अमेरिका के टेक्सास में एक वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यू सेंटर से कंगारू भाग जाने के बाद स्थानीय प्रशासन और सेंटर की टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। सोशल मीडिया पर मामला वायरल हो गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे सुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रहे हैं।
अमेरिका के टेक्सास में एक वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यू सेंटर से कंगारू के भाग निकलने का मामला चर्चा में है। स्थानीय प्रशासन ने जानवर की तलाश शुरू कर दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, कंगारू को आखिरी बार सेंटर के आसपास खुले इलाके में देखा गया था, जिसके बाद खोज अभियान चलाया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह उसी रेस्क्यू सेंटर से पिछले एक साल में दूसरी बार किसी “मार्सुपियल” यानी थैलीदार जानवर के भागने की घटना है। इससे सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था और जानवरों को रखने के तरीकों पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि कंगारू बाड़े से बाहर कैसे निकला और क्या सुरक्षा में कोई चूक हुई।
कंगारू के भागने की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कई यूजर्स ने इसे “टेक्सास का नया वाइल्ड वेस्ट” बताया, जबकि कुछ ने काउबॉय और कंगारू को लेकर मीम्स शेयर किए। इंटरनेट पर इस घटना को हल्के-फुल्के अंदाज में देखा जा रहा है, लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मामला केवल मजाक तक सीमित नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कंगारू अमेरिका के स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे जानवर खुले में घूमते हैं तो सड़क हादसों का खतरा बढ़ सकता है। रात के समय तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक आने पर जानवर और ड्राइवर दोनों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। इसके अलावा पालतू जानवरों के साथ टकराव या लोगों के कंगारू के करीब जाने की कोशिश भी परेशानी बढ़ा सकती है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को कंगारू दिखाई दे तो उसे पकड़ने या डराने की कोशिश न करें। अधिकारियों ने कहा है कि केवल उसकी लोकेशन की जानकारी संबंधित विभाग को दी जाए ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से उसे पकड़ सके। वन्यजीव विभाग की टीमें आसपास के इलाकों में निगरानी कर रही हैं।
अमेरिका में निजी वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यू सेंटर और एक्सॉटिक पालतू जानवरों का कारोबार कई राज्यों में चर्चा का विषय रहा है। टेक्सास में भी अलग-अलग प्रजातियों के विदेशी जानवर निजी संस्थानों और फार्मों में रखे जाते हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी माना जाता है, क्योंकि विदेशी जानवर स्थानीय पर्यावरण के लिए चुनौती बन सकते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कंगारू सामान्य तौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते, लेकिन घबराने या खुद को खतरे में महसूस करने पर वे चोट पहुंचा सकते हैं। बड़े कंगारुओं की ताकत काफी ज्यादा होती है और वे अपने पिछले पैरों से तेज वार कर सकते हैं। इसी वजह से अधिकारियों ने लोगों को जानवर से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।
इस घटना ने एक बार फिर वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यू सेंटरों की निगरानी और एक्सॉटिक जानवरों को रखने के नियमों पर ध्यान खींचा है। फिलहाल प्रशासन और रेस्क्यू टीमों की कोशिश कंगारू को सुरक्षित तरीके से पकड़कर वापस सेंटर लाने पर केंद्रित है।
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