सोशल मीडिया दिग्गज Meta एक बार फिर बड़े लेऑफ की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है, जबकि दूसरी तरफ AI और डेटा सेंटर सेक्टर में भारी निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
दुनियाभर की टेक इंडस्ट्री इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। सोशल मीडिया की दुनिया में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाली Meta अब पूरी ताकत के साथ Artificial Intelligence यानी AI की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी रणनीति के तहत कंपनी एक और बड़े लेऑफ राउंड की तैयारी कर रही है। बिजनेस मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार Meta इस सप्ताह से करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर सकती है। कंपनी के अंदर इस बदलाव को “AI-First Restructuring” कहा जा रहा है।
Meta पहले भी हजारों कर्मचारियों को बाहर कर चुकी है, लेकिन इस बार का फैसला टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। साफ दिख रहा है कि बड़ी टेक कंपनियां अब अपने बिजनेस मॉडल को AI के हिसाब से बदल रही हैं। इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ रहा है जो पारंपरिक सोशल मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग और पुराने टेक ऑपरेशंस से जुड़े विभागों में काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta अब अपने संसाधनों का बड़ा हिस्सा AI रिसर्च, मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और स्मार्ट एल्गोरिद्म डेवलपमेंट पर खर्च करना चाहती है। कंपनी का फोकस ऐसे टूल्स और प्लेटफॉर्म तैयार करने पर है जो भविष्य में AI आधारित इंटरनेट और डिजिटल कम्युनिकेशन की नींव बन सकें। यही वजह है कि Meta तेजी से इंजीनियरिंग, AI मॉडल ट्रेनिंग और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है।
बताया जा रहा है कि जिन विभागों में ऑटोमेशन की संभावना ज्यादा है, वहां सबसे पहले कर्मचारियों की संख्या कम की जा सकती है। इसमें कंटेंट मॉडरेशन, विज्ञापन ऑपरेशंस, कस्टमर सपोर्ट और कुछ मिड-लेवल मैनेजमेंट रोल शामिल हो सकते हैं। कंपनी का मानना है कि AI आधारित सिस्टम अब इन कामों को पहले से ज्यादा तेजी और कम लागत में कर सकते हैं।
Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि आने वाला समय AI का होगा और जो कंपनियां इस बदलाव के साथ तेजी से आगे नहीं बढ़ेंगी, वे पीछे रह जाएंगी। Meta फिलहाल अपने AI मॉडल, स्मार्ट असिस्टेंट, जनरेटिव AI टूल्स और वर्चुअल रियलिटी प्रोजेक्ट्स पर बड़े स्तर पर काम कर रही है। कंपनी OpenAI, Google और Microsoft जैसी टेक कंपनियों से सीधी प्रतिस्पर्धा में खुद को मजबूत करना चाहती है।
हालांकि, इस फैसले ने कर्मचारियों के बीच चिंता भी बढ़ा दी है। कई टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से आने वाले वर्षों में लाखों पारंपरिक नौकरियों पर असर पड़ सकता है। खासकर वे नौकरियां जिनमें दोहराए जाने वाले डिजिटल कार्य शामिल हैं, वहां ऑटोमेशन तेजी से इंसानों की जगह ले सकता है।
दूसरी तरफ कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि AI केवल नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नए अवसर भी पैदा करेगा। AI डेवलपमेंट, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और AI एथिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से नई नौकरियां सामने आ सकती हैं। लेकिन इसके लिए कर्मचारियों को नई स्किल्स सीखनी होंगी और बदलती टेक्नोलॉजी के हिसाब से खुद को तैयार करना होगा। Meta की यह संभावित छंटनी केवल एक कंपनी का फैसला नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पूरी टेक इंडस्ट्री में आने वाले बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में AI टेक्नोलॉजी किस तरह नौकरी, बिजनेस और डिजिटल दुनिया को बदलती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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