ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने दक्षिणी होर्मोज़गान प्रांत में स्ट्राइक कर सीजफायर का उल्लंघन किया है। ईरान ने इसे गंभीर उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई सुरक्षा कारणों से “डिफेंसिव स्ट्राइक” थी। इस तनाव का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर भी पड़ा है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है, जबकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है।
मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने दक्षिणी होर्मोज़गान प्रांत में स्ट्राइक कर मौजूदा सीजफायर का उल्लंघन किया है। ईरान के मुताबिक यह कार्रवाई “गंभीर उल्लंघन” है, जो करीब सात हफ्तों से लागू अस्थायी संघर्षविराम के खिलाफ जाती है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य तनाव और गहरा गया है।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मोज़गान प्रांत में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और धुएं के गुबार उठते देखे गए। इसके बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका की कार्रवाई को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसके “परिणामों की पूरी जिम्मेदारी वॉशिंगटन पर होगी।” अमेरिका की तरफ से क्या कहा गया? अमेरिकी पक्ष ने इन स्ट्राइक्स को “डिफेंसिव एक्शन” बताया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई ईरानी बलों से जुड़े संभावित खतरों को रोकने के लिए की गई थी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है और किसी समझौते तक पहुंचने में “कुछ दिन” लग सकते हैं।
हालांकि दोनों देशों के बयानों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। एक तरफ ईरान इसे सीजफायर का उल्लंघन बता रहा है, वहीं अमेरिका इसे सुरक्षा कारणों से की गई कार्रवाई बता रहा है। होर्मोज़गान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की भूमिका होर्मोज़गान प्रांत और उससे सटा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम क्षेत्र है। दुनिया के करीब 20% तेल और LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होती है। किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है।
हाल के तनाव के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी काफी कम हुई है। पहले जहां रोजाना 125 से 140 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर कुछ दर्जन तक रह गई है। इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर देखा जा रहा है।
तेल की कीमतों पर असर तनाव बढ़ने की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार में भी हलचल देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 3% बढ़कर करीब 98.91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो ऊर्जा कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिसका असर दुनियाभर में महंगाई पर पड़ सकता है।
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ईरान की चेतावनी और जवाबी कार्रवाई ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह किसी भी “आक्रामक कार्रवाई” का जवाब देगा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया है और दो अन्य ड्रोन व एक फाइटर जेट पर फायरिंग की है, जो कथित रूप से ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे।
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई की ओर से भी कड़ा संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि “अब हालात को पीछे नहीं ले जाया जा सकता” और क्षेत्र के देश अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के खिलाफ एकजुट रुख अपनाएं। शांति वार्ता और कूटनीतिक प्रयास तनाव के बीच कतर में ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत भी जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश एक संभावित प्रारंभिक समझौते (memorandum of understanding) पर काम कर रहे हैं। इसमें संघर्ष को सीमित करने और होर्मुज़ स्ट्रेट में शिपिंग को आंशिक रूप से फिर से खोलने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। ईरान की मांग है कि लगभग 24 अरब डॉलर की फ्रीज्ड संपत्तियों को जारी किया जाए, जबकि अमेरिका का मुख्य फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता पर है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि या तो “बेहतर समझौता होगा या कोई समझौता नहीं होगा।” परमाणु मुद्दा और पुराना विवाद अमेरिका लंबे समय से ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वहीं ईरान लगातार इन आरोपों को खारिज करता आया है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव कई वर्षों से जारी है और समय-समय पर यह सैन्य टकराव में बदलता रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता अस्थिरता का माहौल ईरान-अमेरिका तनाव के साथ ही पूरे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति लगातार अस्थिर बनी हुई है। इजरायल और लेबनान के बीच भी तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में हिजबुल्लाह पर हमले तेज करने की बात कही है।
लेबनान के दक्षिणी इलाकों में भी संभावित हवाई हमलों को देखते हुए लोगों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी गई है। इससे पहले भी कई बार संघर्षविराम समझौते के बावजूद सीमित सैन्य कार्रवाई जारी रही है। अंतरराष्ट्रीय चिंता क्यों बढ़ी? होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार का संघर्ष वैश्विक बाजारों को सीधे प्रभावित करता है। तेल की कीमतें, गैस सप्लाई, ट्रांसपोर्ट और यहां तक कि खाद्य वस्तुओं की लागत तक प्रभावित हो सकती है।
इसी कारण संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक शक्तियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और कूटनीतिक समाधान की कोशिशें तेज कर रही हैं। आगे क्या? फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है, हालांकि कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी दौरान यह तय होगा कि संघर्ष आगे बढ़ेगा या किसी समझौते की दिशा में जाएगा।
स्थिति पर वैश्विक बाजार, तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की नजर बनी हुई है। मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता के लिए किसी ठोस समझौते की उम्मीद अब भी बनी हुई है, लेकिन जमीनी हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
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