Meta ने अपने Ray-Ban स्मार्ट ग्लास के लिए नया जेस्चर-आधारित मैसेजिंग फीचर पेश किया है। अब यूजर बिना फोन छुए हवा में उंगलियां घुमाकर WhatsApp समेत कई ऐप्स पर मैसेज टाइप और भेज सकेंगे।
टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां मोबाइल स्क्रीन पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है। इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Meta ने अपने Ray-Ban स्मार्ट ग्लास के लिए एक नया AI-पावर्ड फीचर पेश किया है। इस अपडेट के बाद यूजर अब हवा में उंगलियां घुमाकर WhatsApp जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर मैसेज टाइप और भेज सकेंगे। कंपनी का दावा है कि यह फीचर हैंड्स-फ्री कम्युनिकेशन को पहले से ज्यादा आसान और स्मार्ट बना देगा।
नई टेक्नोलॉजी जेस्चर कंट्रोल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इनपुट सिस्टम पर काम करती है। आसान शब्दों में समझें तो यूजर को अब फोन हाथ में लेने की जरूरत नहीं होगी। स्मार्ट ग्लास में मौजूद कैमरा, सेंसर और AI एल्गोरिद्म यूजर की उंगलियों की मूवमेंट को पहचानेंगे और उसे टेक्स्ट में बदल देंगे। इसके बाद वही टेक्स्ट WhatsApp या अन्य सपोर्टेड ऐप्स के जरिए सीधे भेजा जा सकेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फीचर के जरिए यूजर को वर्चुअल कीबोर्ड जैसा अनुभव मिलेगा। जब कोई व्यक्ति हवा में उंगलियों से टाइपिंग जैसा इशारा करेगा, तब स्मार्ट ग्लास उस जेस्चर को पढ़कर शब्दों में बदल देगा। कंपनी इस तकनीक को “नेचुरल इंटरफेस” का हिस्सा बता रही है, जहां मशीन इंसान की सामान्य हरकतों को समझकर काम करती है। Meta का कहना है कि यह फीचर खासतौर पर उन परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो सकता है जहां फोन निकालना या स्क्रीन पर टाइप करना आसान नहीं होता। उदाहरण के तौर पर चलते समय, जिम में वर्कआउट करते हुए, किचन में काम करते वक्त या आउटडोर एक्टिविटी के दौरान यूजर बिना फोन छुए तुरंत रिप्लाई भेज सकेंगे। इससे मल्टीटास्किंग और तेज कम्युनिकेशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
Ray-Ban Meta स्मार्ट ग्लास पहले से ही फोटो क्लिक करने, वीडियो रिकॉर्डिंग, लाइव स्ट्रीमिंग, कॉल रिसीव करने और म्यूजिक कंट्रोल जैसे फीचर्स के लिए चर्चा में रहे हैं। अब जेस्चर-आधारित मैसेजिंग जुड़ने के बाद यह डिवाइस एक एडवांस वेयरेबल कंपेनियन के रूप में सामने आ रहा है। कंपनी लगातार अपने स्मार्ट ग्लास को मोबाइल का विकल्प बनाने की दिशा में काम कर रही है। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फीचर आने वाले समय में ऑगमेंटेड रियलिटी यानी AR टेक्नोलॉजी को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। अभी तक AR का इस्तेमाल मुख्य रूप से गेमिंग, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग और एंटरटेनमेंट तक सीमित था, लेकिन अब इसे रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करने की कोशिश हो रही है। अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में स्मार्ट ग्लास स्मार्टफोन की जगह लेने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकते हैं।
हालांकि, जहां एक तरफ टेक-लवर्स इस फीचर को भविष्य की झलक बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेसी को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। कई लोगों का सवाल है कि लगातार कैमरा और सेंसर से लैस डिवाइस आसपास मौजूद लोगों की निजता को कैसे प्रभावित करेंगे। इसके अलावा यूजर्स यह भी जानना चाहते हैं कि जेस्चर डेटा और मैसेज कंटेंट को कंपनी किस तरह स्टोर और प्रोसेस करेगी। डिजिटल प्राइवेसी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे डिवाइस के लिए मजबूत डेटा सुरक्षा नियम बेहद जरूरी होंगे। अगर स्मार्ट ग्लास लगातार यूजर की गतिविधियों को रिकॉर्ड करते रहेंगे, तो साइबर सिक्योरिटी और डेटा लीक का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए कंपनियों को पारदर्शिता बनाए रखते हुए यूजर्स को यह स्पष्ट जानकारी देनी होगी कि उनका डेटा कहां और कैसे इस्तेमाल हो रहा है।
Meta अकेली कंपनी नहीं है जो इस दिशा में काम कर रही है। Apple, Google और कई अन्य टेक कंपनियां भी AI और AR आधारित वेयरेबल डिवाइस पर तेजी से रिसर्च कर रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में स्मार्ट ग्लास टेक्नोलॉजी टेक इंडस्ट्री की सबसे बड़ी रेस बन सकती है। फिलहाल Meta का यह नया फीचर इस बात का संकेत जरूर देता है कि भविष्य में डिजिटल कम्युनिकेशन पूरी तरह बदलने वाला है।
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