रूस के वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस के नए स्ट्रेन, खासकर Bundibugyo स्ट्रेन, के खिलाफ नई वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब WHO ने कांगो और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। फिलहाल Bundibugyo स्ट्रेन के लिए कोई आधिकारिक स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। भारत समेत कई देशों ने निगरानी बढ़ा दी है, जबकि DGCA ने युगांडा और कांगो से आने वाले यात्रियों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म अनिवार्य किया है। स्वास्थ्य एजेंसियां यात्रियों की स्क्रीनिंग और सतर्कता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।
इबोला वायरस को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच रूस के वैज्ञानिकों ने नए स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है। दक्षिण अफ्रीका स्थित रूसी दूतावास के अनुसार, रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने इस वैक्सीन के विकास की घोषणा की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैक्सीन हाल के प्रकोपों से जुड़े दुर्लभ Bundibugyo स्ट्रेन के खिलाफ भी असरदार हो सकती है।
यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब अफ्रीका के कई हिस्सों में इबोला संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसी महीने 17 तारीख को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया था।
Bundibugyo स्ट्रेन क्यों बना चिंता का कारण इबोला वायरस के कई अलग-अलग स्ट्रेन होते हैं, लेकिन Bundibugyo स्ट्रेन को अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है। हाल के प्रकोपों में इसी स्ट्रेन के मामले सामने आने के बाद वैज्ञानिक समुदाय और स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर काफी ऊंची हो सकती है। संक्रमण आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, शरीर में दर्द और बाद के चरणों में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं शामिल हो सकती हैं।
अब तक Bundibugyo स्ट्रेन के लिए कोई आधिकारिक रूप से स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं माना जाता। इसी वजह से रूस के नए वैक्सीन दावे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान दिया जा रहा है। रूस ने क्या कहा रूसी वैज्ञानिकों के अनुसार विकसित की गई नई वैक्सीन को इबोला के ताजा स्ट्रेन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हालांकि अभी तक वैक्सीन के ट्रायल डेटा, प्रभावशीलता दर और अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटरी मंजूरी से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
रूसी स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको की घोषणा के बाद इस वैक्सीन को लेकर चर्चा तेज हुई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वैक्सीन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कब तक शुरू हो सकता है या किन देशों में इसे उपलब्ध कराया जाएगा। WHO और अफ्रीकी एजेंसियां सतर्क WHO ने प्रभावित देशों और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है। संगठन ने देशों से कहा है कि प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग मजबूत की जाए और संक्रमण की आशंका वाले क्षेत्रों की यात्रा से बचा जाए।
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अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) ने भी मौजूदा इबोला प्रकोप को महाद्वीपीय स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। स्वास्थ्य एजेंसियों का मानना है कि सीमावर्ती देशों में संक्रमण फैलने का जोखिम बना हुआ है।
दक्षिण सूडान समेत कुछ पड़ोसी देशों को हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा गया है, क्योंकि सीमा पार आवाजाही के कारण संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ सकती है।
भारत ने भी बढ़ाई निगरानी वैश्विक अलर्ट के बाद भारत में भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी किया है।
DGCA के अनुसार युगांडा और कांगो से जुड़ी उड़ानों का संचालन करने वाली एयरलाइंस को यात्रियों के उतरने से पहले सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाना और जमा करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य संभावित जोखिम वाले यात्रियों की पहचान और निगरानी को आसान बनाना है। हालांकि अब तक भारत में किसी इबोला केस की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और एयरपोर्ट्स पर निगरानी बढ़ाई गई है।
इबोला कितना खतरनाक माना जाता है इबोला को दुनिया की सबसे गंभीर वायरल बीमारियों में गिना जाता है। WHO के अनुसार कुछ प्रकोपों में इसकी मृत्यु दर 50 प्रतिशत से ज्यादा तक दर्ज की गई है। हालांकि शुरुआती पहचान, आइसोलेशन और बेहतर चिकित्सा सुविधा से मरीजों की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इबोला जैसे संक्रमणों में सबसे बड़ी चुनौती तेजी से पहचान और संक्रमण रोकना होता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की निगरानी, मेडिकल आइसोलेशन और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन बेहद जरूरी माना जाता है।
वैक्सीन विकास क्यों अहम पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने कोविड-19 महामारी के दौरान यह देखा कि संक्रमण फैलने की स्थिति में वैक्सीन कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इबोला के कुछ स्ट्रेन्स के लिए पहले से वैक्सीन मौजूद हैं, लेकिन Bundibugyo स्ट्रेन के लिए प्रभावी और आधिकारिक तौर पर स्वीकृत विकल्प सीमित हैं।
इसी वजह से रूस की नई वैक्सीन पर वैज्ञानिक और स्वास्थ्य एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं। अगर यह वैक्सीन प्रभावी साबित होती है, तो प्रभावित देशों में संक्रमण नियंत्रण रणनीति को मजबूती मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी नई वैक्सीन को बड़े स्तर पर इस्तेमाल से पहले सुरक्षा और प्रभावशीलता के कई चरणों से गुजरना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं की समीक्षा और वैज्ञानिक डेटा सार्वजनिक होना भी जरूरी माना जाता है। वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती अफ्रीका में बार-बार सामने आने वाले इबोला प्रकोप यह दिखाते हैं कि दुनिया अभी भी संक्रामक बीमारियों के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। सीमाओं के पार यात्रा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक संपर्क के दौर में किसी भी संक्रमण को केवल एक क्षेत्र तक सीमित रखना आसान नहीं होता।
इसी वजह से WHO लगातार देशों को निगरानी, स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करने की सलाह दे रहा है। कई देशों ने एयरपोर्ट हेल्थ चेक, ट्रैवल एडवाइजरी और मेडिकल मॉनिटरिंग जैसे कदम भी बढ़ाए हैं।
फिलहाल दुनिया की नजर रूस द्वारा विकसित नई वैक्सीन और अफ्रीका में जारी इबोला स्थिति पर बनी हुई है। आने वाले समय में ट्रायल डेटा और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह वैक्सीन वैश्विक स्वास्थ्य रणनीति में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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