सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि PM नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को Melody टॉफ़ी गिफ्ट करने के बाद Melody बनाने वाली Parle कंपनी के शेयर 5% अपर सर्किट पर पहुंच गए। फैक्ट-चेक में सामने आया कि जिस कंपनी के शेयर चढ़े, उसका Melody ब्रांड या Parle Products से कोई सीधा संबंध नहीं था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली दौरे के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वह इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारतीय मशहूर Melody टॉफ़ी गिफ्ट करते नजर आए। वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर मीम्स, पोस्ट्स और रिएक्शन की बाढ़ आ गई। लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर एक और दावा भी वायरल होने लगा कि “Melody बनाने वाली Parle कंपनी के शेयरों में जबरदस्त उछाल आ गया” और “PM मोदी के Melody गिफ्ट के बाद Parle का शेयर 5% अपर सर्किट पर पहुंच गया।”
कई यूजर्स ने इसे “मोदी इफेक्ट” बताते हुए शेयर बाजार से जोड़कर पोस्ट्स शेयर किए। कुछ पोस्ट्स में यह भी दावा किया गया कि Melody ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ने के कारण निवेशकों ने कंपनी के शेयरों में जमकर खरीदारी शुरू कर दी। देखते ही देखते यह दावा फेसबुक, एक्स और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया।
लेकिन जब इस पूरे मामले की विस्तार से जांच की गई, तो कहानी कुछ और ही निकली।
फैक्ट-चेक में सामने आया कि सोशल मीडिया पर जिस “Parle कंपनी” के शेयर बढ़ने की बात कही जा रही थी, वह असल में Melody टॉफ़ी बनाने वाली कंपनी नहीं थी। रिपोर्ट्स के अनुसार जिस स्टॉक में करीब 5% की तेजी देखने को मिली, वह Parle Industries Ltd नाम की एक अलग कंपनी थी, जो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE में लिस्टेड है।
यहां सबसे अहम बात यह है कि Parle Industries Ltd का कारोबार FMCG या टॉफ़ी-बिस्किट बनाने से जुड़ा नहीं है। कंपनी का मुख्य बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल-एस्टेट, पेपर और रीसाइक्लिंग सेक्टर से संबंधित बताया जाता है। यानी जिस कंपनी के शेयर में उछाल आया, उसका Melody टॉफ़ी या Parle-G जैसे ब्रांड्स से कोई सीधा व्यावसायिक संबंध नहीं है।
अब सवाल उठता है कि आखिर Melody बनाने वाली असली कंपनी कौन है?
Melody टॉफ़ी, Parle-G बिस्किट, Monaco, Krack Jack और Mango Bite जैसे लोकप्रिय प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी का नाम Parle Products Pvt Ltd है। यह भारत की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में से एक मानी जाती है। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि Parle Products एक प्राइवेट कंपनी है और यह किसी भी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं है।
इसका मतलब साफ है कि आम निवेशक शेयर बाजार के जरिए सीधे “Melody वाली Parle कंपनी” के शेयर खरीद ही नहीं सकते। क्योंकि कंपनी सार्वजनिक रूप से ट्रेड नहीं होती।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि वायरल वीडियो और सोशल मीडिया ट्रेंड के बाद कई छोटे निवेशकों और ट्रेडर्स ने सिर्फ “Parle” नाम देखकर Parle Industries Ltd के शेयर खरीदने शुरू कर दिए। नाम समान होने की वजह से लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई और इसी वजह से शेयर में अचानक तेजी देखने को मिली।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाद में Parle Industries Ltd की ओर से भी स्पष्ट किया गया कि कंपनी का Parle Products या Melody ब्रांड से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। कंपनी ने साफ कहा कि उसका बिजनेस पूरी तरह अलग सेक्टर्स में संचालित होता है।
यह मामला शेयर बाजार में फैलने वाली अफवाहों और अधूरी जानकारी के खतरे को भी उजागर करता है। अक्सर देखा गया है कि किसी वायरल खबर, सेलिब्रिटी ट्रेंड या सोशल मीडिया हाइप के कारण निवेशक बिना पूरी जानकारी के किसी भी स्टॉक में पैसा लगाना शुरू कर देते हैं। कई बार सिर्फ नाम समान होने के कारण भी शेयरों में अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
भारतीय शेयर बाजार में इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां किसी बड़ी खबर या ट्रेंड के बाद मिलते-जुलते नाम वाली कंपनियों के शेयरों में अचानक तेजी आ गई। हालांकि बाद में निवेशकों को नुकसान भी उठाना पड़ा।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी सही नहीं होती। किसी भी निवेश से पहले कंपनी का वास्तविक बिजनेस, उसका स्टॉक एक्सचेंज रिकॉर्ड, फाइनेंशियल स्थिति और आधिकारिक जानकारी जांचना बेहद जरूरी है। सिर्फ वायरल पोस्ट, मीम्स या ट्रेंड के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे निवेशकों को खास तौर पर सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि सोशल मीडिया के दौर में गलत या अधूरी जानकारी बहुत तेजी से फैलती है। कई बार लोग कंपनी का पूरा नाम, उसका सेक्टर या असली कारोबार देखे बिना सिर्फ चर्चाओं के आधार पर शेयर खरीद लेते हैं। इससे शेयर की कीमतों में अस्थायी उछाल तो आ सकता है, लेकिन बाद में भारी गिरावट का खतरा भी बना रहता है।
यह घटना यह भी दिखाती है कि इंटरनेट पर “मोदी इफेक्ट”, “वायरल स्टॉक” या “अचानक पैसा दोगुना” जैसे दावे कितनी तेजी से लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि वास्तविकता में शेयर बाजार कई आर्थिक, कारोबारी और निवेशक भावनाओं के आधार पर काम करता है, न कि सिर्फ किसी वायरल वीडियो या ट्रेंड पर।
फिलहाल सोशल मीडिया पर Melody टॉफ़ी और PM मोदी का वीडियो अब भी चर्चा में बना हुआ है, लेकिन फैक्ट-चेक के बाद यह साफ हो चुका है कि Melody बनाने वाली असली Parle कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड ही नहीं है। इसलिए “Melody वाली Parle कंपनी के शेयर उड़ गए” वाला दावा भ्रामक और अधूरी जानकारी पर आधारित था।
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