Published by: Netgram Team. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.
Mount Everest पर नेपाल की तरफ़ से एक ही दिन में 274 पर्वतारोहियों ने शिखर पर पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया। अचानक साफ मौसम के कारण सैकड़ों climbers एक साथ summit ridge पर पहुंच गए, जिससे भीड़, ऑक्सीजन की कमी और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर नया रिकॉर्ड
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह सिर्फ़ पर्वतारोहण नहीं बल्कि रिकॉर्ड भीड़ है। नेपाल की तरफ़ से एक ही दिन में 274 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना दिया।
यह अब तक का सबसे बड़ा “सिंगल-डे समिट” माना जा रहा है। अचानक साफ हुए मौसम और सीमित “वेदर विंडो” के कारण सैकड़ों climbers एक साथ summit ridge पर पहुंच गए, जिससे वहां ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन गई।
इस रिकॉर्ड ने एक बार फिर दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या एवरेस्ट अब एडवेंचर से ज्यादा “ओवरक्राउडेड टूरिस्ट ज़ोन” बनता जा रहा है?
क्यों बनती है एवरेस्ट पर इतनी भीड़?
Mount Everest पर चढ़ाई सालभर संभव नहीं होती। यहां मौसम बेहद खतरनाक रहता है और summit attempt के लिए केवल कुछ दिनों की छोटी “weather window” मिलती है।
जब तेज हवाएं कम होती हैं और तापमान थोड़ा स्थिर होता है, तब सैकड़ों पर्वतारोही एक साथ summit push शुरू कर देते हैं।
नेपाल सरकार हर साल बड़ी संख्या में climbing permits जारी करती है क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए आय का बड़ा स्रोत है। लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब सीमित मौसम में बहुत ज्यादा लोग एक ही दिन summit करने निकल पड़ते हैं।
इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। मौसम अचानक साफ हुआ और बड़ी संख्या में climbers ने एक साथ summit attempt किया।
2019 की डरावनी तस्वीरें फिर आईं याद
एवरेस्ट पर भीड़ का मुद्दा नया नहीं है। साल 2019 में दुनिया ने वो तस्वीरें देखी थीं जिनमें summit ridge पर climbers लंबी लाइन में खड़े दिखाई दे रहे थे।
उस समय “ट्रैफिक जाम” के कारण कई पर्वतारोहियों को अत्यधिक ऊंचाई पर घंटों इंतजार करना पड़ा था। ऑक्सीजन की कमी, थकान और खराब मौसम के कारण कई लोगों की जान चली गई थी।
हालांकि उस साल नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ़ से कुल 354 summit हुए थे, लेकिन इस बार खास बात यह रही कि पूरा दबाव सिर्फ नेपाली रूट पर था।
इसी वजह से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं।
Continue Reading23 मई 2026
एवरेस्ट अब प्रोफेशनल मिशन नहीं, बड़ा बिज़नेस बन चुका है
कुछ दशक पहले तक एवरेस्ट पर चढ़ाई केवल बेहद अनुभवी पर्वतारोहियों का सपना माना जाता था। लेकिन अब यह हाई-एंड एडवेंचर टूरिज़्म इंडस्ट्री का हिस्सा बन चुका है।
आज कई commercial expedition कंपनियां लाखों रुपये लेकर climbers को Everest package उपलब्ध कराती हैं। इसमें गाइड, ऑक्सीजन सिलेंडर, कैंप और रस्सियों जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं।
सोशल मीडिया के दौर में भी Everest craze तेजी से बढ़ा है। कई लोग इसे “life achievement” या “Instagram moment” के रूप में देखने लगे हैं।
यही वजह है कि हर साल summit attempts की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
विशेषज्ञ क्यों जता रहे हैं चिंता?
