ब्रिटेन के मैथ्यू हॉग एक दुर्लभ बीमारी “Auto-Brewery Syndrome” से पीड़ित थे, जिसमें उनका शरीर खुद अल्कोहल बनाने लगता था। ब्रेड, चावल या मीठी चीजें खाने के बाद उन्हें बिना शराब पिए ही नशा और हैंगओवर जैसे लक्षण होने लगते थे। करीब 20 साल तक डॉक्टर उनकी बीमारी पहचान नहीं पाए और लोग उन्हें शराबी समझते रहे। बाद में सख्त डाइट और इलाज की मदद से उन्होंने अपनी हालत को काफी हद तक कंट्रोल किया।
दुनिया में कई अजीब और दुर्लभ बीमारियां होती हैं, लेकिन ब्रिटेन के मैथ्यू हॉग की कहानी उन सबसे अलग मानी जाती है। मैथ्यू हॉग एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिनका शरीर बिना शराब पिए ही खुद अल्कोहल बनाने लगता था। हालत इतनी अजीब थी कि लोग उन्हें शराबी समझते थे, जबकि उन्होंने शराब की एक बूंद तक नहीं पी होती थी। उनकी जिंदगी कई साल तक दर्द, गलतफहमी, मानसिक तनाव और संघर्ष से भरी रही।
मैथ्यू हॉग ब्रिटेन के मिडल्सब्रा शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही उन्हें पेट से जुड़ी कई परेशानियां रहती थीं। उन्हें अक्सर पेट दर्द, गैस, कमजोरी और थकान महसूस होती थी। परिवार को लगा कि यह सामान्य पाचन समस्या होगी, इसलिए शुरुआत में ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया।
लेकिन जैसे-जैसे मैथ्यू बड़े हुए, उनकी हालत और अजीब होती चली गई। कई बार वह अचानक सुस्त पड़ जाते, ठीक से चल नहीं पाते और उनकी बातें लड़खड़ाने लगती थीं। परिवार और आसपास के लोगों को लगता था कि शायद उन्होंने चोरी-छिपे शराब पी ली है।
किशोरावस्था तक पहुंचते-पहुंचते मैथ्यू के साथ सबसे हैरान करने वाली चीज होने लगी। वह सामान्य खाना खाते थे, लेकिन कुछ देर बाद उनके शरीर में नशे जैसे लक्षण दिखने लगते थे। अगर वह ब्रेड, चावल, पास्ता, आलू, मिठाई या कोई भी कार्बोहाइड्रेट वाली चीज खाते, तो कुछ समय बाद उन्हें चक्कर आने लगते।
उनका सिर भारी हो जाता, बोलने में दिक्कत होती और कई बार वह ऐसे व्यवहार करते जैसे उन्होंने बहुत ज्यादा शराब पी रखी हो। सुबह उठने पर भी उन्हें तेज हैंगओवर महसूस होता था। उल्टी, सिरदर्द, डिहाइड्रेशन और कमजोरी उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए थे।
मैथ्यू की हालत देखकर कई लोग उन्हें शराबी समझने लगे। स्कूल, कॉलेज और सामाजिक जीवन में उन्हें काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। कई बार लोग उनका मजाक उड़ाते थे। कुछ रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों को लगता था कि वह अपनी शराब की आदत छिपा रहे हैं।
सबसे मुश्किल समय तब आया जब डॉक्टर भी शुरुआत में बीमारी समझ नहीं पाए। कई डॉक्टरों ने माना कि मैथ्यू शायद मानसिक तनाव या शराब की लत से जूझ रहे हैं। इससे उनकी परेशानी और बढ़ती चली गई।
मैथ्यू लगभग 20 साल तक अपनी बीमारी का सही कारण नहीं जान पाए। इस दौरान उन्होंने कई अस्पतालों और विशेषज्ञों के चक्कर लगाए। तरह-तरह की जांच हुईं, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। परिवार ने इलाज में हजारों पाउंड खर्च कर दिए। कई बार मैथ्यू खुद भी सोचने लगे थे कि शायद उनके साथ कुछ मानसिक समस्या है।
लगातार खराब स्वास्थ्य और लोगों के शक की वजह से वह डिप्रेशन में चले गए। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक समय ऐसा आ गया था जब उन्होंने जिंदगी खत्म करने तक के बारे में सोचना शुरू कर दिया था, क्योंकि कोई उनकी बात पर विश्वास नहीं करता था।
