अमेरिका और कनाडा के बीच फैले ग्रेट लेक्स क्षेत्र से एक ऐसी खोज सामने आई है जिसने वैज्ञानिकों को हैरानी में डाल दिया है। झीलों की गहराई में पाई गई काली चिपचिपी परत, जिसे “ब्लैक गू” कहा जा रहा है, उसमें ऐसे सूक्ष्म जीवों के संकेत मिले हैं जिन्हें पहले कभी दर्ज नहीं किया गया था।
उत्तरी अमेरिका के ग्रेट लेक्स क्षेत्र से एक बेहद रहस्यमयी और हैरान करने वाली खोज सामने आई है। वैज्ञानिकों ने झीलों की गहराई में पाई जाने वाली काली, चिपचिपी परत जिसे स्थानीय लोग “ब्लैक गू” कह रहे हैं, उसमें ऐसे सूक्ष्म जीवों (microorganisms) के संकेत खोजे हैं जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था। इस खोज ने वैज्ञानिक समुदाय को चौंका दिया है और अब इसे पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शोधकर्ताओं की एक टीम ग्रेट लेक्स की तलहटी में जमा गहरे काले जैविक पदार्थ का अध्ययन कर रही थी। शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा कि यह सामान्य जैविक कचरा, शैवाल या प्रदूषण से बना पदार्थ होगा। लेकिन जब इस “ब्लैक गू” के सैंपल को अत्याधुनिक माइक्रोस्कोप और डीएनए विश्लेषण तकनीकों से जांचा गया, तो परिणाम बेहद चौंकाने वाले निकले।
वैज्ञानिकों ने इसमें ऐसे सूक्ष्म जीवों की मौजूदगी के संकेत पाए जिनकी संरचना और व्यवहार अब तक ज्ञात माइक्रोबियल प्रजातियों से काफी अलग बताए जा रहे हैं। कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि ये जीव अत्यधिक कम ऑक्सीजन और जहरीले वातावरण में भी जीवित रहने में सक्षम हैं। यही वजह है कि इन्हें “एक्स्ट्रीम माइक्रोऑर्गेनिज्म” की श्रेणी में रखा जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह “ब्लैक गू” झील की तलहटी में हजारों सालों से जमा जैविक पदार्थ, खनिज और सूक्ष्म रासायनिक प्रतिक्रियाओं का मिश्रण हो सकता है। लेकिन इसमें मिले जीवों की अनोखी जैविक संरचना ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ये सूक्ष्म जीव पृथ्वी पर जीवन के शुरुआती रूपों के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं। वहीं अंतरिक्ष वैज्ञानिक भी इस खोज में खास दिलचस्पी दिखा रहे हैं, क्योंकि ऐसे जीव उन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं जैसी मंगल ग्रह या बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा पर मानी जाती हैं।
शोध टीम ने बताया कि इन जीवों का मेटाबॉलिज्म सामान्य जीवों से अलग दिखाई देता है। वे ऊर्जा हासिल करने के लिए ऐसी रासायनिक प्रक्रियाओं का उपयोग कर सकते हैं जो पहले बहुत कम देखी गई हैं। वैज्ञानिक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये जीव कितने पुराने हैं और क्या ये किसी पूरी तरह नई जैविक शाखा का हिस्सा हो सकते हैं।
इस खोज के बाद ग्रेट लेक्स क्षेत्र में अतिरिक्त रिसर्च मिशन शुरू किए गए हैं। कई विश्वविद्यालयों और समुद्री अनुसंधान संस्थानों की टीमें अब झीलों की गहराई से और सैंपल इकट्ठा कर रही हैं। वैज्ञानिक यह भी जांच रहे हैं कि क्या “ब्लैक गू” में मौजूद ये सूक्ष्म जीव पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं या उनका कोई संभावित खतरा भी हो सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों ने फिलहाल लोगों से घबराने की जरूरत नहीं बताई है। उनका कहना है कि यह अभी शुरुआती रिसर्च है और इन जीवों के बारे में पूरी जानकारी आने में समय लगेगा।
फिर भी, ग्रेट लेक्स की यह रहस्यमयी “ब्लैक गू” अब दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ा रिसर्च विषय बन चुकी है। यह खोज न सिर्फ पृथ्वी के रहस्यमयी सूक्ष्म जीवन को समझने में मदद कर सकती है, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष में जीवन की तलाश के लिए भी अहम साबित हो सकती है।
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