राजस्थान के पश्चिमी जिलों में मई के बीच ही जून जैसी भीषण गर्मी महसूस की जा रही है। जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर सहित कई इलाकों में दिन के साथ रात का तापमान भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है, जबकि IMD ने severe heatwave को लेकर अलर्ट जारी किया है।
राजस्थान की मरुस्थली बेल्ट इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। मई का महीना अभी आधा ही बीता है, लेकिन मौसम ने जून जैसी तपिश दिखानी शुरू कर दी है। जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और आसपास के कई इलाकों में दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म महसूस हो रही हैं। हालात ऐसे हैं कि देर रात तक गर्म हवाएं चल रही हैं और लोगों को राहत नहीं मिल पा रही। भारत मौसम विभाग यानी IMD ने राजस्थान समेत उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में heatwave से लेकर severe heatwave तक की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार गर्मी सामान्य पैटर्न से अलग दिखाई दे रही है। आमतौर पर मई के आखिर और जून में जिस तरह की तपिश देखने को मिलती है, वह इस बार पहले ही शुरू हो गई है। पश्चिमी राजस्थान के कई शहरों में रात का तापमान भी लगातार ऊंचा बना हुआ है, जिससे लोगों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार बढ़ती गर्मी और लंबे समय तक चलने वाली heatwave घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं। जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम चक्र के कारण ऐसे extreme weather events की संभावना पिछले कुछ दशकों में कई गुना बढ़ी है।
क्लाइमेट सेंटर की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और मध्य भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर-पश्चिम भारत के शुष्क इलाकों में इस बार लंबे समय तक गर्म हवाएं चल सकती हैं। IMD की seasonal outlook रिपोर्ट भी पहले ही संकेत दे चुकी थी कि अप्रैल से जून 2026 के बीच उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में “above normal heatwave days” दर्ज हो सकते हैं। इसका सीधा असर राजस्थान के मरुस्थली इलाकों पर दिखाई दे रहा है।
IMD के विस्तृत बुलेटिन के अनुसार कई जिलों में तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री तक ऊपर रिकॉर्ड किया गया है। विभाग ने इसे “developing heat stress scenario” बताया है। इसका मतलब है कि लगातार बढ़ती गर्मी अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। खासतौर पर बुजुर्ग, छोटे बच्चे, बीमार लोग और outdoor काम करने वाले लोग ज्यादा जोखिम में हैं। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
केंद्र सरकार ने भी राज्यों को heatwave action plans पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था, कूलिंग सेंटर, स्वास्थ्य निगरानी और काम के घंटों में बदलाव जैसे कदम तुरंत लागू किए जाएं। कई शहरों में नगर निगम और स्थानीय प्रशासन पानी के टैंकर और अस्थायी राहत केंद्र तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। हालांकि ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में अभी भी पर्याप्त सुविधाओं की चुनौती बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर भी मौसम से जुड़े कई प्लेटफॉर्म राजस्थान के heat maps लगातार शेयर कर रहे हैं। इनमें पश्चिमी राजस्थान के ऊपर “heat dome” जैसा पैटर्न दिखाई दे रहा है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक heat dome ऐसी स्थिति होती है जब गर्म हवा का दबाव किसी क्षेत्र के ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, जिससे तापमान लगातार ऊंचा रहता है और गर्मी से राहत नहीं मिलती। यही वजह है कि इस बार रात में भी गर्मी कम नहीं हो रही।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि राजस्थान जैसे शुष्क इलाकों में अभी humidity यानी नमी का स्तर तटीय राज्यों जितना ज्यादा नहीं है, इसलिए wet-bulb temperature फिलहाल उतना खतरनाक स्तर नहीं छू रहा। लेकिन अगर आने वाले दिनों में नमी बढ़ती है और heatwave जारी रहती है, तो स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है। wet-bulb temperature वह स्थिति होती है जिसमें तापमान और नमी दोनों मिलकर शरीर पर असर डालते हैं। ऐसी परिस्थितियों में शरीर को ठंडा रखना मुश्किल हो जाता है।
स्वास्थ्य विभाग और पब्लिक हेल्थ एजेंसियों ने लोगों के लिए advisory भी जारी की है। लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचने, हल्के और ढीले कपड़े पहनने, लगातार पानी पीने और ORS का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि dehydration और heat stroke के मामलों में आने वाले दिनों में बढ़ोतरी हो सकती है। अस्पतालों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
इस heatwave का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो खुले में काम करते हैं। जोधपुर और आसपास के इलाकों में दिहाड़ी मजदूर, निर्माण कार्य में लगे कर्मचारी, डिलीवरी बॉयज़, ट्रैफिक पुलिस और रिक्शा चालक लगातार गर्मी का सामना कर रहे हैं। कई मजदूरों का कहना है कि दोपहर में काम करना बेहद मुश्किल हो गया है, लेकिन रोज़गार के लिए मजबूरी में बाहर निकलना पड़ रहा है। गर्म हवाओं के बीच लंबे समय तक काम करने से चक्कर, थकान और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है। एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों के ज्यादा इस्तेमाल के कारण कई इलाकों में बिजली लोड बढ़ गया है। शाम के समय peak demand के दौरान कटौती की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि बिजली विभाग की तरफ से अभी तक किसी बड़े संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
राजस्थान में बढ़ती गर्मी ने एक बार फिर climate change और urban heat stress जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में heatwave सिर्फ मौसमी समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौती भी बन सकती है। फिलहाल लोगों की निगाहें मौसम विभाग की अगली advisory पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले कुछ दिन राजस्थान के लिए और ज्यादा कठिन साबित हो सकते हैं।
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