मुंबई के JNPA पोर्ट पर बढ़ते कंटेनर जाम और क्लियरेंस में देरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 12 बड़े पोर्ट्स की समस्याओं के समाधान के लिए हाई-लेवल कमेटी बनाई है। सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करना, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट प्रक्रिया तेज़ करना और सप्लाई चेन मजबूत बनाना है।
देश के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट्स में शामिल मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) पर बढ़ते कंटेनर जाम और क्लियरेंस में हो रही देरी ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कारोबार पर पड़ रहे असर को देखते हुए सरकार ने अब देश के 12 बड़े पोर्ट्स की समस्याओं की निगरानी और समाधान के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य पोर्ट्स पर बढ़ती भीड़ कम करना, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट घटाना, माल ढुलाई की प्रक्रिया तेज़ करना और भारत की सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और आधुनिक बनाना है। माना जा रहा है कि यह कदम व्यापार और निर्यात क्षेत्र को बड़ा राहत देने वाला साबित हो सकता है।
JNPA पर क्यों बढ़ी चिंता? मुंबई स्थित JNPA देश का सबसे व्यस्त कंटेनर पोर्ट माना जाता है। यहां हर दिन हजारों कंटेनर आते-जाते हैं, लेकिन हाल के दिनों में कंटेनर क्लियरेंस में देरी, ट्रकों की लंबी कतारें और कार्गो हैंडलिंग की धीमी रफ्तार के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है। व्यापार संगठनों और एक्सपोर्टर्स का कहना है कि पोर्ट पर बढ़ते जाम से माल समय पर नहीं पहुंच पा रहा, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। कई मामलों में कंटेनर दिनों तक पोर्ट पर फंसे रहने की शिकायतें सामने आई हैं।
क्या करेगी नई हाई-लेवल कमेटी? केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई यह कमेटी देश के 12 प्रमुख पोर्ट्स की संचालन व्यवस्था, कंटेनर मूवमेंट, कस्टम क्लियरेंस, ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी और डिजिटल सिस्टम की समीक्षा करेगी। कमेटी का फोकस खास तौर पर इन बिंदुओं पर रहेगा: कंटेनर क्लियरेंस प्रक्रिया तेज़ करना ट्रकों और कार्गो मूवमेंट में देरी कम करना पोर्ट्स पर डिजिटल मॉनिटरिंग बढ़ाना रेलवे और सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करना लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करना एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट प्रक्रिया को आसान बनाना सरकार चाहती है कि भारतीय पोर्ट्स वैश्विक स्तर पर ज्यादा तेज़, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनें ताकि कारोबारियों को कम समय और कम लागत में बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
व्यापार और उद्योग को मिलेगी राहत विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पोर्ट्स पर जाम और देरी की समस्या कम होती है तो इसका सीधा फायदा एक्सपोर्टर्स, इम्पोर्टर्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा। तेज़ क्लियरेंस से कारोबार की गति बढ़ेगी और कंपनियों की अतिरिक्त लागत कम होगी। भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को सुधारने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है। पीएम गतिशक्ति योजना, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और डिजिटल पोर्ट सिस्टम जैसे कई बड़े कदम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं।
सप्लाई चेन मजबूत करने पर सरकार का फोकस वैश्विक व्यापार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपने पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से अपग्रेड करना चाहता है। सरकार का मानना है कि तेज़ और आधुनिक पोर्ट सिस्टम देश के निर्यात को बढ़ाने और भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले समय में सरकार पोर्ट्स पर ऑटोमेशन, बेहतर ट्रैकिंग सिस्टम और तेज़ कस्टम प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकती है, जिससे कंटेनर जाम और देरी जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सके।
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