वायरोलॉजिस्ट एम्मा थॉमसन के मुताबिक दुनिया अभी भी अगली महामारी के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। DRC और युगांडा में फैले Ebola outbreak को शुरुआती दौर में गलत टेस्टिंग के कारण पहचानने में देरी हुई। WHO ने इसे हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की महामारी रोकने के लिए बेहतर टेस्टिंग, जीनोमिक सीक्वेंसिंग और पहले से मजबूत तैयारी बेहद जरूरी है।
दुनिया अभी तक कोविड-19 महामारी के असर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अब Hantavirus और Ebola जैसे वायरस फिर से वैश्विक चिंता का कारण बनने लगे हैं। हाल के दिनों में अलग-अलग देशों में सामने आए संक्रमण मामलों ने हेल्थ एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों को सतर्क कर दिया है।
इसी बीच यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के सेंटर फॉर वायरस रिसर्च की डायरेक्टर और प्रसिद्ध वायरोलॉजिस्ट एम्मा थॉमसन ने चेतावनी दी है कि दुनिया अभी भी अगली बड़ी महामारी के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी बीमारी के फैलने के बाद जल्दबाजी में लैब, टेस्टिंग सिस्टम और दवाइयों की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं होता। असली तैयारी महामारी शुरू होने से पहले करनी पड़ती है। उनके मुताबिक, वर्तमान Ebola और Hantavirus मामलों ने यह दिखा दिया है कि वैश्विक पब्लिक हेल्थ सिस्टम में अभी भी कई कमजोरियां मौजूद हैं।
रिपोर्ट के अनुसार अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में फैले Ebola संक्रमण का शुरुआती चरण कई हफ्तों तक पकड़ में नहीं आया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि शुरुआती टेस्ट केवल Zaire स्ट्रेन की पहचान के लिए बनाए गए थे, जबकि संक्रमण Bundibugyo स्ट्रेन से फैल रहा था।
एम्मा थॉमसन ने कहा कि यह वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी कमजोरी है। अक्सर हेल्थ सिस्टम केवल सबसे सामान्य वायरस स्ट्रेन पर ध्यान देता है, जबकि कम चर्चित स्ट्रेन भी बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया को केवल बड़े और चर्चित वायरस पर निर्भर रहने के बजाय सभी संभावित स्ट्रेन्स के लिए पहले से तैयारी करनी होगी। इसमें हाई-कंटेनमेंट लैब्स, एडवांस डायग्नोस्टिक्स, जीनोमिक सर्विलांस, वैक्सीन प्लेटफॉर्म और इंटरनेशनल रिसर्च नेटवर्क की जरूरत होगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक DRC और पड़ोसी देश युगांडा में Ebola संक्रमण काफी समय तक बिना पहचान के फैलता रहा। मई के मध्य में दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर outbreak घोषित किया, लेकिन तब तक वायरस कई इलाकों तक पहुंच चुका था। अब तक सैकड़ों संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 575 से ज्यादा संदिग्ध केस, 51 पुष्टि किए गए संक्रमण और 148 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई इलाकों में टेस्टिंग सुविधाएं सीमित हैं।
इंपीरियल कॉलेज लंदन से जुड़े रिसर्च एनालिसिस में अनुमान लगाया गया कि outbreak घोषित होने तक 800 से 1000 लोग संक्रमित हो चुके हो सकते थे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस Ebola outbreak को “Public Health Emergency” घोषित किया है। हालांकि WHO का कहना है कि फिलहाल इसमें कोविड जैसी वैश्विक महामारी बनने की संभावना नहीं दिख रही। विशेषज्ञों के मुताबिक Ebola वायरस हवा से नहीं फैलता।
यह संक्रमित व्यक्ति या जानवर के शरीर के तरल पदार्थ जैसे खून, पसीना, लार, उल्टी या मल के संपर्क से फैलता है। यही वजह है कि इसका संक्रमण कोविड-19 की तुलना में सीमित गति से फैलता है।
एम्मा थॉमसन ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई हेल्थ वर्कर्स भी संक्रमित पाए गए हैं। इसका मतलब है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण नियंत्रण प्रणाली में गंभीर कमी हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि राजधानी किन्शासा और युगांडा के कंपाला जैसे बड़े शहरों में संक्रमण के मामले मिलना यह संकेत देता है कि वायरस पहले ही मानव यात्रा नेटवर्क के जरिए काफी दूर तक पहुंच चुका था।
Bundibugyo Ebola स्ट्रेन के लिए फिलहाल प्रभावी वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में डॉक्टरों और स्वास्थ्य एजेंसियों का पूरा फोकस संक्रमण की जल्दी पहचान, मरीजों को सपोर्टिव ट्रीटमेंट देने और वायरस को फैलने से रोकने पर है।
थॉमसन ने कहा कि जीनोमिक सीक्वेंसिंग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वायरस के प्रकार की पहचान, संक्रमण की चेन और मानव-से-मानव फैलाव की स्थिति को समझने में मदद मिलती है।
हाल के दिनों में Hantavirus को लेकर भी सोशल मीडिया पर काफी डर और अफवाहें फैलीं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल Hantavirus में वैश्विक महामारी बनने जैसी स्थिति नहीं दिखती। यह वायरस आमतौर पर संक्रमित चूहों और उनके मल-मूत्र के संपर्क से फैलता है।
लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दुनिया को केवल मौजूदा वायरस ही नहीं बल्कि भविष्य में आने वाले संभावित “Disease X” के लिए भी तैयार रहना होगा।
कई वायरोलॉजिस्ट्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया ने कोविड महामारी से पर्याप्त सबक नहीं लिया। उनके मुताबिक भविष्य में कोई नया और अज्ञात वायरस अचानक सामने आ सकता है, जिसे फिलहाल “Disease X” नाम दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगली महामारी से निपटने के लिए केवल दवाइयां और अस्पताल पर्याप्त नहीं होंगे।
दुनिया को पहले से मजबूत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, वैश्विक डेटा शेयरिंग, तेज रिसर्च नेटवर्क और पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि वायरस सीमाएं नहीं देखते। किसी एक देश की कमजोरी पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि महामारी के समय घबराहट में प्रतिक्रिया देने के बजाय लगातार तैयारी और निवेश ही सबसे बड़ा समाधान है।
एम्मा थॉमसन के मुताबिक, “महामारी शुरू होने के बाद तैयारी करना बहुत देर हो सकती है। दुनिया को पहले से तैयार रहना होगा, क्योंकि अगला बड़ा वायरस कब सामने आएगा, यह कोई नहीं जानता।”
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