जोधपुर–दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस की क्षमता बढ़ाते हुए इसे 8 से 20 कोच का कर दिया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जोधपुर से नई विस्तारित रेक को फ्लैग-ऑफ किया, जिससे राजस्थान और दिल्ली के बीच यात्रा अब ज्यादा आसान और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
जोधपुर और दिल्ली के बीच सफर करने वाले हजारों यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। लंबे समय से सीटों की कमी और लगातार बढ़ती वेटिंग लिस्ट की समस्या झेल रहे यात्रियों को अब राहत मिलने जा रही है, क्योंकि जोधपुर–दिल्ली कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस को 8 कोच से बढ़ाकर सीधे 20 कोच के साथ चलाया जा रहा है। रेलवे के इस फैसले से ट्रेन की सीट क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है और अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा यात्री इस प्रीमियम ट्रेन सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जोधपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 20 कोच वाली नई विस्तारित वंदे भारत रेक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, रेलवे अधिकारी और कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान रेलवे मंत्रालय की ओर से यह संदेश दिया गया कि पश्चिमी राजस्थान में बढ़ती रेल मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि यात्रियों को बेहतर, तेज और आरामदायक यात्रा सुविधा मिल सके।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, पहले इस ट्रेन में सीमित सीटों के कारण यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। त्योहारों, छुट्टियों और वीकेंड के दौरान तो हालत ऐसी हो जाती थी कि टिकट खुलते ही वेटिंग लिस्ट लंबी हो जाती थी। कई यात्रियों को मजबूरी में महंगे टिकट लेने पड़ते थे या फिर दूसरी ट्रेनों का सहारा लेना पड़ता था। अब 20 कोच होने से सीटों की उपलब्धता बढ़ेगी और यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना पहले से कहीं ज्यादा होगी।
जोधपुर–दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस पश्चिमी राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनों में गिनी जा रही है। यह ट्रेन जोधपुर से दिल्ली कैंट तक लगभग 606 किलोमीटर की दूरी तय करती है और करीब 8 घंटे 5 मिनट में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाती है। ट्रेन सुबह 5:30 बजे जोधपुर से रवाना होकर जयपुर होते हुए दोपहर 1:30 बजे दिल्ली कैंट पहुंचती है। वहीं वापसी में यह ट्रेन दोपहर 3:10 बजे दिल्ली कैंट से चलकर रात 11:20 बजे जोधपुर पहुंचती है।
इस ट्रेन का रूट भी पश्चिमी राजस्थान के लिए काफी अहम माना जा रहा है। मार्ग में मेड़ता रोड, डेगाना, मकराना, फुलेरा, गांधीनगर जयपुर, जयपुर, अलवर, रेवाड़ी और गुरुग्राम जैसे प्रमुख स्टेशन आते हैं। इससे न सिर्फ जोधपुर बल्कि मारवाड़ क्षेत्र के कई जिलों को भी सीधा फायदा मिलता है। व्यापार, नौकरी, शिक्षा और पर्यटन के लिहाज से दिल्ली जाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसी वजह से रेलवे इस रूट को अब प्राथमिकता दे रहा है।
20 कोच की नई रेक केवल सीटें बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यात्रियों को कई अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलने वाली हैं। रेलवे के अनुसार नई व्यवस्था में ज्यादा बायो-टॉयलेट, बेहतर बैठने की सुविधा, आधुनिक सुरक्षा सिस्टम और अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा ट्रेन के अंदर खानपान और साफ-सफाई सेवाओं को भी बेहतर करने की तैयारी की गई है।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल एक ट्रेन की क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान के रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत है। जोधपुर को भविष्य में “कोचिंग टर्मिनल” के रूप में विकसित करने की योजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो आने वाले समय में जोधपुर से नई वंदे भारत और अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों की शुरुआत भी हो सकती है।
इस फैसले का सीधा असर पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर भी देखने को मिल सकता है। जोधपुर पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय शहर है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे होटल, ट्रैवल, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजारों को फायदा मिलेगा। वहीं दिल्ली और राजस्थान के बीच बिजनेस ट्रैवल करने वाले लोगों के लिए भी यह ट्रेन अब ज्यादा सुविधाजनक साबित होगी।
यात्रियों के बीच इस फैसले को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग रेलवे के इस कदम की तारीफ कर रहे हैं और इसे जोधपुर के लिए बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं। कई यात्रियों का कहना है कि लंबे समय से इस ट्रेन में सीटें कम पड़ रही थीं और अब नई व्यवस्था से आम यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा।
रेलवे मंत्रालय का कहना है कि आने वाले समय में यात्रियों की मांग और ट्रैफिक को देखते हुए अन्य प्रमुख रूटों पर भी इसी तरह क्षमता बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल जोधपुर–दिल्ली वंदे भारत का 20 कोच मॉडल पश्चिमी राजस्थान के रेल इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे सकता है।
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