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राजस्थान में भीषण गर्मी और हीटवेव को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां बढ़ा दी हैं। कई जिलों में समर वेकेशन अब 20 से 28 जून तक बढ़ाई गई है और जिला कलेक्टरों को स्थानीय मौसम के अनुसार फैसले लेने का अधिकार दिया गया है। तापमान 45 डिग्री के आसपास पहुंचने और बच्चों में हीटस्ट्रोक के खतरे को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। पहले कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग सिर्फ सुबह की शिफ्ट तक सीमित कर दी गई थी। सरकार का यह कदम बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाला माना जा रहा है।
राजस्थान इस समय प्रचंड गर्मी की चपेट में है। राज्य के कई जिलों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है, जबकि कुछ इलाकों में इससे भी ज्यादा गर्मी रिकॉर्ड की जा रही है। तपती धूप, गर्म हवाओं और लगातार चल रही लू ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। सबसे ज्यादा चिंता स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर जताई जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
सरकार के इस फैसले के बाद अब कई जिलों में स्कूलों की समर वेकेशन 20 जून से बढ़ाकर 28 जून तक कर दी गई है। साथ ही जिला कलेक्टरों को स्थानीय मौसम की स्थिति के अनुसार छुट्टियों या स्कूल टाइमिंग में बदलाव करने का अधिकार भी दिया गया है। इस फैसले को बच्चों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजस्थान में गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड
हर साल राजस्थान में गर्मी पड़ती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर माने जा रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और श्रीगंगानगर में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।
मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों में हीटवेव और लू का अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क और बेहद गर्म बना रह सकता है।
दोपहर के समय सड़कें लगभग सुनसान नजर आने लगी हैं। गर्म हवा के थपेड़े और तेज धूप लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर रहे हैं। ऐसे में छोटे बच्चों का स्कूल आना-जाना सबसे बड़ी चिंता बन गया था।
स्कूलों की टाइमिंग पहले ही बदली जा चुकी थी
गर्मी बढ़ने के साथ ही कई जिलों में प्रशासन ने पहले चरण में स्कूलों के समय में बदलाव किया था। सुबह की शिफ्ट लागू करते हुए स्कूलों का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक कर दिया गया था।
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इसका उद्देश्य बच्चों को दोपहर की तेज धूप और लू से बचाना था। हालांकि, तापमान लगातार बढ़ता रहा और हालात ऐसे बन गए कि सुबह का समय भी कई जगहों पर असहनीय लगने लगा।
इसके बाद अभिभावकों और शिक्षकों ने छुट्टियां बढ़ाने की मांग तेज कर दी।
माता-पिता की चिंता बनी फैसले की वजह
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और लोकल मीडिया में अभिभावकों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही थीं। कई माता-पिता का कहना था कि छोटे बच्चों को इतनी भीषण गर्मी में स्कूल भेजना जोखिम भरा हो गया है।
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स्कूल बसों में गर्म हवा, रास्ते में धूप और हीटस्ट्रोक का खतरा बच्चों के लिए परेशानी बढ़ा रहा था। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां बच्चों को पैदल या लंबी दूरी तय करके स्कूल जाना पड़ता है, वहां स्थिति और कठिन थी।
सरकार ने इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए छुट्टियां बढ़ाने का निर्णय लिया।
बच्चों में बढ़ रहा था हीटस्ट्रोक का खतरा
डॉक्टरों के अनुसार, छोटे बच्चों में हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। लगातार गर्मी में रहने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जिससे चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
दोपहर की धूप में बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है बच्चों को पर्याप्त पानी और आराम की जरूरत होती है ज्यादा गर्मी में शरीर जल्दी थक जाता है
ऐसे में स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाना स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी कदम माना जा रहा है।
कामकाजी माता-पिता के सामने नई चुनौती
हालांकि अधिकांश परिवारों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन लंबे अवकाश ने कामकाजी माता-पिता के सामने नई चुनौती भी खड़ी कर दी है।
कई माता-पिता अब बच्चों की देखभाल के लिए अलग व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ परिवारों में दादा-दादी या रिश्तेदार मदद कर रहे हैं, जबकि कई लोग वर्क फ्रॉम होम या डे-केयर जैसी सुविधाओं पर विचार कर रहे हैं।
इसके बावजूद अधिकांश अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले है और पढ़ाई बाद में भी पूरी की जा सकती है।
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क्या बदल रहा है राजस्थान का मौसम?
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में गर्मी का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। पहले जहां लू कुछ दिनों तक सीमित रहती थी, अब उसकी अवधि और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं।
क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। बढ़ते तापमान का असर सिर्फ स्वास्थ्य पर नहीं बल्कि शिक्षा, खेती, बिजली और पानी जैसी व्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक:
आने वाले वर्षों में गर्मी और ज्यादा बढ़ सकती है स्कूल कैलेंडर में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है परीक्षा और छुट्टियों का समय दोबारा तय करना पड़ सकता है
स्कूलों में जरूरी होंगी नई सुविधाएं
अब सवाल सिर्फ छुट्टियां बढ़ाने तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में स्कूलों को गर्मी से निपटने के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करनी होंगी।
इनमें शामिल हैं:
सभी क्लासरूम में अच्छे पंखे और कूलिंग व्यवस्था ठंडे और साफ पानी की सुविधा शेड वाले वेटिंग एरिया मेडिकल फर्स्ट-एड सिस्टम इमरजेंसी हेल्थ सपोर्ट
ग्रामीण स्कूलों में इन सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस की जा रही है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के बीच संतुलन जरूरी
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कुछ लोग मानते हैं कि ज्यादा छुट्टियों से पढ़ाई का नुकसान होता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की जान और स्वास्थ्य ज्यादा महत्वपूर्ण है।
ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल, होमवर्क और डिजिटल क्लासेज जैसी सुविधाओं के जरिए पढ़ाई की भरपाई की जा सकती है। लेकिन गंभीर गर्मी में बच्चों को मजबूर करना खतरनाक साबित हो सकता है।
सरकार का यह कदम यही संदेश देता है कि “अकादमिक लॉस” की भरपाई संभव है, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता।
आगे क्या हो सकता है?
अगर आने वाले वर्षों में गर्मी इसी तरह बढ़ती रही तो राजस्थान समेत कई राज्यों को स्कूलों के वार्षिक कैलेंडर में स्थायी बदलाव करने पड़ सकते हैं।
संभावना है कि:
समर वेकेशन पहले शुरू हों स्कूल सुबह जल्दी लगाए जाएं मई-जून में ऑनलाइन क्लासेज का विकल्प बढ़े हीटवेव प्रोटोकॉल बनाए जाएं
यह बदलाव सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत में देखने को मिल सकते हैं।
निष्कर्ष
राजस्थान सरकार द्वारा स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां बढ़ाने का फैसला मौजूदा हालात में जरूरी और संवेदनशील कदम माना जा रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी और लू के बीच बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई थी।
यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि बदलते मौसम और जलवायु संकट की गंभीरता को समझने का संकेत भी है। आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था को भी मौसम के बदलते स्वरूप के अनुसार ढालना होगा ताकि बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों को संतुलित रखा जा सके।
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