फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले फुटबॉल के कई बड़े नियम बदले गए हैं। अब विवाद के दौरान मुंह ढकने या रेफरी के फैसले के विरोध में मैदान छोड़ने पर रेड कार्ड मिल सकता है। VAR को गलत कॉर्नर और कुछ कार्ड फैसलों की समीक्षा का अधिकार भी दिया गया है। इसके अलावा टाइम वेस्टिंग रोकने के लिए गोलकीपर, थ्रो-इन और सब्स्टीट्यूशन से जुड़े नियमों को और सख्त बनाया गया है।
फुटबॉल के नियम बनाने वाली संस्था इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (IFAB) ने 2026 फीफा वर्ल्ड कप से पहले कई बड़े नियम बदलावों की घोषणा की है। इन बदलावों का मकसद खेल में भेदभाव रोकना, समय की बर्बादी कम करना, मैच की रफ्तार बढ़ाना और खिलाड़ियों व दर्शकों का अनुभव बेहतर बनाना है।
फीफा रेफरी समिति के अध्यक्ष पियरलुइगी कोलीना के नेतृत्व में इन नए नियमों को लागू किया जाएगा। वर्ल्ड कप में जिम्मेदारी संभालने वाले 170 अधिकारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सभी 48 टीमों के कोचों को भी नए नियमों की जानकारी दी जा चुकी है।
विवाद के दौरान मुंह ढकने पर रेड कार्ड नए नियम के तहत यदि कोई खिलाड़ी बहस या टकराव की स्थिति में अपना मुंह ढकता है तो उसे सीधे रेड कार्ड दिखाया जा सकता है। सामान्य बातचीत के दौरान मुंह ढकने पर कोई रोक नहीं होगी, लेकिन विवाद की स्थिति में ऐसा करना संदिग्ध माना जाएगा। इस नियम का उद्देश्य नस्लीय, भेदभावपूर्ण या आपत्तिजनक टिप्पणियों को छिपाने की कोशिशों पर रोक लगाना है। कोलीना ने कहा कि दोस्ताना बातचीत और विवाद की स्थिति में फर्क होता है। अगर कोई खिलाड़ी टकराव के दौरान जानबूझकर मुंह ढकता है तो यह गंभीर मामला माना जाएगा।
रेफरी के फैसले के विरोध में मैदान छोड़ने पर भी रेड कार्ड अब कोई खिलाड़ी रेफरी के फैसले के विरोध में मैदान छोड़कर नहीं जा सकेगा। ऐसा करने पर उसे रेड कार्ड दिखाया जा सकता है। अगर कोई कोच या टीम अधिकारी खिलाड़ियों को मैदान छोड़ने के लिए उकसाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। किसी टीम के कारण मैच रद्द होता है तो उसे मुकाबला गंवाना पड़ सकता है।
VAR की शक्तियां बढ़ीं वर्ल्ड कप 2026 में VAR को पहले से ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। अब VAR इन स्थितियों में हस्तक्षेप कर सकेगा: गलत तरीके से दिए गए कॉर्नर किक को बदल सकेगा। गलत दूसरे येलो कार्ड की समीक्षा कर सकेगा। येलो या रेड कार्ड में गलत खिलाड़ी की पहचान होने पर फैसला सुधार सकेगा। हालांकि VAR केवल तब हस्तक्षेप करेगा जब फैसला जल्दी सुधारा जा सके और खेल की गति प्रभावित न हो।
गलत कॉर्नर मिलने पर बदलेगा फैसला यदि किसी टीम को गलती से कॉर्नर किक दे दी गई और VAR तुरंत यह पहचान लेता है कि फैसला गलत है, तो कॉर्नर को गोल किक में बदला जा सकता है। पहले ऐसे मामलों में VAR हस्तक्षेप नहीं कर सकता था।
टाइम वेस्टिंग रोकने के लिए नए नियम IFAB ने समय की बर्बादी रोकने के लिए कई नए कदम उठाए हैं। गोलकीपर के लिए पहले से लागू 8 सेकंड नियम जारी रहेगा। यदि गोलकीपर जानबूझकर गेंद रोककर समय बर्बाद करता है तो विरोधी टीम को कॉर्नर किक मिल सकती है। अब इसी तरह के नियम थ्रो-इन और गोल किक पर भी लागू किए जाएंगे। यदि खिलाड़ी थ्रो-इन लेने में जरूरत से ज्यादा समय लगाएगा तो थ्रो-इन विपक्षी टीम को दिया जा सकता है।
बदले गए खिलाड़ी को 10 सेकंड में मैदान छोड़ना होगा सब्स्टीट्यूट किए गए खिलाड़ी को 10 सेकंड के भीतर मैदान से बाहर जाना होगा। रेफरी अंतिम 5 सेकंड का संकेत भी देगा। यदि खिलाड़ी समय पर मैदान नहीं छोड़ता है तो नए खिलाड़ी को तुरंत मैदान में आने की अनुमति नहीं मिलेगी। उसे अगले खेल रुकने तक इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि चोट या सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों में छूट दी जाएगी।
मैदान पर इलाज के बाद एक मिनट बाहर रहना होगा अब मेडिकल टीम से मैदान पर इलाज लेने वाले अधिकांश खिलाड़ियों को खेल दोबारा शुरू होने के बाद कम से कम एक मिनट तक मैदान से बाहर रहना होगा। कुछ मामलों में छूट मिलेगी, जैसे: गोलकीपर की चोट सिर की चोट या कन्कशन एक ही टीम के दो खिलाड़ियों की टक्कर येलो या रेड कार्ड वाली घटना में लगी चोट पेनल्टी लेने वाले खिलाड़ी की चोट इस नियम का मकसद मामूली चोट का बहाना बनाकर खेल रोकने की प्रवृत्ति को कम करना है।
फ्री किक और कॉर्नर से पहले हुए फाउल पर भी VAR की नजर वर्ल्ड कप के दौरान VAR को एक और अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। यदि कॉर्नर या फ्री किक लिए जाने से पहले आक्रमणकारी टीम का कोई खिलाड़ी फाउल करता है और उसी मूव से गोल हो जाता है, तो VAR रेफरी को समीक्षा की सलाह दे सकता है। रेफरी वीडियो देखने के बाद गोल रद्द कर सकता है और खेल को दोबारा शुरू कराया जा सकता है। फीफा का मानना है कि इससे नियमों की उस खामी को दूर किया जाएगा, जहां गेंद खेल में आने से पहले हुए फाउल पर कार्रवाई करना मुश्किल था।
वर्ल्ड कप में मिलेगा कूलिंग ब्रेक 2026 वर्ल्ड कप में हर हाफ के 22वें मिनट के आसपास तीन मिनट का कूलिंग ब्रेक भी दिया जाएगा। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को गर्म मौसम में राहत देना है।
क्या होगा असर? इन नियमों से मैचों में समय की बर्बादी कम होने, विवादित फैसलों में सुधार आने और खेल की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही भेदभावपूर्ण व्यवहार और अनुशासनहीनता पर भी सख्ती होगी। वर्ल्ड कप 2026 से पहले लागू किए जा रहे ये बदलाव आने वाले वर्षों में दुनिया भर के फुटबॉल टूर्नामेंटों में भी देखने को मिल सकते हैं।
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Published by: Gulam Rasool. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
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