भारतीय रिजर्व बैंक की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में नकली नोटों की संख्या में 5.7% वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी ₹500 के नकली नोटों में देखी गई, जिनकी संख्या 1.41 लाख से अधिक रही।
देश में नकली करेंसी की चुनौती एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बैंकिंग प्रणाली में कुल 2,29,746 नकली नोटों की पहचान की गई। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 5.7 प्रतिशत अधिक है, जिससे नकली मुद्रा की समस्या को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं।
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ₹500 के नोटों से जुड़ा है। बैंकिंग सिस्टम में पकड़े गए नकली नोटों में सबसे बड़ा हिस्सा इसी मूल्यवर्ग का रहा। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 1,41,907 नकली ₹500 के नोट बरामद किए गए, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 20.5 प्रतिशत अधिक हैं। कुल पकड़ी गई नकली करेंसी में इन नोटों की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत से ज्यादा रही।
₹500 का नोट देश में सबसे अधिक उपयोग होने वाले नोटों में शामिल है। रोजमर्रा के लेनदेन, व्यापारिक गतिविधियों और नकद भुगतान में इसका व्यापक इस्तेमाल होता है। ऐसे में इस मूल्यवर्ग के नकली नोटों में बढ़ोतरी आम लोगों, व्यापारियों और बैंकिंग व्यवस्था के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है।
RBI की रिपोर्ट के अनुसार सभी मूल्यवर्गों में एक जैसी स्थिति नहीं रही। जहां ₹200 और ₹100 के नकली नोटों की संख्या में कमी दर्ज की गई, वहीं ₹20 के नकली नोटों में प्रतिशत के आधार पर बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि उनकी कुल संख्या अभी भी सीमित है और बड़े मूल्यवर्ग के नोटों की तुलना में कम प्रभाव डालती है।
रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि नकली नोटों की पहचान में बैंकिंग नेटवर्क की भूमिका सबसे अहम बनी हुई है। कुल बरामद नकली नोटों में 97.6 प्रतिशत अन्य बैंकों द्वारा पकड़े गए, जबकि केवल 2.4 प्रतिशत नकली नोट RBI के काउंटरों पर चिन्हित हुए। इससे स्पष्ट होता है कि नकली मुद्रा की पहचान और रोकथाम का बड़ा दायित्व वाणिज्यिक बैंकों, शाखाओं और उनके कैश प्रबंधन तंत्र पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली नोटों के खिलाफ लड़ाई में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स, बैंक कर्मचारियों का प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बैंक लगातार नोटों की जांच के लिए मशीनों और उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे नकली करेंसी को समय रहते पहचानने में मदद मिलती है।
आम लोगों को भी नोट स्वीकार करते समय सुरक्षा चिन्हों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। वॉटरमार्क, सुरक्षा धागा, रंग बदलने वाली स्याही और उभरी हुई छपाई जैसे फीचर्स असली नोट की पहचान में मदद करते हैं। किसी भी संदिग्ध नोट की स्थिति में उसे तुरंत बैंक या संबंधित अधिकारियों को दिखाने की सलाह दी जाती है।
हालांकि कुल नकली नोटों की संख्या देश में प्रचलन में मौजूद मुद्रा की तुलना में अभी भी काफी कम है, लेकिन ₹500 के नकली नोटों में तेज बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि नकली करेंसी के खिलाफ निगरानी और सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। RBI और बैंकिंग संस्थान लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं ताकि वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता और लोगों का भरोसा कायम रखा जा सके।
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