पालंटियर के सीईओ एलेक्स कार्प ने कहा है कि एआई के तेजी से बढ़ते दौर में सबसे ज्यादा सुरक्षित और ताकतवर पोज़िशन स्किल्ड ट्रेड वर्कर्स और क्रिएटिव, अलग सोच रखने वाले लोगों की होगी। नई रिपोर्ट्स दिखा रही हैं कि रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिकल और टेक-सपोर्टेड ट्रेड्स की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, जबकि रूटीन ऑफिस जॉब्स पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर चर्चा अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रह गई है। अब बहस इस बात पर हो रही है कि आने वाले वर्षों में कौन सी नौकरियां बचेंगी, कौन सी बदल जाएंगी और किन लोगों की वैल्यू सबसे ज्यादा बढ़ेगी। इसी बीच पालंटियर के सीईओ एलेक्स कार्प का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि एआई युग में दो तरह के लोग सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में होंगे — पहला, स्किल्ड ट्रेड वर्कर्स जैसे इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, मैकेनिक और टेक्नीशियन; दूसरा, ऐसे लोग जिनकी सोच सामान्य पैटर्न से अलग और अनोखी होती है।
कार्प का मानना है कि एआई उन कामों को सबसे पहले प्रभावित करेगा जो डिजिटल, दोहराव वाले और नियम आधारित हैं। यानी ऐसी नौकरियां जहां हर दिन लगभग एक जैसा काम होता है, वहां एआई इंसानों की जगह तेजी से ले सकता है। इसमें बेसिक ऑफिस प्रोसेस, रूटीन रिपोर्टिंग, डेटा एंट्री, साधारण कंटेंट प्रोसेसिंग और कई बैक-ऑफिस रोल शामिल माने जा रहे हैं।
दूसरी तरफ, ऐसे काम जिनमें फिजिकल स्किल, मशीनों की समझ, मौके पर निर्णय लेने की क्षमता और इंसानी अनुभव की जरूरत होती है, उनकी मांग लगातार बढ़ती दिख रही है। यही वजह है कि अब दुनिया की कई बड़ी रिपोर्ट्स “स्किल्ड ट्रेड्स” को भविष्य का मजबूत करियर बता रही हैं।
ग्लोबल HR कंपनी Randstad की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के बाद जब जनरेटिव एआई मेनस्ट्रीम में आया, तब से रोबोटिक्स टेक्नीशियन्स की मांग में करीब 107 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। HVAC इंजीनियरों यानी एयर-कंडीशनिंग और वेंटिलेशन सिस्टम से जुड़े प्रोफेशनल्स की मांग लगभग 67 प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा डेटा सेंटर निर्माण, ऑटोमेशन और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कंस्ट्रक्शन रोल्स में भी करीब 30 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है।
रिपोर्ट में एक दिलचस्प शब्द इस्तेमाल किया गया है — “लेबर फ्लिप”। इसका मतलब है कि अब हालात ऐसे बन रहे हैं जहां स्किल्ड ट्रेड जॉब्स को भरना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार कई कंपनियों को इन पदों पर सही उम्मीदवार ढूंढने में औसतन 56 दिन लग रहे हैं, जबकि पारंपरिक नॉलेज वर्कर रोल्स में यह समय थोड़ा कम है। यह बदलाव इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आने वाले समय में हाथ से काम करने वाले टेक-स्किल्ड प्रोफेशनल्स की वैल्यू और बढ़ सकती है।
Boston Consulting Group यानी BCG की एक दूसरी स्टडी ने भी इसी दिशा में बड़ा संकेत दिया है। स्टडी के अनुसार अगले दो से तीन साल में अमेरिका की लगभग 50 से 55 प्रतिशत नौकरियां किसी न किसी रूप में एआई से “री-शेप” होंगी। इसका मतलब यह नहीं कि सभी लोगों की नौकरी खत्म हो जाएगी, बल्कि उनका काम करने का तरीका बदल जाएगा। कई कर्मचारियों को एआई टूल्स के साथ काम करना सीखना पड़ेगा और जो लोग खुद को तेजी से अपडेट नहीं करेंगे, उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सिर्फ नौकरी खत्म नहीं कर रहा, बल्कि नए तरह के प्रोफेशन भी पैदा कर रहा है। उदाहरण के तौर पर अब ऐसे इलेक्ट्रीशियन और मशीन ऑपरेटर्स की मांग बढ़ रही है जो एआई-आधारित डायग्नॉस्टिक सिस्टम समझ सकें। कई ट्रेनिंग संस्थान इन्हें “सुपर-ट्रेड्स” कह रहे हैं। यानी भविष्य में ऐसे प्रोफेशनल्स सबसे ज्यादा मूल्यवान माने जाएंगे जो तकनीकी समझ के साथ जमीन पर काम करने की क्षमता भी रखते हों। यानी केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि मशीनों, सिस्टम्स और रियल-टाइम समस्याओं को हल करने का अनुभव भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।
एलेक्स कार्प ने अपने बयान में एक और दिलचस्प बात कही। उनके अनुसार एआई के दौर में “अलग सोचने वाले लोग” भी सबसे ज्यादा आगे रहेंगे। उनका मानना है कि एआई बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेस कर सकता है, पैटर्न पहचान सकता है और सामान्य जवाब दे सकता है, लेकिन पूरी तरह नई सोच, असामान्य आइडिया और रचनात्मक दृष्टिकोण अभी भी इंसानी दिमाग की सबसे बड़ी ताकत है। विशेषज्ञों के अनुसार यही वजह है कि आने वाले समय में सिर्फ डिग्री काफी नहीं होगी। कंपनियां ऐसे लोगों को ज्यादा महत्व दे सकती हैं जो समस्याओं को नए तरीके से समझ सकें, तेजी से सीख सकें और बदलती टेक्नोलॉजी के साथ खुद को ढाल सकें।
शिक्षा क्षेत्र में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। कई देशों में अब ट्रेड एजुकेशन, टेक्निकल स्किल्स और इंडस्ट्री ट्रेनिंग पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। अमेरिका, जर्मनी और एशिया के कई हिस्सों में युवा फिर से तकनीकी और व्यावहारिक प्रोफेशन की तरफ लौट रहे हैं। पहले जिन नौकरियों को “ब्लू कॉलर” मानकर कम महत्व दिया जाता था, अब वही भविष्य की सबसे स्थिर और हाई-डिमांड जॉब्स मानी जा रही हैं। भारत में भी इसका असर धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है। देश में तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ऑटोमेशन, स्मार्ट फैक्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण स्किल्ड टेक्निकल वर्कर्स की मांग बढ़ सकती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जाए, तो भारत दुनिया के सबसे बड़े “स्किल्ड टेक वर्कफोर्स” हब में बदल सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि एआई बदलाव का दौर आसान नहीं होगा। जिन लोगों के पास नई तकनीक के अनुसार स्किल अपडेट नहीं होंगे, उनके लिए नौकरी का दबाव बढ़ सकता है। इसलिए आने वाले समय में “लाइफलॉन्ग लर्निंग” यानी लगातार नई चीजें सीखते रहना सबसे जरूरी कौशल बन सकता है। कुल मिलाकर, एआई का दौर सिर्फ मशीनों और ऑटोमेशन की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानी स्किल्स की नई वैल्यू तय करने का समय भी है। भविष्य में वही लोग सबसे मजबूत स्थिति में हो सकते हैं जो तकनीक को समझते हों, हाथ से काम करना जानते हों और साथ ही ऐसी सोच रखते हों जो मशीनों से अलग और ज्यादा रचनात्मक हो।
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