सूडान के दक्षिणी हिस्सों में पिछले दो हफ्तों की हिंसा में कम से कम 61 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 9 बच्चे शामिल हैं। यह संघर्ष विद्रोही गुट SPLM-N और स्थानीय ओटोरो जनजाति के बीच चल रहा है। UN रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के शुरुआती चार महीनों में सूडान में 80% से ज्यादा नागरिक मौतें ड्रोन हमलों से हुई हैं। लगातार संघर्ष, विस्थापन, भूख और खराब स्वास्थ्य सेवाओं ने वहां का मानवीय संकट और गहरा कर दिया है।
सूडान के दक्षिणी हिस्सों में पिछले दो हफ्तों से जारी हिंसक झड़पों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इन संघर्षों में अब तक कम से कम 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 9 बच्चे भी शामिल हैं। लगातार बढ़ती हिंसा के बीच आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
विद्रोही गुट और जनजातीय संघर्ष से बढ़ा तनाव रिपोर्ट के अनुसार, यह संघर्ष विद्रोही संगठन Sudan People’s Liberation Movement–North (SPLM-N) से जुड़े लड़ाकों और स्थानीय ओटोरो जनजाति के बीच शुरू हुआ। इलाके में पहले से ही अस्थिरता बनी हुई थी, लेकिन हालिया झड़पों ने हालात को और खराब कर दिया है। सूडान लंबे समय से गृहयुद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और मानवीय त्रासदी का सामना कर रहा है। देश के कई हिस्सों में लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं, जबकि भोजन, दवाइयों और जरूरी सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है।
UN की रिपोर्ट में ड्रोन हमलों को लेकर चिंता संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने चेतावनी दी है कि 2026 के पहले चार महीनों में सूडान में नागरिकों की 80 प्रतिशत से ज्यादा मौतें ड्रोन हमलों की वजह से हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है और ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ड्रोन हमले अक्सर घनी आबादी वाले इलाकों में भी किए जाते हैं, जहां आम नागरिक और लड़ाकों के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल होता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में निर्दोष लोग हिंसा का शिकार बन रहे हैं।
आम लोगों की जिंदगी पर गहरा असर सूडान के नागरिकों के लिए यह संघर्ष सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। हजारों परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। कई इलाकों में स्कूल बंद पड़े हैं और स्वास्थ्य सेवाएं लगभग पूरी तरह चरमरा चुकी हैं। भोजन और साफ पानी की कमी के कारण मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। राहत एजेंसियों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।
ड्रोन युद्ध बना नई चुनौती मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ड्रोन युद्ध आधुनिक संघर्षों में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है। ड्रोन हमलों में जिम्मेदारी तय करना और स्वतंत्र जांच करना बेहद कठिन हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो सूडान में मानवीय स्थिति और भयावह हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से हिंसा रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
लगातार गहराता जा रहा संकट सूडान में चल रहा संघर्ष अब केवल राजनीतिक या सैन्य लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े मानवीय संकट में बदल चुका है। लाखों लोग भय, भूख और असुरक्षा के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय दबाव और शांति प्रयासों की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
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