राजस्थान के जोधपुर में भीषण गर्मी के बीच बनाया गया ‘नेट-ज़ीरो कूलिंग शेल्टर’ बिना AC के लोगों को राहत दे रहा है। यह शेल्टर बाहर के तापमान से करीब 8 डिग्री तक ठंडा रहता है और खास तौर पर डिलीवरी बॉय, रिक्शा चालक और दिहाड़ी मजदूरों के लिए सुरक्षित आरामगाह बन गया है।
राजस्थान का जोधपुर इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। शहर में तापमान लगातार 48 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। दोपहर के समय सड़कें तपती नजर आती हैं और आम लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इसी झुलसाती गर्मी के बीच जोधपुर में एक ऐसा अनोखा “जीरो-AC कूलिंग शेल्टर” लोगों के लिए राहत का केंद्र बन गया है, जो बिना एयर कंडीशनर के ही ठंडी छांव और आराम देने का काम कर रहा है।
यह शेल्टर खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो दिनभर धूप में काम करने को मजबूर हैं। इनमें डिलीवरी बॉय, ई-रिक्शा चालक, सब्जी विक्रेता, ठेला चलाने वाले, मजदूर और बुजुर्ग शामिल हैं। दोपहर की तेज गर्मी के दौरान ये लोग यहां आकर कुछ देर आराम करते हैं, ठंडा पानी और ORS पीते हैं और फिर अपने काम पर लौट जाते हैं।
जानकारी के मुताबिक इस पहल को जोधपुर नगर निगम और महिला हाउसिंग ट्रस्ट ने मिलकर तैयार किया है। यह प्रोजेक्ट शहर के “हीट एक्शन प्लान” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बढ़ती हीटवेव के खतरे से सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों को बचाना है। पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान के कई शहर रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की वजह से चर्चा में रहे हैं। जैसलमेर, फलोदी और बाड़मेर जैसे इलाकों में तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में हीटवेव और ज्यादा खतरनाक हो सकती है।
इसी खतरे को देखते हुए जोधपुर प्रशासन ने शहर में ऐसे इलाकों की पहचान की जहां बड़ी संख्या में लोग खुले आसमान के नीचे काम करते हैं लेकिन उनके पास आराम करने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होती। सर्वे और वल्नरेबिलिटी मैपिंग के जरिए यह पता लगाया गया कि डिलीवरी पार्टनर और दिहाड़ी मजदूर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। इसके बाद इस नेट-ज़ीरो कूलिंग शेल्टर का पायलट मॉडल तैयार किया गया।
पहली नजर में यह शेल्टर किसी साधारण सामुदायिक हॉल जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसकी पूरी डिजाइन वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई है। सबसे खास बात यह है कि इसमें एयर कंडीशनर का इस्तेमाल नहीं किया गया है, फिर भी अंदर का तापमान बाहर की तुलना में करीब 8 डिग्री तक कम रहता है।
शेल्टर की छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं जो पंखों, लाइट और हल्के मिस्ट-कूलिंग सिस्टम को बिजली देते हैं। इससे बिजली की खपत कम होती है और पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता। छत पर खास सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट लगाया गया है, जो सूरज की गर्मी को वापस परावर्तित कर देता है। वहीं दीवारों में इंसुलेशन मटेरियल लगाया गया है ताकि अंदर की ठंडक लंबे समय तक बनी रहे।
इसके अलावा शेल्टर के चारों तरफ खस की चादरें लगाई गई हैं जिन्हें लगातार गीला रखा जाता है। जब हवा इन गीली चादरों से होकर गुजरती है तो उसका तापमान कम हो जाता है। यह तकनीक पुराने देसी कूलर जैसी है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया है। ऊपर बने वेंटिलेशन टावर गर्म हवा को बाहर निकालते हैं और नीचे से ठंडी हवा को अंदर आने देते हैं। इसी वजह से बिना AC के भी अंदर का वातावरण काफी आरामदायक बना रहता है।
एक समय में इस शेल्टर में करीब 40 से 45 लोग बैठ सकते हैं। यहां बैठने की व्यवस्था के साथ ठंडा पानी, ORS और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। कई मजदूरों का कहना है कि पहले दोपहर की गर्मी में उन्हें चक्कर आने लगते थे और कई बार काम बीच में छोड़कर घर लौटना पड़ता था। लेकिन अब वे कुछ देर यहां रुककर खुद को सामान्य महसूस करते हैं और फिर दोबारा काम शुरू कर पाते हैं।
नगर निगम और प्रोजेक्ट से जुड़ी संस्थाओं ने शेल्टर के अंदर और बाहर का तापमान लगातार रिकॉर्ड किया। शुरुआती आंकड़ों में सामने आया कि जब बाहर तापमान 46 से 48 डिग्री के बीच था, तब अंदर का तापमान करीब 8 डिग्री तक कम दर्ज किया गया। यही वजह है कि इस मॉडल की चर्चा अब देशभर में हो रही है।
उद्योगपति Anand Mahindra ने भी इस पहल की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस मॉडल को भविष्य की शहरी प्लानिंग के लिए बेहद जरूरी बताया। उनका कहना था कि आने वाले समय में शहरों को केवल स्मार्ट नहीं, बल्कि “क्लाइमेट-रेजिलिएंट” भी बनाना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे कम-लागत और पर्यावरण अनुकूल कूलिंग मॉडल देश के दूसरे गर्म शहरों में भी लागू किए जाएं, तो लाखों लोगों को हीटवेव से बचाने में मदद मिल सकती है।
Jodhpur Heatwave Rajasthan ClimateChange CoolingShelter IndiaNews SmartCity Innovation NetGramNews
Disclaimer
Disclaimer:
Images are for illustrative purposes only and some editing of images done by using AI.
Published by: Ishrat. For newsroom standards, byline transparency, and correction requests, review our editorial standards and corrections policy.
Need to contact the newsroom directly? Email netgramnews@gmail.com or visit the team page.