सर्बिया और स्पेन में इन दिनों भ्रष्टाचार, सत्ता के केंद्रीकरण और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। बेलग्रेड से लेकर मैड्रिड तक लोग पारदर्शिता, फ्री मीडिया और निष्पक्ष चुनाव की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं।
यूरोप के दो अलग–अलग देशों सर्बिया और स्पेन में इन दिनों जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। दोनों देशों में हजारों लोग भ्रष्टाचार, राजनीतिक दबाव और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। भले ही दोनों देशों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हों, लेकिन जनता की मांग लगभग एक जैसी है — पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता।
सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में राष्ट्रपति अलेक्ज़ांडर वूचिच की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन देखने को मिले। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर मीडिया को नियंत्रित करने, न्यायपालिका पर दबाव बनाने और विपक्ष की आवाज़ को कमजोर करने जैसे आरोप लगाए। सड़कों पर उतरे लोगों ने “एंटी–करप्शन” और “फ्री इलेक्शन” जैसे नारे लगाए और मांग की कि देश में निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्वतंत्र तरीके से काम करने दिया जाए।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार धीरे–धीरे सत्ता को केंद्रीकृत कर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता कमजोर होती जा रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकारी तंत्र का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने और आलोचनात्मक मीडिया को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है। कई लोगों ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में पारदर्शी जांच नहीं होती और सत्ता से जुड़े लोगों को बचाया जाता है।
बेलग्रेड की सड़कों पर हजारों लोगों की भीड़ जमा हुई, जहां लोगों ने बैनर और पोस्टर लेकर सरकार विरोधी नारे लगाए। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी, हालांकि अधिकांश रैलियां शांतिपूर्ण रहीं। विपक्षी दलों ने भी इन प्रदर्शनों का समर्थन किया और सरकार से लोकतांत्रिक सुधारों की मांग की। वहीं दूसरी ओर Spain में भी राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है। वहां सरकार और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े कई विवादों के बाद लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है। राजधानी मैड्रिड समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, राजनीतिक सौदों और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ मार्च निकाले। कुछ प्रदर्शन विशेष रूप से उन राजनीतिक समझौतों के खिलाफ थे, जिन्हें विपक्ष लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बता रहा है।
स्पेन में प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार को जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए अधिक पारदर्शिता दिखानी चाहिए। कई प्रदर्शनकारियों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मीडिया की निष्पक्षता को बचाने की मांग भी उठाई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में बड़ी संख्या में लोग राष्ट्रीय झंडे और विरोधी बैनर लेकर सड़कों पर दिखाई दिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप के कई देशों में जनता अब भ्रष्टाचार, राजनीतिक दबाव और संस्थागत नियंत्रण जैसे मुद्दों को लेकर पहले से ज्यादा संवेदनशील हो गई है। आर्थिक दबाव, बढ़ती महंगाई और राजनीतिक ध्रुवीकरण ने भी लोगों के असंतोष को बढ़ाया है। यही वजह है कि छोटी राजनीतिक घटनाएं भी बड़े जनआंदोलन का रूप ले रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सर्बिया और स्पेन के हालात यह दिखाते हैं कि लोकतांत्रिक देशों में जनता अब केवल चुनाव तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह लगातार जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रही है। अगर सरकारें जनता के भरोसे को बनाए रखने में असफल रहती हैं, तो विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता आने वाले समय में और बढ़ सकती है। फिलहाल दोनों देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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