राजस्थान के जैसलमेर में तैयार की गई अनोखी “जिगज़ैग” डिज़ाइन वाली कृत्रिम झील अब चर्चा में है। जलदाय विभाग का दावा है कि यह परियोजना जैसलमेर और बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में 365 दिन तक पानी उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पानी की कमी हमेशा सबसे बड़ी चुनौती रही है। गर्मी के मौसम में हालात इतने मुश्किल हो जाते हैं कि कई गांवों में पीने के पानी तक के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसी बीच जैसलमेर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां रेगिस्तान के बीच एक खास डिजाइन की आर्टिफिशियल झील तैयार की गई है, जिसे “जिगज़ैग लेक” नाम दिया गया है।
जल संसाधन और जलदाय विभाग का दावा है कि यह झील आने वाले समय में पश्चिमी राजस्थान के जल संकट को काफी हद तक कम कर सकती है। विभाग के अनुसार इस परियोजना का उद्देश्य केवल बारिश का पानी जमा करना नहीं, बल्कि उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना और भूजल स्तर को मजबूत करना भी है। अधिकारियों का कहना है कि अगर यह मॉडल सफल रहा तो जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सूखे जिलों में सालभर पेयजल सप्लाई बनाए रखना संभव हो सकता है।
इस झील की सबसे बड़ी खासियत इसका “जिगज़ैग” डिजाइन है। सामान्य तालाब या झीलों के मुकाबले इसका आकार सीधा नहीं रखा गया, बल्कि इसे टेढ़े-मेढ़े पैटर्न में तैयार किया गया है। इसके पीछे वैज्ञानिक सोच यह है कि जब बारिश का पानी तेज रफ्तार से बहकर आता है तो वह सीधे निकलने के बजाय इस घुमावदार संरचना में धीरे-धीरे आगे बढ़े। इससे पानी ज्यादा समय तक झील में ठहरता है और जमीन में रिसाव बढ़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, राजस्थान की रेतीली जमीन में पानी बहुत तेजी से नीचे चला जाता है और सतह पर ज्यादा देर टिक नहीं पाता। ऐसे में “जिगज़ैग” संरचना पानी की गति कम करके उसे अधिक समय तक रोकने का काम करती है। इससे भूजल रिचार्ज होने की संभावना बढ़ती है। अगर भूजल स्तर में सुधार होता है तो आने वाले वर्षों में हैंडपंप, ट्यूबवेल और छोटे जल स्रोतों में भी पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
पश्चिमी राजस्थान पिछले कुछ वर्षों से लगातार हीटवेव और कम बारिश की मार झेल रहा है। कई बार इंदिरा गांधी नहर परियोजना पर निर्भरता भी चुनौती बन जाती है। मेंटेनेंस कार्य, तकनीकी खराबी या ऊपरी राज्यों में पानी को लेकर लिए गए फैसलों का असर सीधे राजस्थान के कई जिलों पर दिखाई देता है। गर्मी के मौसम में जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित होने की खबरें लगातार सामने आती रही हैं।
इसी वजह से अब सरकार और स्थानीय प्रशासन का फोकस छोटे और स्थानीय जल संरक्षण मॉडल पर बढ़ रहा है। पुराने तालाबों, बावड़ियों और जोहड़ों को फिर से विकसित करने के साथ-साथ नई तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। जैसलमेर की यह नई आर्टिफिशियल झील उसी दिशा में एक बड़ा प्रयोग मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों को भी इस परियोजना से काफी उम्मीदें हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इलाके में पानी लंबे समय तक उपलब्ध रहता है तो सबसे ज्यादा फायदा किसानों और पशुपालकों को होगा। अभी कई गांवों में खेती केवल बारिश पर निर्भर रहती है। पानी की कमी के कारण किसानों को फसल चयन में भी दिक्कत होती है। वहीं पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए दूर-दूर तक पानी ढूंढना पड़ता है।
अगर झील की वजह से आसपास के इलाकों में जल स्तर बढ़ता है तो सिंचाई के विकल्प मजबूत हो सकते हैं। इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ने की संभावना भी बनेगी। इसके अलावा पशुओं के लिए पानी उपलब्ध होने से डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को भी राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञ इस परियोजना को “क्लाइमेट एडाप्टेशन” का मजबूत उदाहरण मान रहे हैं। उनका कहना है कि बदलती जलवायु, बढ़ती गर्मी और अनिश्चित मॉनसून के दौर में केवल बड़ी नहर परियोजनाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। स्थानीय स्तर पर पानी रोकने और भूजल रिचार्ज करने वाले मॉडल ही भविष्य में सबसे ज्यादा असरदार साबित हो सकते हैं।
जल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की “जिगज़ैग” झीलों को बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और जोधपुर जैसे अन्य सूखे जिलों में भी विकसित किया जाए, तो राजस्थान की जल सुरक्षा काफी मजबूत हो सकती है। हालांकि इसके साथ पानी के सही इस्तेमाल पर भी बराबर ध्यान देना होगा। ड्रिप इरिगेशन, पाइपलाइन लीकेज कंट्रोल और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों को साथ जोड़ने से इसका फायदा कई गुना बढ़ सकता है।
फिलहाल जैसलमेर की यह झील राज्य में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। रेगिस्तान में पानी रोकने का यह नया प्रयोग आने वाले समय में कितना सफल होता है, इस पर पूरे राजस्थान की नजर टिकी है। अगर विभाग का दावा सही साबित हुआ तो यह मॉडल केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के अन्य सूखे इलाकों के लिए भी एक नई उम्मीद बन सकता है।
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