कोविड–19 के दौरान टीकाकरण से छूटे बच्चों तक पहुंचने के लिए UNICEF, WHO और Gavi के “Big Catch-Up” अभियान के तहत 36 देशों में 1.83 करोड़ से ज्यादा बच्चों को 10 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज़ दी गई हैं, जिससे खसरा और पोलियो जैसी बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिल रही है।
कोविड–19 महामारी ने दुनियाभर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को गहराई से प्रभावित किया। लॉकडाउन, अस्पतालों पर बढ़ते दबाव, मेडिकल संसाधनों की कमी और संक्रमण के डर की वजह से करोड़ों बच्चे नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए। कई देशों में दशकों बाद पहली बार वैक्सीनेशन कवरेज में गिरावट दर्ज की गई, जिससे खसरा, पोलियो और डिफ्थीरिया जैसी बीमारियों के दोबारा फैलने का खतरा बढ़ गया। इसी चुनौती से निपटने के लिए UNICEF, WHO और Gavi के नेतृत्व में “Big Catch-Up” अभियान शुरू किया गया। इस वैश्विक पहल का उद्देश्य उन बच्चों तक दोबारा पहुंचना था जो महामारी के दौरान किसी भी वजह से नियमित टीकाकरण से छूट गए थे।
36 देशों में पहुंचा अभियान रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के तहत अब तक 36 देशों में 18.3 मिलियन यानी 1.83 करोड़ से ज्यादा बच्चों तक 100 मिलियन यानी 10 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज़ पहुंचाई जा चुकी हैं। यह अभियान खास तौर पर उन इलाकों में चलाया गया जहां स्वास्थ्य सेवाएं पहले से कमजोर थीं।
पहली बार वैक्सीन पाने वाले बच्चे स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार करीब 1.2 करोड़ बच्चे ऐसे थे जिन्हें पहले कभी कोई वैक्सीन नहीं लगी थी। इस अभियान के जरिए उन्हें पहली बार पोलियो, खसरा, डिफ्थीरिया और अन्य गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भविष्य में संभावित स्वास्थ्य संकटों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
संघर्षग्रस्त और दूरदराज इलाकों पर फोकस “Big Catch-Up” अभियान केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं रहा। इसका सबसे ज्यादा ध्यान संघर्षग्रस्त क्षेत्रों, आर्थिक संकट झेल रहे देशों और दूरदराज समुदायों पर रहा। कई जगहों पर मेडिकल स्टाफ की कमी, वैक्सीन सप्लाई की दिक्कत और जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियां थीं, लेकिन स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने मिलकर घर–घर पहुंचने की कोशिश की।
क्यों जरूरी है यह अभियान? विशेषज्ञों के मुताबिक महामारी के बाद खसरा और पोलियो जैसी बीमारियों के मामले बढ़ने का खतरा तेजी से सामने आ रहा था। कुछ देशों में खसरे के मामलों में बढ़ोतरी भी देखी गई। ऐसे समय में यह अभियान सिर्फ टीकाकरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा की बड़ी रणनीति बन गया।
बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी राहत स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि टीकाकरण का असर केवल बीमारी रोकने तक सीमित नहीं रहता। स्वस्थ बच्चे बेहतर शिक्षा हासिल कर पाते हैं, परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम होता है और समाज की उत्पादकता भी बढ़ती है। यानी वैक्सीन का फायदा लंबे समय तक दिखाई देता है।
भारत के लिए भी अहम संदेश भारत दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माताओं में शामिल है और यहां मिशन इंद्रधनुष जैसे बड़े टीकाकरण अभियान पहले से चलाए जाते रहे हैं। हालांकि महामारी के दौरान भारत में भी कुछ बच्चे नियमित वैक्सीनेशन से छूट गए थे। ऐसे में “Big Catch-Up” अभियान यह संदेश देता है कि महामारी के बाद छूटे बच्चों तक दोबारा पहुंचना बेहद जरूरी है।
परिवारों और जागरूकता की भूमिका विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का टीकाकरण कार्ड अपडेट रखना, वैक्सीनेशन कैंप्स की जानकारी पर ध्यान देना और किसी भी भ्रम की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। ग्रामीण और कम जागरूकता वाले इलाकों में सही जानकारी पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भविष्य के लिए बड़ा संकेत “Big Catch-Up” अभियान यह दिखाता है कि अगर सरकारें, वैश्विक संस्थाएं और स्थानीय समुदाय मिलकर काम करें, तो महामारी जैसी बड़ी बाधा के बाद भी स्वास्थ्य सुरक्षा दोबारा मजबूत की जा सकती है। करोड़ों बच्चों तक पहुंची ये वैक्सीन डोज़ अब सिर्फ स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं, बल्कि महामारी के बाद दुनिया के लिए उम्मीद की नई शुरुआत मानी जा रही हैं।
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