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मेघालय के उमरोई में 20 से 31 मई तक चलने वाला बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘PRAGATI 2026’ शुरू हो गया है। इसमें भारत समेत 12 देशों की सेनाएँ हिस्सा ले रही हैं। अभ्यास का उद्देश्य जंगल युद्ध, hostage rescue, disaster relief और संयुक्त सुरक्षा ऑपरेशन में सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। रक्षा विशेषज्ञ इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं।
मेघालय के उमरोई स्थित जॉइंट ट्रेनिंग नोड में आज से बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘PRAGATI 2026’की शुरुआत हो गई है। यह संयुक्त सैन्य अभ्यास 20 मई से 31 मई तक चलेगा और इसमें भारत सहित हिंद महासागर क्षेत्र के 12 देशों की सेनाएँ हिस्सा ले रही हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य क्षेत्रीय सैन्य सहयोग बढ़ाना, संयुक्त ऑपरेशन की क्षमता मजबूत करना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेनाओं के बीच तालमेल विकसित करना है।
PRAGATI का पूरा नाम है Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region। यह नाम ही इस अभ्यास के मकसद को दर्शाता है — यानी हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सुरक्षा साझेदारी और सामरिक सहयोग को नई मजबूती देना। इस बार अभ्यास में भारत के अलावा भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम के सैन्य दल शामिल हुए हैं।
विदेशी सैनिकों के दस्ते 18 मई से ही मेघालय पहुंचने लगे थे। उन्हें भारतीय सेना की ओर से विशेष ओरिएंटेशन और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी दी गई। उमरोई को इस अभ्यास के लिए खास तौर पर चुना गया क्योंकि यहाँ का घना जंगल, पहाड़ी इलाका और बदलता मौसम वास्तविक जंगल युद्ध जैसी परिस्थितियाँ पैदा करता है। सेना के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह का भूभाग सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में काम करने की बेहतर ट्रेनिंग देता है।
Continue Reading23 मई 2026
अभ्यास के दौरान सैनिक कई तरह के संयुक्त सैन्य ऑपरेशन की रिहर्सल करेंगे। इनमें hostage rescue यानी बंधक बचाव अभियान, humanitarian assistance यानी मानवीय सहायता मिशन, disaster relief ऑपरेशन, संयुक्त पेट्रोलिंग और counter-insurgency यानी आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी कार्रवाई जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इन सभी अभ्यासों का मकसद अलग-अलग देशों की सेनाओं को एक साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार करना है, ताकि किसी भी क्षेत्रीय संकट की स्थिति में बेहतर समन्वय बनाया जा सके।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक PRAGATI 2026 सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने की कोशिश भी है। पिछले कुछ वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत लगातार ऐसे बहुपक्षीय सैन्य मंचों को बढ़ावा दे रहा है। इससे भारत खुद को एक भरोसेमंद और जिम्मेदार सुरक्षा साझेदार के रूप में पेश कर पा रहा है।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इस तरह के संयुक्त अभ्यास सेनाओं के बीच “इंटर-ऑपरेबिलिटी” बढ़ाते हैं। यानी अलग-अलग देशों की सेनाएँ एक-दूसरे के उपकरण, रणनीति और ऑपरेशन सिस्टम को बेहतर तरीके से समझ पाती हैं। भविष्य में किसी प्राकृतिक आपदा, समुद्री संकट या सुरक्षा चुनौती की स्थिति में यह तालमेल काफी अहम साबित हो सकता है।
Continue Reading23 मई 2026
मेघालय और पूरे उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लिए भी यह आयोजन खास महत्व रखता है। लंबे समय तक उत्तर-पूर्व को केवल सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्र के रूप में देखा जाता रहा, लेकिन अब ऐसे अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास इस इलाके को सामरिक और आर्थिक दृष्टि से नई पहचान दे रहे हैं। विदेशी सैन्य अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी से स्थानीय पर्यटन, होटल व्यवसाय, परिवहन और अन्य सेवाओं को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अभ्यास के दौरान व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। उमरोई और आसपास के क्षेत्रों में सेना की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं, जबकि स्थानीय लोगों में भी इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
Continue Reading22 मई 2026
आम भारतीय नागरिकों के लिए भले यह सैन्य अभ्यास सीधे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा न दिखाई दे, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता का असर व्यापार, समुद्री मार्गों और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है और इसकी सुरक्षा भारत समेत कई देशों के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
PRAGATI 2026 यह संदेश भी देता है कि बदलते वैश्विक माहौल में केवल हथियारों की ताकत नहीं, बल्कि साझेदारी, सहयोग और सामूहिक तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। भारत इस अभ्यास के जरिए न सिर्फ अपनी सैन्य क्षमता दिखा रहा है, बल्कि यह भी साबित करने की कोशिश कर रहा है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
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22 मई 2026