भीषण गर्मी के बीच जोधपुर में पानी का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। कायलाना और तख्तसागर जलाशयों में केवल चार दिन का उपयोग योग्य पानी बचा है, जबकि इंदिरा गांधी नहर से सप्लाई प्रभावित होने के कारण कई इलाकों में पानी की कटौती शुरू कर दी गई है।
राजस्थान का सूर्यनगरी जोधपुर इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ भीषण गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है, वहीं दूसरी तरफ शहर में तेजी से गहराते जल संकट ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि शहर के प्रमुख जलाशय कायलाना और तख्तसागर में केवल करीब चार दिन का उपयोग योग्य पानी ही बचा बताया जा रहा है। इस स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है और जलदाय विभाग को कई इलाकों में पानी की सप्लाई कम करनी पड़ी है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, जोधपुर की पेयजल व्यवस्था का बड़ा हिस्सा इंदिरा गांधी नहर पर निर्भर करता है। लेकिन पिछले कुछ समय से नहर में रीलाइनिंग और मरम्मत का कार्य चलने के कारण पानी की सप्लाई बाधित रही। इसका सीधा असर शहर के जलाशयों पर पड़ा और धीरे-धीरे पानी का स्तर लगातार नीचे जाता गया। अब स्थिति यह है कि प्रशासन को सीमित स्टॉक के आधार पर पूरे शहर की जरूरतों को संतुलित करना पड़ रहा है।
जलदाय विभाग ने कई क्षेत्रों में पानी सप्लाई के समय और दिनों में बदलाव किया है। कुछ कॉलोनियों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है, जबकि कुछ इलाकों में लोगों को तीन-तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में बढ़ती पानी की मांग के बीच यह कटौती आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है।
शहर के कई हिस्सों में टैंकरों की मांग अचानक बढ़ गई है। जिन परिवारों के पास निजी जल भंडारण की सुविधा नहीं है, उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गरीब बस्तियों और घनी आबादी वाले इलाकों में सुबह से ही पानी भरने के लिए लंबी लाइनें लग रही हैं। महिलाएं और बुजुर्ग कई घंटे तक पानी का इंतजार करने को मजबूर हैं।
सिर्फ घरेलू जीवन ही नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है। होटल, चाय की दुकानें, रेस्टोरेंट और ठंडे पेय बेचने वाले व्यवसायियों को पानी की कमी के कारण अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। बर्फ और पीने के पानी की सप्लाई प्रभावित होने से कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। शहर में कई जगह लोगों ने प्रशासन से नियमित सप्लाई बहाल करने की मांग भी शुरू कर दी है।
हालांकि इस संकट के बीच कुछ राहत की खबर भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, इंदिरा गांधी नहर में दोबारा पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक बांधों से राजस्थान के लिए करीब 10 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसे धीरे-धीरे 12 जिलों तक पहुंचाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जाएगी जहां पेयजल संकट सबसे ज्यादा गंभीर है।
जोधपुर के लिए इसका मतलब यह है कि अगले कुछ दिनों में नहर का पानी दोबारा शहर के जलाशयों तक पहुंचना शुरू हो सकता है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि हालात सामान्य होने में अभी थोड़ा समय लगेगा। जलाशयों का स्तर बढ़ने और नियमित सप्लाई बहाल होने तक लोगों को संयम बरतने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संकट केवल अस्थायी समस्या नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत भी है। जोधपुर जैसे शुष्क और मरुस्थलीय क्षेत्रों में हर साल गर्मियों के दौरान पानी की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में केवल नहर आधारित व्यवस्था पर निर्भर रहना लंबे समय में चुनौती बन सकता है।
जल विशेषज्ञों का कहना है कि शहर को अब दीर्घकालीन जल प्रबंधन की दिशा में गंभीर कदम उठाने होंगे। रेन-वॉटर हार्वेस्टिंग, भूजल पुनर्भरण, पाइपलाइन लीकेज नियंत्रण और जल संरक्षण जैसे उपायों को तेजी से लागू करना जरूरी होगा। कई इलाकों में पाइपलाइन लीकेज के कारण बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद होता है, जिसे रोककर काफी राहत मिल सकती है।
इसके अलावा विशेषज्ञ विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन मॉडल अपनाने पर भी जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर छोटे जलाशय, वर्षा जल संग्रहण और पुनर्भरण संरचनाएं विकसित की जाएं तो भविष्य में ऐसे संकट की तीव्रता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल जोधपुर के लोगों की नजरें इंदिरा गांधी नहर से आने वाले पानी पर टिकी हुई हैं। प्रशासन राहत पहुंचाने के प्रयासों में जुटा है, लेकिन बढ़ती गर्मी और सीमित स्टॉक के बीच आने वाले कुछ दिन शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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