीवन पर प्रभाव बढ़ जाता है।
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि कई जिलों में बादल छाने, गरज-चमक और हल्की बारिश की स्थिति बन सकती है। इससे तापमान में गिरावट दर्ज होने की संभावना है।
पूर्वी भारत के राज्यों जैसे झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी मौसम के सक्रिय रहने का अनुमान है। इन राज्यों में कुछ स्थानों पर तेज हवाओं और बारिश के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। मौसम विभाग लगातार स्थानीय प्रशासन को आवश्यक तैयारियां बनाए रखने की सलाह दे रहा है।
देश के पर्वतीय राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी मौसम बदल सकता है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति से जुड़ा है। विभाग के अनुसार मानसून केरल तट के करीब पहुंच चुका है और 4 जून के आसपास इसके केरल में प्रवेश करने की संभावना है। मानसून की आधिकारिक शुरुआत देश के कृषि और जल संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
केरल में मानसून पहुंचने के बाद आमतौर पर अगले कुछ सप्ताहों में यह दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों, पूर्वी भारत और फिर मध्य एवं उत्तर भारत की ओर बढ़ता है। मानसून की गति और विस्तार कई मौसमीय कारकों पर निर्भर करते हैं, इसलिए इसके आगे बढ़ने की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है।
कृषि क्षेत्र के लिए मानसून का समय पर पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खरीफ फसलों की बुवाई बड़े पैमाने पर मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है। यदि मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ता है तो किसानों को बुवाई की तैयारियों में मदद मिल सकती है। इसके अलावा जलाशयों, बांधों और भूजल स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि बारिश केवल राहत ही नहीं लाती, बल्कि कुछ चुनौतियां भी साथ लेकर आती है। कई शहरों में भारी बारिश के दौरान जलभराव, यातायात जाम और बिजली आपूर्ति में बाधा जैसी समस्याएं सामने आती हैं। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं भी देखने को मिलती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम के इस दौर में प्रशासनिक तैयारियां बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। स्थानीय निकायों को जल निकासी व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और आपातकालीन सेवाओं को तैयार रखना होता है ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके।
किसानों के लिए भी यह समय सतर्क रहने का है। हल्की और मध्यम बारिश खेतों के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन ओलावृष्टि और तेज हवाएं फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि वे मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और खेतों में रखी उपज तथा उपकरणों को सुरक्षित रखें।
दिहाड़ी मजदूरों, निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों, डिलीवरी कर्मियों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए भी मौसम में यह बदलाव महत्वपूर्ण है। तेज आंधी और बिजली गिरने जैसी घटनाओं के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें। आंधी के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें, अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। खराब मौसम के समय सावधानी बरतना संभावित जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है।
देशभर में मौसम की यह सक्रियता ऐसे समय पर सामने आई है जब लोग लंबे समय से गर्मी से राहत का इंतजार कर रहे थे। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि प्री-मानसून गतिविधियां कितनी व्यापक होती हैं और मानसून की प्रगति किस गति से आगे बढ़ती है। फिलहाल मौसम विभाग की चेतावनियों और पूर्वानुमानों पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
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