दक्षिण लेबनान में इज़राइल के ताज़ा हवाई हमलों में कम से कम 19 से 24 लोगों की मौत की खबर है। मरने वालों में बच्चे, महिलाएँ और पैरामेडिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि इलाके में लगातार बढ़ती हिंसा ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है।
दक्षिण लेबनान एक बार फिर भारी तबाही और खौफ के माहौल में घिर गया है। पिछले कुछ दिनों में इज़राइल द्वारा किए गए लगातार हवाई हमलों में कम से कम 19 से लेकर 24 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। लेबनान के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में बच्चे, महिलाएँ और राहत कार्यों में जुटे पैरामेडिक भी शामिल हैं। कई इलाकों में हुए इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है और स्थानीय लोगों के सामने सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
यह हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय पक्ष संघर्षविराम की कोशिशों में जुटे हुए हैं। हालांकि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जमीन पर हालात लगातार बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। दक्षिण लेबनान के कई कस्बों और गांवों में लोग लगातार बमबारी के डर में जी रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, सबसे गंभीर हमला अल-साकी कस्बे में हुआ, जहाँ एक रिहायशी घर को निशाना बनाया गया। इस हमले में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थानीय अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है, लेकिन चिकित्सा संसाधनों की कमी हालात को और मुश्किल बना रही है।
इसके अलावा नहरिन, सादीयात, हबूश और मेफदून जैसे इलाकों में भी अलग-अलग हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि एक ही दिन में दर्जनों नागरिक प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में कई बच्चे और महिला स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं, जो राहत और बचाव कार्यों में लगे हुए थे।
हमलों के बाद कई इलाकों में इमारतें पूरी तरह मलबे में बदल गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बमबारी इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई परिवार रातोंरात अपने घर छोड़कर सुरक्षित इलाकों की ओर भागने को मजबूर हो गए। सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में सामने आए वीडियो में टूटी इमारतें, जलती गाड़ियाँ और घायलों को अस्पताल ले जाते लोग दिखाई दिए।
इज़राइली सेना ने इन हमलों को लेकर कहा है कि उनका निशाना हिज़्बुल्लाह के सैन्य ठिकाने, लॉन्चर और हथियारों से जुड़े नेटवर्क थे। सेना का दावा है कि हिज़्बुल्लाह दक्षिण लेबनान के रिहायशी इलाकों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए कर रहा है। दूसरी ओर लेबनान सरकार और स्थानीय प्रशासन का आरोप है कि हमलों का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है और कई हमले सीधे रिहायशी क्षेत्रों में हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संघर्ष 2026 में शुरू हुए बड़े सैन्य टकराव का हिस्सा है, जिसने पूरे लेबनान को अस्थिर कर दिया है। मार्च 2026 से इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच बढ़ती लड़ाई ने हजारों लोगों को विस्थापित कर दिया है। सीमा के पास बसे गांवों से लगातार पलायन जारी है और लोग स्कूलों, सामुदायिक भवनों और अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
हालांकि 2024 में संघर्षविराम को लेकर एक समझौता हुआ था, लेकिन उसके बाद भी सीमा पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। रिपोर्टों के अनुसार इज़राइल ने पिछले महीनों में लगभग रोजाना दक्षिण लेबनान में हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में अब तक 300 से अधिक लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है। 2026 की शुरुआत के बाद से हिंसा की रफ्तार और तेज हो गई है।
सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ रहा है। दक्षिण लेबनान के ग्रामीण इलाकों में लोग लगातार डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। कई स्कूल बंद हो चुके हैं और अस्पतालों पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों और एम्बुलेंस सेवाओं तक को सुरक्षित नहीं माना जा रहा, जिससे राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कृषि और स्थानीय व्यापार भी लगभग ठप पड़ चुके हैं। दक्षिण लेबनान के कई इलाके खेती पर निर्भर हैं, लेकिन लगातार बमबारी और असुरक्षा के कारण किसान खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे। बाजारों में सामान की कमी बढ़ रही है और जरूरी वस्तुओं की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि आर्थिक गतिविधियाँ लगभग रुक चुकी हैं।
मानवीय संगठनों ने भी हालात पर चिंता जताई है। राहत एजेंसियों का कहना है कि यदि जल्द संघर्ष नहीं रुका तो क्षेत्र में बड़ा मानवीय संकट पैदा हो सकता है। हजारों परिवारों को भोजन, दवाइयों और सुरक्षित आश्रय की जरूरत है। बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। कई देशों और संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। हालांकि फिलहाल जमीन पर हालात में किसी बड़े सुधार के संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं।
दक्षिण लेबनान में जारी यह संघर्ष अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रह गया है, बल्कि आम लोगों के जीवन, सुरक्षा और भविष्य पर गहरा असर डालने वाला मानवीय संकट बनता जा रहा है। लगातार होती बमबारी और बढ़ते मौत के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
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