भारत ने स्टार्टअप की परिभाषा बदली, डीप टेक कंपनियां और को-ऑपरेटिव सोसाइटी भी होंगी शामिल
2/6/2026, 12:06:00 PM
भारत सरकार ने Startup India के स्टार्टअप रिकग्निशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब स्टार्टअप को 10 साल तक मान्यता मिलेगी, बशर्ते उसका सालाना टर्नओवर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा न हो। डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए यह सीमा बढ़ाकर 20 साल और टर्नओवर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
भारत ने अपने स्टार्टअप रिकग्निशन फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब ज्यादा कंपनियों को पॉलिसी बेनिफिट्स मिल सकेंगे। इसके लिए टर्नओवर की सीमा बढ़ाई गई है, डीप-टेक कंपनियों के लिए पात्रता की समय-सीमा बढ़ाई गई है और को-ऑपरेटिव सोसाइटी को भी Startup India programme के दायरे में लाया गया है। Department for Promotion of Industry and Internal Trade द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार, अब किसी स्टार्टअप को कंपनी के गठन के 10 साल तक स्टार्टअप माना जाएगा, बशर्ते किसी भी वित्तीय वर्ष में उसका टर्नओवर 200 करोड़ रुपए से ज्यादा न हो। वहीं, डीप-टेक स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त कंपनियों के लिए यह समय-सीमा बढ़ाकर 20 साल कर दी गई है और टर्नओवर की सीमा 300 करोड़ रुपए तय की गई है। इस बदलाव का मकसद उभरती हुई डीप-टेक कंपनियों, लंबे समय तक R&D पर काम करने वाले उद्यमों और को-ऑपरेटिव्स को ज्यादा सपोर्ट देना है, ताकि वे भारत के तेजी से बढ़ते एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम में सक्रिय भूमिका निभा