सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों में कहा जा रहा है कि NEET-UG 2026 को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है और अब बिना परीक्षा MBBS-BDS में एडमिशन मिलेगा। फैक्ट चेक में यह दावा भ्रामक निकला। परीक्षा पेपर लीक विवाद के कारण रद्द हुई है और दोबारा परीक्षा कराने की प्रक्रिया जारी है।
देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं। WhatsApp, Facebook, Instagram और YouTube पर शेयर किए जा रहे पोस्ट्स में कहा जा रहा है कि सरकार ने NEET परीक्षा को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है और अब MBBS-BDS में एडमिशन केवल 12वीं बोर्ड के अंकों के आधार पर होगा। इन दावों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि फैक्ट चेक में सामने आया है कि यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। अभी तक केंद्र सरकार, NTA, स्वास्थ्य मंत्रालय या सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है कि NEET परीक्षा प्रणाली को स्थायी रूप से बंद किया जा रहा है। दरअसल NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बाद रद्द की गई थी। इसके बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई। कई राज्यों में जांच एजेंसियों ने छापेमारी की और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग भी मिले। इसी के बाद सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलनी शुरू हो गई।
वायरल पोस्ट्स में पुराने न्यूज क्लिप, एडिटेड स्क्रीनशॉट और न्यूज चैनलों के लोगो का इस्तेमाल कर यह दावा किया गया कि अब मेडिकल एडमिशन बिना एंट्रेंस एग्जाम के होगा। कुछ पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि “अब सिर्फ बोर्ड परीक्षा पास करना ही डॉक्टर बनने के लिए काफी होगा।” लेकिन आधिकारिक जानकारी इससे बिल्कुल अलग है। NTA ने साफ कहा है कि परीक्षा केवल अनियमितताओं की वजह से रद्द की गई है और दोबारा परीक्षा कराने की तैयारी की जा रही है। नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जा सकती है। छात्रों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी और पुराना रजिस्ट्रेशन ही मान्य रहेगा।
सरकार ने यह जरूर कहा है कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय अब CBT मोड, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों पर काम कर रहा है ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश में मेडिकल एडमिशन के लिए एक समान राष्ट्रीय परीक्षा जरूरी है। अगर केवल बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर एडमिशन दिए जाएं तो अलग-अलग शिक्षा बोर्डों के मूल्यांकन सिस्टम में अंतर होने से निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
फैक्ट चेक में यह भी पता चला कि कई वायरल वीडियो और पोस्ट अधूरी जानकारी के साथ शेयर किए जा रहे हैं। “NEET रद्द” शब्द का इस्तेमाल सिर्फ 2026 की परीक्षा के संदर्भ में किया गया था, लेकिन उसे पूरे NEET सिस्टम के खत्म होने की तरह पेश किया गया। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे केवल NTA और सरकारी वेबसाइट्स पर जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी अनवेरिफाइड पोस्ट या मैसेज को सच मानने से बचें। फिलहाल NEET परीक्षा प्रणाली जारी है और सरकार सिर्फ परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर काम कर रही है।
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