Reuters और कई पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार, एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ केवल असुविधा नहीं बल्कि जानलेवा खतरा बन सकती है।
Summit zone को “Death Zone” कहा जाता है क्योंकि वहां ऑक्सीजन बेहद कम होती है। इंसानी शरीर वहां लंबे समय तक सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाता।
अगर climbers को summit ridge पर लाइन में रुकना पड़े, तो उनका ऑक्सीजन तेजी से खत्म हो सकता है।
इसके अलावा fixed ropes, rescue operations और helicopter evacuation जैसी सुविधाओं की भी एक सीमा होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर परमिट संख्या और सुरक्षा नियमों पर सख्ती नहीं हुई, तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
उम्र की सीमाएं भी टूट रहीं
इस सीज़न की एक खास बात यह भी रही कि अलग-अलग उम्र के पर्वतारोहियों ने summit किया।
Continue Reading22 मई 2026
18 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई पर्वतारोही बियांका ऐडलर सबसे कम उम्र की ऑस्ट्रेलियाई climber बनीं जिन्होंने Everest summit किया। वहीं 75 वर्षीय वरिष्ठ पर्वतारोही “वॉली” ने भी सफल summit किया।
यह दिखाता है कि Everest अब हर उम्र के adventure seekers को आकर्षित कर रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र से ज्यादा जरूरी proper training, physical fitness और high-altitude experience है।
शेर्पा गाइड्स पर बढ़ता दबाव
एवरेस्ट अभियान में स्थानीय शेर्पा समुदाय की भूमिका बेहद अहम होती है। यही लोग रास्ते तैयार करते हैं, रस्सियां फिक्स करते हैं और climbers की मदद करते हैं।
लेकिन बढ़ती भीड़ का सबसे ज्यादा दबाव इन्हीं पर पड़ता है।
कई शेर्पा गाइड्स को खतरनाक परिस्थितियों में बार-बार summit trips करनी पड़ती हैं। ऊंचाई पर rescue missions भी अक्सर इन्हीं के जिम्मे होते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि Everest tourism से नेपाल की अर्थव्यवस्था को फायदा जरूर होता है, लेकिन स्थानीय गाइड्स की सुरक्षा और कामकाजी हालात पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
पर्यावरण पर भी बढ़ रहा खतरा
एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ केवल सुरक्षा का नहीं बल्कि पर्यावरण का भी बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
हर साल हजारों climbers और expedition टीमें वहां प्लास्टिक, ऑक्सीजन सिलेंडर, टेंट और दूसरे कचरे छोड़ जाती हैं।
इसी कारण Everest को कई बार “World’s Highest Garbage Dump” भी कहा गया है।
नेपाल सरकार सफाई अभियान चलाती रही है, लेकिन बढ़ते पर्यटन के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
Continue Reading21 मई 2026
भारतीय पर्वतारोहियों के लिए क्या संदेश?
India सहित दक्षिण एशिया के कई देशों में adventure tourism तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय trekkers और climbers अब Everest और Himalayan expeditions में हिस्सा ले रहे हैं।
यह घटना एक बड़ा संकेत देती है कि पर्वतारोहण केवल रोमांच नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है।
Proper training, acclimatization, safety discipline और environmental awareness अब पहले से ज्यादा जरूरी हो चुके हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि social media excitement की बजाय climbers को वास्तविक जोखिम समझकर ही ऐसे अभियानों में हिस्सा लेना चाहिए।
क्या Everest पर नए नियम आएंगे?
अब सवाल उठ रहा है कि क्या नेपाल सरकार Everest climbing permits की संख्या सीमित करेगी?
कुछ विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि summit attempts को अलग-अलग दिनों में बांटा जाए ताकि भीड़ कम हो सके। वहीं कुछ लोग minimum experience requirement लागू करने की मांग कर रहे हैं।
अगर आने वाले वर्षों में climbers की संख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो Everest पर stricter regulations लागू हो सकते हैं।
निष्कर्ष
Mount Everest पर एक ही दिन में 274 climbers का summit करना जहां एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है, वहीं यह आधुनिक adventure tourism की चुनौतियों को भी उजागर करता है।
भीड़, ऑक्सीजन की कमी, rescue limits और environmental damage जैसे मुद्दे अब पहले से ज्यादा गंभीर हो चुके हैं।
Everest आज भी दुनिया का सबसे बड़ा सपना है, लेकिन यह सपना तभी सुरक्षित रह सकता है जब रोमांच के साथ जिम्मेदारी, नियम और प्रकृति के प्रति सम्मान भी जुड़ा हो।
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
#MountEverest #EverestSummit #Nepal #Climbers #Mountaineering #Adventure #EverestRecord #SummitDay #ExtremeAdventure #MountainLife #TravelNews #Himalayas #Everest2026 #BreakingNews #HighAltitude #NetGramNews
21 मई 2026