मलेशिया ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नया कानून लागू किया है, जिसके तहत 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 1 करोड़ रिंगिट तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
मलेशिया ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक सख्त कानून लागू किया है, जिसके तहत 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने इस कदम को डिजिटल वातावरण में बच्चों को बढ़ते जोखिमों से बचाने और सुरक्षित ऑनलाइन इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है।
नए नियमों के अनुसार, किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 16 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ता न तो अकाउंट बना सकेंगे और न ही प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर पाएंगे। यह प्रतिबंध देश में सक्रिय सभी प्रमुख सोशल मीडिया सेवाओं पर लागू होगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नाबालिग उपयोगकर्ताओं की ऑनलाइन मौजूदगी को नियंत्रित और सुरक्षित रखा जा सके।
कानून में स्पष्ट रूप से यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया कंपनियों को इस नियम का सख्ती से पालन करना होगा। इसके लिए प्लेटफॉर्म्स को अपनी आयु सत्यापन (age verification) प्रणाली को और मजबूत करना होगा, ताकि नाबालिग उपयोगकर्ताओं की पहचान कर उन्हें सेवा से रोका जा सके। माना जा रहा है कि कंपनियों को तकनीकी स्तर पर भी अपने सिस्टम में बड़े बदलाव करने होंगे।
सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि यदि कोई कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है या जानबूझकर आयु प्रतिबंधों को लागू नहीं करती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। उल्लंघन की स्थिति में कंपनियों पर 1 करोड़ रिंगिट तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह प्रावधान डिजिटल कंपनियों के लिए सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुनिया भर में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। कई देशों में लगातार यह बहस चल रही है कि कम उम्र के उपयोगकर्ताओं पर सोशल मीडिया का मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार और गोपनीयता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। साइबर बुलिंग, गलत जानकारी और ऑनलाइन शोषण जैसे जोखिमों को लेकर भी गंभीर सवाल उठते रहे हैं।
मलेशिया सरकार का मानना है कि बिना नियंत्रण के सोशल मीडिया उपयोग बच्चों को ऐसे जोखिमों के सामने ला सकता है जिनसे बचाव जरूरी है। इसी कारण उम्र सीमा तय कर एक स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया गया है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म जिम्मेदारी के साथ संचालन करें।
इस कानून के लागू होने के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों पर निगरानी और सख्त हो जाएगी। उन्हें न सिर्फ आयु सत्यापन व्यवस्था को लागू करना होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नाबालिग किसी भी तरह से प्लेटफॉर्म तक पहुंच न बना सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम तकनीकी कंपनियों के लिए अनुपालन (compliance) की नई चुनौती पैदा करेगा।
फिलहाल यह कानून लागू हो चुका है और इसके प्रभावों पर आने वाले समय में नजर रखी जाएगी कि यह बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों, डिजिटल सुरक्षा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के संचालन को किस तरह प्रभावित करता है।
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