अमेरिका में कंक्रीट मिक्सर में फँसे एक ग्रेट हॉर्न्ड उल्लू को रेस्क्यू टीम ने बचाकर उसकी जटिल सर्जरी की। कई हफ्तों की देखभाल और रिहैबिलिटेशन के बाद आखिरकार उसे दोबारा जंगल में छोड़ दिया गया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
अमेरिका के यूटा राज्य से एक ऐसी दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है, जिसने दुनियाभर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां एक ग्रेट हॉर्न्ड आउल यानी बड़ी प्रजाति के उल्लू को कंक्रीट मिक्सर में बुरी तरह फँसा हुआ पाया गया। उसके पूरे शरीर और पंखों पर गीला कंक्रीट जम चुका था, जिससे वह न उड़ पा रहा था और न ही खुद को बचा पा रहा था। हालत इतनी गंभीर थी कि शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद इस पक्षी को बचाना संभव नहीं होगा। लेकिन रेस्क्यू टीम और डॉक्टरों की मेहनत ने असंभव को संभव कर दिखाया।
जानकारी के मुताबिक यह घटना एक निर्माण स्थल के पास हुई, जहां काम कर रहे मजदूरों ने अचानक कंक्रीट मिक्सर के भीतर किसी जीव की हलचल देखी। करीब जाकर देखने पर पता चला कि एक बड़ा उल्लू उसमें फँसा हुआ है। कंक्रीट उसके पंखों और शरीर पर तेजी से जम रहा था। मजदूरों ने तुरंत स्थानीय वन्यजीव बचाव टीम को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर विशेषज्ञों की टीम पहुंची।
रेस्क्यू टीम के लिए यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण था। यदि कंक्रीट पूरी तरह सूख जाता, तो उल्लू के पंख स्थायी रूप से खराब हो सकते थे। टीम ने बेहद सावधानी के साथ उसे बाहर निकाला और तुरंत स्थानीय वाइल्डलाइफ़ रिहैबिलिटेशन सेंटर पहुंचाया। वहां डॉक्टरों और पशु विशेषज्ञों ने कई घंटों तक उसकी हालत का निरीक्षण किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, उल्लू के पंखों पर जमे कंक्रीट को हटाना आसान नहीं था। कंक्रीट हटाने की प्रक्रिया के दौरान यह ध्यान रखना जरूरी था कि उसके पंख और त्वचा को अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे। डॉक्टरों ने विशेष उपकरणों और सुरक्षित रसायनों की मदद से धीरे-धीरे कंक्रीट को साफ किया। कई जगह उसके पंख बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे, जिन्हें बदलने के लिए विशेष “फेदर रिपेयर सर्जरी” की गई।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सर्जरी बेहद कम मामलों में की जाती है और इसमें काफी अनुभव की जरूरत होती है। घायल पक्षियों के टूटे या खराब हो चुके पंखों को इस तरह बदला जाता है कि वे फिर से सामान्य तरीके से उड़ सकें। डॉक्टरों ने बताया कि शुरुआती दिनों में उल्लू काफी कमजोर था और तनाव में भी था, लेकिन धीरे-धीरे उसने रिकवरी शुरू कर दी।
सर्जरी के बाद कई हफ्तों तक उसका रिहैबिलिटेशन चला। इस दौरान उसे उड़ान की ट्रेनिंग दी गई, ताकत बढ़ाने वाला भोजन दिया गया और लगातार उसकी निगरानी की गई। विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि जंगल में छोड़ने से पहले वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाए और अपने दम पर शिकार कर सके।
कुछ हफ्तों बाद वह दिन भी आया, जिसका सभी को इंतजार था। पशु चिकित्सकों और रेस्क्यू टीम ने उल्लू को खुले जंगल में छोड़ दिया। जैसे ही उसे आजाद किया गया, उसने अपने बड़े पंख फैलाए और आसमान में लंबी उड़ान भर दी। वहां मौजूद लोगों ने इस भावुक पल को कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। अब यही वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
लाखों लोग इस रेस्क्यू मिशन की तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे इंसानियत और वन्यजीव संरक्षण का शानदार उदाहरण बताया। लोगों का कहना है कि जिस तरह टीम ने धैर्य और मेहनत के साथ इस पक्षी की जान बचाई, वह प्रेरणादायक है।
यह घटना सिर्फ एक उल्लू के बचाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानी गतिविधियों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की भी बड़ी तस्वीर दिखाती है। तेजी से बढ़ते निर्माण कार्य, जंगलों की कटाई और शहरीकरण के कारण कई जंगली जीव इंसानी इलाकों के करीब आने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण स्थलों पर वन्यजीव सुरक्षा को लेकर सख्त प्रोटोकॉल होने चाहिए। मशीनों और खतरनाक क्षेत्रों की नियमित जांच जरूरी है ताकि किसी भी पक्षी या जानवर को नुकसान न पहुंचे। उनका कहना है कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जागरूकता और सावधानी बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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