पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी इस्तेमाल वाले एक एयरबेस को निशाना बनाने का दावा किया है। इसी बीच इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान तेज करते हुए रणनीतिक ब्यूफोर्ट कैसल और आसपास के इलाके पर कब्जे का दावा किया है। लेबनान में हुए इजराइली हमले में आठ लोगों की मौत की खबर है। बढ़ते संघर्ष के बीच तेल की कीमतों में भी उछाल आया है, जबकि अमेरिका, इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। इसी दौरान लेबनान में इजराइल ने अपने सैन्य अभियान का विस्तार करते हुए नई जमीनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बढ़ते संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी दिखाई देने लगा है।
पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष तथा युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद जारी सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्र को अस्थिर बना रखा है। हाल की घटनाओं ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि सप्ताहांत में ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई। अमेरिका का दावा है कि ईरान ने उसका MQ-1 ड्रोन मार गिराया था, जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था। इसी घटना के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के गोरुक क्षेत्र और क़ेश्म द्वीप पर मौजूद रडार तथा ड्रोन नियंत्रण केंद्रों को निशाना बनाया।
CENTCOM का कहना है कि इन ठिकानों का उपयोग ड्रोन संचालन और सैन्य गतिविधियों के समन्वय के लिए किया जा रहा था। हालांकि अमेरिकी सेना ने हमलों से हुए नुकसान का विस्तृत ब्योरा जारी नहीं किया है। ईरान की ओर से भी तत्काल किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
अमेरिकी हमलों के कुछ समय बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया। सरकारी मीडिया में प्रसारित बयान में कहा गया कि उस एयरबेस को निशाना बनाया गया जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना ने ईरानी क्षेत्र पर हमले के लिए किया था। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने एयरबेस का नाम सार्वजनिक नहीं किया और न ही यह बताया कि हमले में कितना नुकसान हुआ।
इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी KUNA के अनुसार देश के कई हिस्सों में सायरन बजाए गए और वायु रक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए कार्रवाई की गई। हालांकि किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी नहीं दी गई। विशेषज्ञ मानते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है। यही कारण है कि क्षेत्र के कई देश हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका की कई सैन्य सुविधाएं खाड़ी देशों में मौजूद हैं और इनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
Published by: Gulam Rasool. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.
सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी हलचल जारी है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से संघर्ष को समाप्त करने और तनाव कम करने के लिए बातचीत चल रही है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है। ईरान के प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट कहा है कि तेहरान अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकता। उनका कहना है कि किसी भी समझौते को तभी स्वीकार किया जाएगा जब उसमें ईरान के अधिकारों और हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित हो। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को नया और पहले से अधिक सख्त शांति प्रस्ताव भेजे जाने की खबरें सामने आई हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नए प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों को शामिल किया गया है। हालांकि प्रस्ताव का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। ट्रंप प्रशासन लगातार कहता रहा है कि उसकी प्राथमिकताओं में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज समुद्री मार्ग को फिर से खोलना शामिल है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। युद्ध शुरू होने के बाद इस क्षेत्र में बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को भी प्रभावित किया है। उधर लेबनान में संघर्ष एक अलग मोर्चे पर लगातार तेज हो रहा है। इजराइल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच कई सप्ताह से जारी झड़पों ने अब व्यापक सैन्य अभियान का रूप ले लिया है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को दक्षिणी लेबनान में आगे बढ़ने का निर्देश दिया है।
इजराइल का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और उत्तरी इजराइल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हाल के दिनों में हिजबुल्लाह द्वारा उत्तरी इजराइल की ओर रॉकेट और ड्रोन हमले किए गए थे, जिसके बाद इजराइल ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी। इजराइली सेना ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में स्थित लगभग 900 साल पुराने ब्यूफोर्ट कैसल और उसके आसपास के एक रणनीतिक पहाड़ी क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। यह इलाका सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां से आसपास के बड़े भूभाग पर नजर रखी जा सकती है।
ब्यूफोर्ट कैसल ऐतिहासिक महत्व का भी केंद्र है। सदियों पुराना यह किला दक्षिणी लेबनान के सबसे चर्चित स्थलों में गिना जाता है। हालांकि वर्तमान संघर्ष में इसका महत्व मुख्य रूप से इसकी सामरिक स्थिति के कारण बढ़ गया है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि रविवार को दक्षिणी लेबनान के दैर जहरानी क्षेत्र में हुए एक इजराइली हवाई हमले में आठ लोगों की मौत हुई। मृतकों में तीन महिलाएं शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार हमले में 19 लोग घायल हुए, जिनमें कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है। मार्च से शुरू हुए संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं और सीमा क्षेत्रों में सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। संघर्ष का असर केवल सुरक्षा हालात तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी इसके प्रभाव देखने को मिले हैं। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है या तेल आपूर्ति मार्ग प्रभावित होते हैं तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड दोनों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। इस बीच अमेरिका कूटनीतिक प्रयासों को भी आगे बढ़ा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार वाशिंगटन एक नए युद्धविराम प्रस्ताव पर काम कर रहा है।
प्रस्ताव के तहत पहले चरण में हिजबुल्लाह से हमले रोकने की अपेक्षा की गई है। इसके बदले में इजराइल से सैन्य कार्रवाई सीमित करने की मांग की गई है। हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव पर किसी अंतिम सहमति की जानकारी सामने नहीं आई है। लेबनानी संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी की ओर से भी इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार बातचीत के दौरान युद्धविराम की जिम्मेदारी को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र भी हालात पर नजर बनाए हुए है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लेबनान में बढ़ती सैन्य कार्रवाई को लेकर आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, नागरिकों की सुरक्षा और संघर्ष को सीमित करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि अमेरिका, ईरान, इजराइल और हिजबुल्लाह से जुड़ा यह संघर्ष और फैलता है तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है। इससे न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक ओर सैन्य हमले जारी हैं तो दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत के प्रयास भी चल रहे हैं। हालांकि अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि तनाव जल्द कम होने वाला है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता, इजराइल-लेबनान मोर्चे की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास इस संकट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
WestAsia Iran America Israel #Lebanon MiddleEastCrisis WorldNews Geopolitics OilMarket Hezbollah DonaldTrump GlobalConflict BreakingNews InternationalNews NetGramNews