अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन की सख्त ‘मास डिपोर्टेशन’ नीति से 1 लाख से ज्यादा बच्चों की जिंदगी प्रभावित हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़ी संख्या में प्रवासी माता-पिता को हिरासत में लेने या देश से बाहर भेजने के कारण कई बच्चे अपने परिवार से अलग हो गए हैं।
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति एक बार फिर चर्चा में है। नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे ‘मास डिपोर्टेशन’ अभियान की वजह से अब तक 1 लाख से ज्यादा बच्चों की जिंदगी प्रभावित हो चुकी है। इनमें बड़ी संख्या उन बच्चों की है जिनके माता-पिता को इमिग्रेशन एजेंसियों ने हिरासत में लिया या देश से बाहर भेज दिया।
क्या है पूरा मामला?
ट्रम्प प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज कर दिया है। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ICE लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार जनवरी 2025 से अब तक करीब 4 लाख प्रवासियों को हिरासत में लिया जा चुका है। एक स्टडी में दावा किया गया है कि इस कार्रवाई के कारण लगभग 2 लाख बच्चों के माता-पिता हिरासत में गए हैं। इनमें करीब 1.
45 लाख बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 50 हजार से ज्यादा बच्चे 6 साल से कम उम्र के हैं।
परिवारों के टूटने का खतरा रिपोर्ट में बताया गया कि हजारों बच्चे ऐसे हैं जिनके दोनों माता-पिता हिरासत में चले गए। कई बच्चों को रिश्तेदारों, पड़ोसियों या बड़े भाई-बहनों के सहारे रहना पड़ रहा है। कुछ मामलों में बच्चों को स्कूल और मेडिकल फैसलों तक के लिए कानूनी मदद की जरूरत पड़ रही है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस नीति का सबसे ज्यादा असर बच्चों की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। माता-पिता से अलग होने के कारण कई बच्चे तनाव, डर और असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।
सरकार और आलोचकों के अलग-अलग दावे अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का कहना है कि हिरासत में लिए गए माता-पिता को विकल्प दिया जाता है कि वे अपने बच्चों को साथ ले जाएं या किसी अभिभावक के पास छोड़ दें। लेकिन कई सामाजिक संगठनों और वकीलों का दावा है कि असल हालात इतने आसान नहीं हैं। कई परिवारों को अचानक अलग होना पड़ा और बच्चों की देखभाल की व्यवस्था ठीक से नहीं हो सकी।
डिटेंशन सेंटरों पर भी उठे सवाल कैलिफोर्निया समेत कई राज्यों की रिपोर्ट्स में डिटेंशन सेंटरों की खराब हालत को लेकर चिंता जताई गई है। भीड़ बढ़ने से मेडिकल सुविधा, साफ पानी और रहने की व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। कुछ रिपोर्ट्स में हिरासत केंद्रों में मौतों और खराब स्वास्थ्य सेवाओं का भी जिक्र किया गया है।
पहले भी विवादों में रही थी ट्रम्प की नीति ट्रम्प प्रशासन अपने पहले कार्यकाल में भी ‘फैमिली सेपरेशन पॉलिसी’ को लेकर विवादों में रहा था। 2018 में अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर हजारों बच्चों को उनके माता-पिता से अलग किया गया था, जिस पर दुनियाभर में आलोचना हुई थी। अब नई रिपोर्ट्स के बाद फिर से वही बहस तेज हो गई है कि सख्त इमिग्रेशन नीति की सबसे बड़ी कीमत मासूम बच्चों को चुकानी पड़ रही है।
आगे क्या? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डिपोर्टेशन अभियान इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले समय में प्रभावित बच्चों की संख्या और बढ़ सकती है। कई सामाजिक संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं कि बच्चों की सुरक्षा और परिवारों को साथ रखने के लिए नई नीतियां बनाई जाएं।
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