IBM और IndiaAI की रिपोर्ट के मुताबिक, AI आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा ग्रोथ इंजन बन सकता है। रिपोर्ट का दावा है कि 2030 तक AI भारत की GDP में 500 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान दे सकता है। हालांकि, अभी केवल 15% कंपनियां ही AI को बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रही हैं और देश में AI स्किल्स की भी कमी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सुरक्षा के साथ भारत दुनिया का बड़ा AI हब बन सकता है।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर चर्चा अब केवल टेक कंपनियों या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। IBM और IndiaAI की संयुक्त रिपोर्ट “From Promise to Power: How AI is Redefining India's Economic Future” ने दावा किया है कि आने वाले वर्षों में AI भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि देश सही रणनीति, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े स्तर पर स्किल डेवलपमेंट पर काम करता है, तो 2030 तक AI भारत की GDP में 500 अरब डॉलर से अधिक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है।
रिपोर्ट बताती है कि AI अब केवल चैटबॉट या ऑटोमेशन तक सीमित तकनीक नहीं है। इसका असर कृषि, हेल्थकेयर, बैंकिंग, एजुकेशन, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सरकारी सेवाओं जैसे लगभग हर सेक्टर में दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की मदद से कंपनियां कम समय में ज्यादा काम कर पाएंगी, फैसले तेजी से लिए जाएंगे और उत्पादकता में बड़ा सुधार होगा। यही वजह है कि दुनिया भर की बड़ी कंपनियां AI पर भारी निवेश कर रही हैं और भारत भी इस वैश्विक दौड़ में तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा भारतीय बिजनेस लीडर्स की सोच से जुड़ा है। इसमें सामने आया कि करीब 80 प्रतिशत भारतीय बिजनेस लीडर्स मानते हैं कि AI में किया गया निवेश आने वाले समय में देश की आर्थिक दिशा तय करेगा। हालांकि, इसके बावजूद केवल लगभग 15 प्रतिशत कंपनियां ही AI को बड़े स्तर पर अपने बिजनेस सिस्टम में लागू कर पाई हैं। ज्यादातर कंपनियां अभी भी पायलट प्रोजेक्ट, टेस्टिंग या शुरुआती प्रयोगों के चरण में हैं।
रिपोर्ट में इस स्थिति को “इन्फ्लेक्शन गैप” कहा गया है। यानी कंपनियां AI की ताकत को समझ तो रही हैं, लेकिन उसे पूरी क्षमता के साथ अपनाने में अभी पीछे हैं। इसके पीछे टेक्निकल स्किल्स की कमी, डेटा क्वालिटी की समस्या, महंगा इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पष्ट नियमों की कमी जैसे कारण बताए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गैप जल्दी दूर नहीं किया गया, तो भारत वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में पीछे भी रह सकता है। वर्कफोर्स को लेकर भी रिपोर्ट में बड़ा संकेत दिया गया है। अनुमान है कि 2030 तक भारत को 350 मिलियन से ज्यादा ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी जो किसी न किसी स्तर पर AI-लिटरेट हों। इसका मतलब केवल इंजीनियर या कोडर नहीं, बल्कि ऐसे कर्मचारी भी हैं जिन्हें डेटा समझने, AI टूल्स इस्तेमाल करने, ऑटोमेशन सिस्टम चलाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करने की बेसिक जानकारी हो।
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फिलहाल देश में केवल लगभग 30 प्रतिशत कर्मचारियों के पास ही AI से जुड़ी बेसिक स्किल्स हैं। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में स्किल डेवलपमेंट सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को बड़े स्तर पर ट्रेनिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग प्रोग्राम शुरू करने होंगे ताकि युवा नई डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो सकें। सरकार भी इस दिशा में कई योजनाओं पर काम कर रही है। IndiaAI Future Skills जैसे प्रोग्राम के जरिए टियर-2 और टियर-3 शहरों में AI लैब्स, डिजिटल ट्रेनिंग सेंटर और टेक एजुकेशन को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के युवाओं को भी AI आधारित नौकरियों के लिए तैयार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा AI-स्किल्ड टैलेंट हब बन सकता है।
रिपोर्ट में भारत की ताकत और चुनौतियों दोनों का जिक्र किया गया है। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी, मजबूत IT सर्विस सेक्टर और तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम है, जो AI ग्रोथ के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है। भारतीय टेक कंपनियों का वैश्विक अनुभव भी देश को इस क्षेत्र में बढ़त दिला सकता है। हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कमजोर डेटा क्वालिटी, सुरक्षित और सस्ते क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, साइबर सिक्योरिटी रिस्क और स्पष्ट AI रेगुलेशन का अभाव अभी भी बड़ी बाधाएं बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि AI का सही इस्तेमाल तभी संभव होगा जब डेटा सुरक्षित रहेगा और लोगों का भरोसा बना रहेगा।
स्टडी में “Sovereign AI” मॉडल पर भी खास जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि भारत अपने संवेदनशील डेटा, क्लाउड सिस्टम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर घरेलू नियंत्रण बनाए रखे, ताकि विदेशी निर्भरता कम हो और डेटा सुरक्षा मजबूत बनी रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में जिन देशों के पास मजबूत AI क्षमता और डेटा कंट्रोल होगा, वही वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे आगे होंगे। रिपोर्ट यह भी बताती है कि AI केवल नौकरियां खत्म करने वाली तकनीक नहीं है, बल्कि यह नई तरह की नौकरियां और अवसर भी पैदा करेगी। हेल्थकेयर, साइबर सिक्योरिटी, डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में लाखों नए रोजगार बनने की संभावना जताई गई है।
कुल मिलाकर IBM और IndiaAI की यह रिपोर्ट संकेत देती है कि AI आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार और बिजनेस मॉडल को पूरी तरह बदल सकता है। लेकिन इसके लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि सही नीति, मजबूत स्किल डेवलपमेंट और भरोसेमंद डिजिटल सिस्टम की भी जरूरत होगी।