आखिरकार सामने आई असली बीमारी लंबे समय बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मैथ्यू की जांच गहराई से की। तब पता चला कि उन्हें “Auto-Brewery Syndrome” नाम की बेहद दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी में इंसान की आंतों में मौजूद यीस्ट और फंगस जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते हैं। जब मरीज कार्बोहाइड्रेट या शुगर खाता है, तो यही यीस्ट उस भोजन को फर्मेंट करके एथेनॉल यानी अल्कोहल में बदल देते हैं। यानि मैथ्यू का शरीर खुद शराब बना रहा था।
कैसे काम करती है यह बीमारी? सामान्य इंसान के शरीर में भी कुछ मात्रा में यीस्ट मौजूद होते हैं, लेकिन Auto-Brewery Syndrome में इनकी संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। जब मरीज मीठी चीजें या स्टार्च वाला खाना खाता है, तो शरीर के अंदर वही प्रक्रिया शुरू हो जाती है जो शराब बनाने वाली फैक्ट्री में होती है।
भोजन फर्मेंट होकर अल्कोहल में बदल जाता है और यह अल्कोहल खून में पहुंचने लगता है। इसी वजह से मरीज बिना शराब पिए भी नशे में दिखाई देता है।
बीमारी के कारण बिगड़ गई जिंदगी इस बीमारी ने मैथ्यू की पूरी जिंदगी प्रभावित कर दी। वह सामान्य नौकरी नहीं कर पाते थे क्योंकि कभी भी उनकी हालत बिगड़ सकती थी। कई बार उन्हें सड़क पर चलते समय चक्कर आ जाते थे। ड्राइविंग करना भी उनके लिए खतरनाक हो गया था। अगर पुलिस जांच करती, तो उनके शरीर में अल्कोहल मिल सकता था, जबकि उन्होंने शराब नहीं पी होती थी। उनके रिश्ते, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ा।
बीमारी का पता चलने के बाद डॉक्टरों ने मैथ्यू की पूरी डाइट बदल दी। उन्हें शुगर, ब्रेड, चावल, पास्ता, आलू और ज्यादातर कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें बंद करनी पड़ीं। उन्होंने हाई-प्रोटीन और लो-कार्ब डाइट शुरू की। साथ ही यीस्ट कंट्रोल करने के लिए दवाइयां दी गईं।
धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार आने लगा। हालांकि यह बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं हुई, लेकिन सही खानपान और इलाज की मदद से मैथ्यू ने इसे काफी हद तक कंट्रोल करना सीख लिया।
दुनिया में बेहद दुर्लभ है यह बीमारी Auto-Brewery Syndrome दुनिया की सबसे दुर्लभ मेडिकल कंडीशनों में गिनी जाती है। बहुत कम लोगों में यह बीमारी पाई गई है। यही वजह है कि डॉक्टरों को भी इसे पहचानने में काफी समय लग जाता है। मैथ्यू हॉग की कहानी दुनियाभर में इसलिए वायरल हुई क्योंकि इसने लोगों को यह समझाया कि हर बीमारी बाहर से दिखाई नहीं देती। कई बार इंसान जिस चीज से गुजर रहा होता है, उसे समझना बेहद मुश्किल होता है।
आज भी चर्चा में है मैथ्यू की कहानी मैथ्यू हॉग की कहानी मेडिकल दुनिया के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बन चुकी है। उनकी जिंदगी ने यह दिखाया कि दुर्लभ बीमारियां सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक जीवन को भी गहराई से प्रभावित करती हैं। आज उनकी कहानी दुनिया भर में मेडिकल स्टूडेंट्स, डॉक्टरों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
AutoBrewerySyndrome RareDisease MatthewHogg MedicalMystery HealthNews ViralStory WeirdButTrue UKNews NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
Published by: Gulam Rasool. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.