सेमीकंडक्टर कंपनी TSMC के शेयरों में तेज़ उछाल के बाद ताइवान का कुल स्टॉक मार्केट वैल्यू भारत से आगे निकल गया है। AI और हाई-परफॉर्मेंस चिप्स की बढ़ती वैश्विक मांग ने ताइवान के बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है।
ताइवान का शेयर बाजार अब मार्केट वैल्यू के मामले में भारत से आगे निकल गया है। एशियाई बाजार रिपोर्ट्स और जापान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की कुल मार्केट कैप करीब 4.95 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जबकि हालिया उतार-चढ़ाव के बीच भारत का बाजार लगभग 4.92 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण ताइवान की चिप निर्माता कंपनी TSMC में आई तेज़ बढ़त मानी जा रही है।
पिछले एक साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सेक्टर की मांग तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिला है जो एडवांस्ड सेमीकंडक्टर बनाती हैं। ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी यानी TSMC दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता है और Apple, NVIDIA समेत कई बड़ी टेक कंपनियों के लिए चिप सप्लाई करती है।
AI मॉडल्स, डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाले हाई-एंड प्रोसेसर की मांग बढ़ने से TSMC के शेयर लगातार मजबूत हुए हैं। इसका असर केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे ताइवानी बाजार को ऊपर खींचने में इसकी बड़ी भूमिका रही। ताइवान के प्रमुख इंडेक्स में TSMC की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है, इसलिए कंपनी के शेयरों में हर बड़ी चाल पूरे बाजार पर असर डालती है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ताइवान की नेट एक्सटर्नल एसेट्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। इससे देश की वित्तीय स्थिति मजबूत दिख रही है। हालांकि बाहरी परिसंपत्तियों के मामले में जापान और चीन अब भी उससे आगे हैं, लेकिन ताइवान की तेज़ी ने निवेशकों का ध्यान फिर से एशियाई टेक बाजारों की ओर खींचा है।
TSMC की इस तेज़ रैली ने ताइवान के भीतर भी बहस छेड़ी है। कई विश्लेषक मानते हैं कि एक ही कंपनी पर बाजार की अत्यधिक निर्भरता जोखिम बढ़ा सकती है। अगर वैश्विक चिप मांग में गिरावट आती है या टेक सेक्टर में दबाव बढ़ता है, तो उसका असर सीधे पूरे बाजार पर दिखाई दे सकता है। इसके बावजूद फिलहाल AI आधारित निवेश थीम ने निवेशकों का भरोसा मजबूत बनाए रखा है।
दूसरी तरफ भारत का बाजार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है और विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा है। बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल कंपनियों ने भारतीय बाजार को मजबूत आधार दिया। लेकिन हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितता, ऊंचे वैल्यूएशन और कुछ सेक्टरों में मुनाफावसूली के कारण बाजार की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल बाजार रैंकिंग का मामला नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल पॉलिसी की दिशा भी दिखाता है। सेमीकंडक्टर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर आने वाले वर्षों में वैश्विक निवेश का बड़ा केंद्र बन सकते हैं। ताइवान ने इस क्षेत्र में लंबे समय से निवेश और विशेषज्ञता विकसित की है, जिसका फायदा अब उसे साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
भारत भी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की दिशा में कई योजनाओं पर काम कर रहा है। केंद्र सरकार ने चिप निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन उद्योग से जुड़े कई प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में हैं। ऐसे में ताइवान का उदाहरण यह दिखाता है कि किसी एक रणनीतिक सेक्टर में मजबूत पकड़ पूरे देश की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है।
निवेशकों के लिए भी यह संकेत माना जा रहा है कि ग्लोबल पोर्टफोलियो बनाते समय केवल घरेलू बाजार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। AI, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर आने वाले समय में वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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