मुंबई में “ज़हरीले तरबूज” से मौत का वायरल दावा जांच में गलत निकला। फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक मौत की वजह जिंक फॉस्फाइड नाम का जहरीला केमिकल था, न कि तरबूज। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील की है।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक खबर ने लोगों के बीच डर और भ्रम फैला दिया। वायरल मैसेजों में दावा किया गया कि मुंबई में एक परिवार के चार लोगों की मौत “ज़हरीला तरबूज” खाने से हो गई। WhatsApp, Facebook और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल रहे इन संदेशों में लोगों को तरबूज खाने से बचने की सलाह दी जाने लगी। कई पोस्ट्स में कहा गया कि गर्मियों में बिक रहे तरबूज जहरीले हैं और इन्हें खाने से जान जा सकती है। लेकिन जब इस मामले की जांच हुई तो सच्चाई कुछ और ही निकली। पुलिस, अस्पताल और फॉरेंसिक रिपोर्ट्स ने साफ कर दिया कि यह मामला सामान्य “तरबूज खाने” से जुड़ा नहीं था, बल्कि जहरीले केमिकल यानी जिंक फॉस्फाइड पॉइजनिंग का मामला था।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? मुंबई के पायधोनी इलाके में रहने वाले डोकाडिया परिवार के चार सदस्यों की अचानक तबीयत बिगड़ने और बाद में मौत होने की खबर सामने आई। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि परिवार ने देर रात तरबूज खाया था, जिसके कुछ घंटों बाद उल्टी, दस्त और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो गईं। यह खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर शुरू हो गया। कई लोगों ने बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के यह दावा करना शुरू कर दिया कि तरबूज जहरीला था। कुछ वायरल पोस्ट्स में यहां तक कहा गया कि बाजार में बिक रहे कई तरबूज केमिकल से भरे हुए हैं।
जांच में क्या पता चला? मुंबई के JJ अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने शुरुआती जांच में साफ किया कि मृतकों के शरीर में किसी तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन नहीं मिला। खून के सैंपल में भी ऐसा कोई संकेत नहीं था जो सीधे फूड पॉइजनिंग या तरबूज से जुड़ा हो। इसके बाद फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार मृतकों के viscera यानी आंतरिक अंगों में जिंक फॉस्फाइड नामक जहरीले केमिकल के निशान मिले। जिंक फॉस्फाइड आमतौर पर चूहे मारने की दवा यानी rat poison में इस्तेमाल किया जाता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मौत की वजह यही जहरीला पदार्थ था, न कि सामान्य तरबूज।
पुलिस किस एंगल से कर रही जांच? पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जिंक फॉस्फाइड खाने में कैसे मिला। जांच इस बात पर केंद्रित है कि यह गलती से हुआ या किसी ने जानबूझकर जहर मिलाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 अप्रैल की रात परिवार ने रिश्तेदारों के साथ एक गेट-टुगेदर किया था। देर रात करीब 1 बजे तरबूज खाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई। इसी वजह से शुरुआती शक तरबूज पर गया, लेकिन वैज्ञानिक जांच में यह दावा गलत साबित हुआ।
सोशल मीडिया पर फैली गलत जानकारी इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर “ज़हरीला तरबूज” ट्रेंड करने लगा। कई लोगों ने बिना पुष्टि किए डर फैलाने वाले मैसेज शेयर किए। इसका असर बाजार पर भी पड़ा और कई जगह तरबूज की बिक्री अचानक कम हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक घटना के आधार पर पूरे फल या खाद्य पदार्थ को खतरनाक बताना गलत है। इससे लोगों में अनावश्यक डर पैदा होता है और गलत जानकारी तेजी से फैलती है।
फैक्ट-चेक: दावा और सच्चाई दावा: मुंबई में एक परिवार की मौत तरबूज खाने से हुई और बाजार में बिक रहे तरबूज जहरीले हैं। सच्चाई: फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मौत की वजह जिंक फॉस्फाइड पॉइजनिंग थी। तरबूज में किसी बैक्टीरियल इंफेक्शन या जहरीले तत्व का कोई प्रमाण नहीं मिला। निष्कर्ष: ❌ “ज़हरीला तरबूज” वाला दावा भ्रामक और गलत है।
लोगों के लिए क्या है जरूरी सीख? विशेषज्ञों का कहना है कि फल और सब्जियां हमेशा साफ-सफाई के साथ इस्तेमाल करनी चाहिए और भरोसेमंद जगह से खरीदना बेहतर होता है। लेकिन हर वायरल मैसेज पर आंख बंद करके भरोसा करना भी खतरनाक हो सकता है। आज सोशल मीडिया पर अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं। ऐसे में किसी भी डराने वाली खबर पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक रिपोर्ट, फैक्ट-चेक और विश्वसनीय स्रोतों की जानकारी जरूर देखनी चाहिए। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि अधूरी जानकारी और वायरल अफवाहें कैसे लोगों के बीच डर पैदा कर सकती हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि परिवार तक जहर आखिर पहुंचा कैसे, लेकिन इतना साफ हो चुका है कि सामान्य रूप से तरबूज खाने को इस घटना की वजह नहीं माना गया है।
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