जोधपुर में कम पेट्रोल देने और मशीनों में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद प्रशासन ने तीन पेट्रोल पंपों पर बड़ी कार्रवाई की है। औचक निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं मिलने पर नोटिस जारी किए गए और अब पूरे शहर में जांच अभियान तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
जोधपुर में पेट्रोल पंपों पर कथित तौर पर कम पेट्रोल देने और उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी करने के मामलों ने अब बड़ा रूप ले लिया है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन और विभागीय टीमों ने शहर के कई पेट्रोल पंपों पर अचानक जांच अभियान चलाया, जिसमें तीन पेट्रोल पंपों पर गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद सख्त कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के बाद शहरभर में पेट्रोल पंप संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है, वहीं आम लोगों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है।
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक विभागीय अधिकारियों ने औचक निरीक्षण के दौरान पेट्रोल पंपों की मशीनों, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और स्टॉक रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान कुछ पंपों पर माप-तौल में गड़बड़ी और ईंधन डिलीवरी में अंतर पाया गया। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर ही संबंधित पंप संचालकों को नोटिस जारी करते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि कुछ मशीनों की तकनीकी जांच भी कराई जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि गड़बड़ी जानबूझकर की गई थी या तकनीकी खराबी के कारण हुई।
पिछले कुछ महीनों में देशभर में पेट्रोल पंपों पर धोखाधड़ी से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। कई मामलों में यह सामने आया कि पेट्रोल मशीनों में गुप्त चिप या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाकर ग्राहकों को कम पेट्रोल दिया जा रहा था। कुछ राज्यों में रिमोट कंट्रोल से मशीनों को ऑपरेट करने तक के मामले सामने आए थे। इन्हीं घटनाओं के बाद कई राज्यों में प्रशासन ने निरीक्षण अभियान तेज किए हैं। जोधपुर में भी लंबे समय से उपभोक्ताओं द्वारा शिकायतें की जा रही थीं कि पेट्रोल भरवाने के बावजूद वाहन की माइलेज कम हो रही है और तय रकम के मुकाबले कम ईंधन मिल रहा है। अब प्रशासन की कार्रवाई के बाद इन शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता दिख रहा है।
पेट्रोल और डीज़ल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच इस तरह की गड़बड़ी आम लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ डालती है। रोज़ाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोग अगर हर बार थोड़ा-थोड़ा कम पेट्रोल पाते हैं, तो लंबे समय में यह बड़ी रकम में बदल जाता है। खासकर टैक्सी ड्राइवर, ऑटो चालक और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों के लिए यह नुकसान और भी ज्यादा होता है क्योंकि उनका पूरा व्यवसाय ईंधन खर्च पर निर्भर करता है। ऐसे में पेट्रोल पंपों पर पारदर्शिता और सही माप-तौल बेहद जरूरी मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर होने वाली छोटी-छोटी गड़बड़ियां आम उपभोक्ता आसानी से पकड़ नहीं पाता। कई बार ग्राहक जल्दी में होते हैं और मीटर की शुरुआती रीडिंग तक नहीं देखते। इसी का फायदा उठाकर कुछ जगहों पर धोखाधड़ी की जाती है। प्रशासन अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच करने की तैयारी में है ताकि यह साफ हो सके कि मामला सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी का है या फिर सुनियोजित तरीके से उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार विभाग अब केवल तीन पंपों तक सीमित नहीं रहने वाला। आने वाले दिनों में पूरे शहर में व्यापक जांच अभियान चलाया जा सकता है। इसमें पेट्रोल पंपों की मशीनों की सील, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम, स्टॉक रजिस्टर और ईंधन सप्लाई रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। जिन पंपों पर नियमों का उल्लंघन साबित होगा, उनके खिलाफ लाइसेंस निलंबन, भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। प्रशासन इस मामले को उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा मानकर देख रहा है।
इधर आम लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई लगातार होनी चाहिए ताकि पेट्रोल पंप संचालकों में डर बना रहे। कई उपभोक्ताओं ने मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और शिकायत हेल्पलाइन को और मजबूत किया जाए। लोगों का यह भी कहना है कि अगर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया आसान होगी तो उपभोक्ता बिना डर अपनी शिकायत प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे।
विशेषज्ञों ने वाहन चालकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। पेट्रोल भरवाते समय हमेशा मीटर को ज़ीरो से शुरू होते देखना चाहिए। इसके अलावा बिल जरूर लेना चाहिए और शक होने पर पांच लीटर टेस्ट जैसी सुविधाओं का उपयोग करना चाहिए। कई बार छोटी सावधानी बड़े नुकसान से बचा सकती है। यदि किसी पेट्रोल पंप पर गड़बड़ी का शक हो तो तुरंत संबंधित विभाग में शिकायत करनी चाहिए।
जोधपुर में हुई यह कार्रवाई फिलहाल उपभोक्ताओं के हित में बड़ा कदम मानी जा रही है। हालांकि लोगों का कहना है कि अगर यह सिर्फ एक दिन की कार्रवाई बनकर रह गई तो इसका असर ज्यादा समय तक नहीं रहेगा। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन नियमित निरीक्षण, सख्त निगरानी और तेज शिकायत निवारण व्यवस्था को स्थायी नीति का हिस्सा बनाए। अगर ऐसा होता है तो आम उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत होगा और ईमानदारी से काम करने वाले पेट्रोल पंप संचालकों को भी फायदा मिलेगा।
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