Zen Technologies ने AI आधारित एंटी-ड्रोन स्मार्ट बॉर्डर सिस्टम लॉन्च किया है, जिसके बाद कंपनी के शेयरों में करीब 4% की तेजी दर्ज की गई। कंपनी के मुताबिक सिस्टम में ड्रोन पहचानने और निष्क्रिय करने के लिए सॉफ्ट-किल और हार्ड-kill दोनों तकनीकें शामिल हैं। यह सिस्टम वाहन-माउंटेड, पोर्टेबल और फिक्स्ड वैरिएंट्स में उपलब्ध होगा। इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर वाले रिमोट कंट्रोल्ड वेपन स्टेशन भी जोड़े गए हैं। बढ़ती बॉर्डर सिक्योरिटी जरूरतों और ड्रोन खतरों के बीच इस लॉन्च को भारतीय डिफेंस टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी Zen Technologies के शेयरों में मंगलवार को तेजी देखने को मिली। कंपनी ने नया AI-पावर्ड एंटी-ड्रोन स्मार्ट बॉर्डर सिस्टम लॉन्च करने की घोषणा की, जिसके बाद शुरुआती कारोबार में उसके शेयर करीब 4 प्रतिशत तक चढ़ गए। बाजार में इस घोषणा को भारत के बढ़ते डिफेंस मॉडर्नाइजेशन और बॉर्डर सिक्योरिटी फोकस से जोड़कर देखा जा रहा है। कंपनी के मुताबिक नया सिस्टम सीमा सुरक्षा और संवेदनशील इलाकों की निगरानी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एंटी-ड्रोन तकनीक शामिल की गई है, जो संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों की पहचान करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। हाल के वर्षों में ड्रोन के इस्तेमाल में तेजी आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे सिस्टम की जरूरत लगातार बढ़ी है। क्या है नया स्मार्ट बॉर्डर सिस्टम Zen Technologies द्वारा पेश किया गया यह सिस्टम केवल ड्रोन डिटेक्शन तक सीमित नहीं है। कंपनी का कहना है कि इसमें “सॉफ्ट-किल” और “हार्ड-किल” दोनों तरह की क्षमताएं मौजूद हैं।
सॉफ्ट-किल तकनीक का इस्तेमाल किसी ड्रोन के कम्युनिकेशन या नेविगेशन सिस्टम को बाधित करने के लिए किया जाता है। इसके जरिए ड्रोन को कंट्रोल सिग्नल से काटा जा सकता है या उसका रास्ता बदला जा सकता है। दूसरी तरफ हार्ड-किल सिस्टम फिजिकल तरीके से ड्रोन को निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है।
विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में दोनों तकनीकों का होना जरूरी माना जाता है, क्योंकि अलग-अलग तरह के ड्रोन और खतरों से निपटने के लिए कई स्तरों की सुरक्षा चाहिए होती है। कई वैरिएंट में उपलब्ध होगा सिस्टम कंपनी ने बताया कि यह सिस्टम अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। इसे वाहन पर लगाए जाने वाले मोबाइल यूनिट, पोर्टेबल यूनिट और फिक्स्ड इंस्टॉलेशन मॉडल में उपलब्ध कराया जाएगा।
इसका मतलब है कि सुरक्षा एजेंसियां इसे सीमावर्ती इलाकों, सैन्य ठिकानों, एयरपोर्ट, महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों और बड़े सार्वजनिक आयोजनों में इस्तेमाल कर सकती हैं। पोर्टेबल यूनिट्स का इस्तेमाल उन इलाकों में उपयोगी माना जा रहा है जहां तेजी से तैनाती की जरूरत होती है।
रिमोट कंट्रोल्ड हथियार प्रणाली भी शामिल कंपनी के अनुसार बॉर्डर सिस्टम में रिमोट कंट्रोल्ड वेपन स्टेशन भी जोड़े गए हैं। इनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर लगे होंगे, जिनकी मदद से निगरानी और लक्ष्य पहचानने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
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इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर आम तौर पर हाई-रिजॉल्यूशन विजुअल और थर्मल इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इससे रात या खराब मौसम जैसी परिस्थितियों में भी निगरानी आसान हो सकती है। रक्षा क्षेत्र में ऐसी तकनीकों की मांग लगातार बढ़ रही है।
भारत में क्यों बढ़ रही है एंटी-ड्रोन सिस्टम की मांग पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में ड्रोन तकनीक का तेजी से विस्तार हुआ है। ड्रोन का इस्तेमाल केवल फोटोग्राफी या डिलीवरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निगरानी, तस्करी और सुरक्षा चुनौतियों से भी इसे जोड़ा जाने लगा है। सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों की खबरें कई बार सामने आ चुकी हैं।
इसी वजह से भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा क्षेत्र ऐसी तकनीकों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जो ड्रोन खतरों का जल्दी पता लगा सकें। सरकार भी रक्षा उपकरणों में घरेलू निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है। Zen Technologies जैसे भारतीय डिफेंस टेक प्लेटफॉर्म्स को इससे फायदा मिलने की संभावना देखी जा रही है।
शेयर बाजार में क्यों आया उछाल कंपनी की घोषणा के बाद निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी और शेयर में तेजी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि डिफेंस सेक्टर में ऑर्डर बुक, सरकारी खरीद और नई तकनीकी क्षमताएं निवेशकों के लिए अहम संकेत मानी जाती हैं।
हाल के समय में भारतीय शेयर बाजार में रक्षा कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ी है। इसकी एक वजह सरकार का “मेक इन इंडिया” और डिफेंस इंडिजेनाइजेशन पर जोर भी माना जाता है। घरेलू कंपनियों को रक्षा उत्पादन में ज्यादा भूमिका मिलने से बाजार में इस सेक्टर को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी डिफेंस कंपनी के लिए केवल तकनीक लॉन्च करना पर्याप्त नहीं होता। वास्तविक व्यावसायिक असर इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी को सरकारी या संस्थागत ऑर्डर कितनी मात्रा में मिलते हैं और तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कितना बढ़ता है।
AI आधारित सुरक्षा तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। AI आधारित सिस्टम संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, डेटा विश्लेषण और रियल-टाइम रिस्पॉन्स में मदद करते हैं। ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम में AI का इस्तेमाल इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यह सामान्य उड़ान गतिविधियों और संभावित खतरे के बीच तेजी से अंतर कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी सिस्टम केवल कैमरों और सेंसर तक सीमित नहीं रहेंगे। इनमें ऑटोमेटेड सर्विलांस, डेटा इंटीग्रेशन और AI आधारित खतरा विश्लेषण जैसी तकनीकें ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
डिफेंस सेक्टर पर निवेशकों की नजर Zen Technologies के नए सिस्टम लॉन्च के बाद बाजार में एक बार फिर डिफेंस टेक कंपनियों पर चर्चा बढ़ी है। निवेशक अब उन कंपनियों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जो निगरानी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और स्मार्ट डिफेंस सिस्टम्स पर काम कर रही हैं।
फिलहाल कंपनी की इस नई घोषणा को तकनीकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के सिस्टम्स की मांग कितनी बढ़ती है और कंपनियों को कितने बड़े ऑर्डर मिलते हैं, इस पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
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