कोलंबिया में राष्ट्रपति चुनाव का मुकाबला रन-ऑफ तक पहुंच गया है, जबकि गिनी में संसदीय चुनाव लोकतांत्रिक बदलाव की दिशा में अहम माना जा रहा है। माल्टा में शुरुआती नतीजों ने लेबर पार्टी की लगातार चौथी जीत का संकेत दिया है।
दुनिया के तीन अलग-अलग हिस्सों—दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया, पश्चिम अफ्रीका के गिनी और यूरोप के माल्टा—में हुए हालिया चुनावों ने एक बार फिर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर वैश्विक बहस को तेज कर दिया है। इन देशों के चुनाव अपने-अपने राजनीतिक संदर्भों में अहम माने जा रहे हैं, लेकिन इनके साथ ही चुनावी व्यवस्था पर भरोसे का सवाल भी केंद्र में है।
कोलंबिया में राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के नतीजों ने राजनीतिक मुकाबले को और तीखा बना दिया है। नेशनल साल्वेशन मूवमेंट के उम्मीदवार अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने शुरुआती चरण में बढ़त हासिल की है। अब उनका सामना 21 जून को होने वाले रन-ऑफ चुनाव में हिस्तोरिक पैक्ट के उम्मीदवार इवान सेपेडा से होगा। पहले दौर के बाद देश में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं और चुनावी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है।
स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब मौजूदा राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो ने कंप्यूटराइज्ड वोट-काउंटिंग सिस्टम पर सवाल उठाए। उन्होंने चुनावी परिणामों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह जताया। इस बयान के बाद देश में राजनीतिक दलों और समर्थकों के बीच बहस तेज हो गई है। चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।
कोलंबिया में अब सबकी नजर रन-ऑफ चुनाव पर है, जो यह तय करेगा कि देश की अगली सरकार किसके हाथ में होगी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि चुनावी संस्थाएं इस विवाद के बीच अपनी विश्वसनीयता और पारदर्शिता को किस तरह बनाए रखती हैं।
पश्चिम अफ्रीका के गिनी में भी हाल ही में संसदीय चुनाव के लिए मतदान कराया गया, जिसमें 147 सांसदों का चुनाव हुआ। यह मतदान देश के लोकतांत्रिक संक्रमण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सैन्य तख्तापलट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों के चलते गिनी की राजनीतिक व्यवस्था प्रभावित रही है, इसलिए यह चुनाव लोकतांत्रिक संस्थाओं को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी गिनी के चुनाव पर करीबी नजर बनाए हुए है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि नई संसद देश में स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यूरोप के छोटे द्वीपीय देश माल्टा में आम चुनाव के शुरुआती नतीजों में सत्तारूढ़ लेबर पार्टी को बढ़त मिलती दिखी है। शुरुआती संकेतों के अनुसार पार्टी एक बार फिर सत्ता में वापसी करती नजर आ रही है, जिससे प्रधानमंत्री रॉबर्ट अबेला के नेतृत्व में नई सरकार बनने की संभावना मजबूत हो गई है।
माल्टा का यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा था क्योंकि विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया और शासन के कुछ मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। अब शुरुआती नतीजों के साथ राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होती दिख रही है, लेकिन अंतिम परिणाम पर सभी की नजर बनी हुई है।
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