राजस्थान में सरस डेयरी ने दूध की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही दही, लस्सी, छाछ और पनीर समेत कई डेयरी उत्पाद भी महंगे हो गए हैं, जिससे आम लोगों के मासिक बजट पर असर पड़ने की संभावना है।
राजस्थान में बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। राज्य की प्रमुख सहकारी डेयरी ब्रांड सरस डेयरी ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब सरस डेयरी का दूध प्रति लीटर ₹2 महंगा मिलेगा। नई दरें आज से लागू मानी जा रही हैं। केवल दूध ही नहीं, बल्कि दही, लस्सी, छाछ और पनीर जैसे दूसरे डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी बदलाव किया गया है।
इस फैसले के बाद अब हर घर की रसोई का बजट प्रभावित होना तय माना जा रहा है। राजस्थान के लाखों परिवार रोजाना दूध और डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। सुबह की चाय से लेकर बच्चों के नाश्ते और घर के खाने तक दूध का उपयोग हर दिन होता है। ऐसे में कीमत बढ़ने का असर सीधे आम आदमी की जेब पर दिखाई देगा।
जानकारी के अनुसार डेयरी सेक्टर में लगातार बढ़ती लागत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। पिछले कुछ महीनों में पशु चारा, दाना, ट्रांसपोर्ट और ईंधन की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है। डेयरी कंपनियों का कहना है कि उत्पादन और सप्लाई की लागत बढ़ने के कारण कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया था। इसी वजह से अब इसका भार उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बढ़ने से सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर पड़ता है। जिन परिवारों में रोजाना 1 से 2 लीटर दूध की खपत होती है, उन्हें हर महीने अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। छोटे परिवारों के लिए यह खर्च सीमित लग सकता है, लेकिन बड़े परिवारों और कम आय वाले लोगों के लिए यह बोझ काफी बढ़ सकता है।
शहरों में रहने वाले छात्र, हॉस्टल में रहने वाले युवा, छोटे होटल, ढाबे और चाय की दुकानों पर भी इसका असर साफ दिखाई दे सकता है। दूध और डेयरी उत्पाद महंगे होने के बाद छोटे कारोबारी या तो कीमतें बढ़ाएंगे या फिर अपने मुनाफे में कटौती करेंगे। कई जगहों पर खाने-पीने की चीजों की क्वालिटी और मात्रा पर भी असर देखने को मिल सकता है।
राजस्थान में सरस डेयरी लंबे समय से लोगों के बीच भरोसेमंद ब्रांड मानी जाती है। राज्य के कई जिलों में इसका बड़ा नेटवर्क है और लाखों उपभोक्ता रोजाना इसके उत्पाद खरीदते हैं। सरस डेयरी सहकारी मॉडल पर काम करती है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों और किसानों से दूध खरीदा जाता है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का एक पहलू यह भी माना जा रहा है कि इससे किसानों और दुग्ध उत्पादकों को कुछ आर्थिक राहत मिल सकती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी सेक्टर की अहम भूमिका होती है। राजस्थान के कई गांवों में पशुपालन लोगों की आय का मुख्य स्रोत है। दूध के दाम बढ़ने पर उम्मीद की जाती है कि इसका फायदा किसानों तक पहुंचेगा। हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
पिछले कुछ समय से खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सब्जियां, दाल, तेल और गैस सिलेंडर के बाद अब दूध की कीमतों में इजाफा लोगों के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा कर सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवारों में दूध की खपत अधिक होती है, इसलिए उनके मासिक खर्च पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर डेयरी उत्पाद लगातार महंगे होते रहे तो इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है। दूध और उससे जुड़े उत्पाद देश के खाद्य बाजार का बड़ा हिस्सा हैं। ऐसे में कीमतों में वृद्धि का असर केवल घरेलू बजट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बाजार की दूसरी चीजों पर भी दिखाई देता है।
फिलहाल राज्य सरकार या डेयरी प्रबंधन की तरफ से किसी राहत योजना या सब्सिडी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। लेकिन उपभोक्ताओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि लगातार बढ़ती महंगाई के दौर में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए।
दूसरी तरफ डेयरी सेक्टर से जुड़े लोग मानते हैं कि अगर उत्पादन लागत बढ़ती रहेगी तो कीमतों में संशोधन करना मजबूरी बन जाता है। पशुपालकों को बेहतर भुगतान देने और सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए डेयरी कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं।
अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दूसरी डेयरी कंपनियां भी अपने उत्पादों की कीमतों में बदलाव करती हैं या नहीं। फिलहाल सरस डेयरी के इस फैसले ने राजस्थान में महंगाई और घरेलू बजट को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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