सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को 2026 पश्चिम बंगाल चुनाव हिंसा से जोड़कर शेयर किया जा रहा है। फैक्ट चेक में सामने आया कि यह वीडियो 2025 में मुंबई में हुए एक विरोध प्रदर्शन का है, जिसका बंगाल चुनावों से कोई संबंध नहीं है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बुर्का पहने एक युवती कथित तौर पर बांग्लादेशी झंडे के प्रिंटआउट जलाती दिखाई दे रही है। कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस वीडियो को “2026 पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद हुई हिंसा” से जोड़ते हुए शेयर किया। कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि चुनाव नतीजों के बाद बंगाल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और यह वीडियो उसी माहौल का हिस्सा है। वहीं कुछ अकाउंट्स ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की भी कोशिश की और “बांग्लादेश व पाकिस्तान समर्थक गतिविधियों” जैसे दावे किए।
हालांकि, जब इस वायरल वीडियो की पड़ताल की गई तो मामला पूरी तरह अलग निकला। फैक्ट चेक में सामने आया कि वीडियो न तो हाल का है और न ही इसका पश्चिम बंगाल चुनाव या पोस्ट-पोल हिंसा से कोई संबंध है। जांच में पता चला कि यह वीडियो साल 2025 में मुंबई में हुए एक विरोध प्रदर्शन का है, जिसे अब गलत दावे के साथ दोबारा वायरल किया जा रहा है।
कैसे हुई वीडियो की जांच? फैक्ट चेक टीमों ने वीडियो के कई कीफ्रेम निकालकर रिवर्स इमेज सर्च किया। इस प्रक्रिया में वीडियो के पुराने वर्जन और उससे जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट्स सामने आए। जांच में पाया गया कि यही वीडियो दिसंबर 2025 में भी इंटरनेट पर शेयर किया गया था। आगे की पड़ताल में वीडियो इंस्टाग्राम पर “Prince Pandit” नाम के यूज़र अकाउंट पर मिला, जिसे 23 दिसंबर 2025 को अपलोड किया गया था। वीडियो में मौजूद बैकग्राउंड आवाज़ों और बातचीत से प्रदर्शन का असली संदर्भ समझ में आता है। वीडियो में दिखाई दे रही युवती खुद यह कहती सुनाई देती है कि यह प्रदर्शन बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास नाम के युवक की हत्या के विरोध में किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दीपू चंद्र दास पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उनकी हत्या की खबर सामने आई थी।
Continue Reading14 मई 2026
क्या है वीडियो का असली संदर्भ? जांच में साफ हुआ कि वायरल वीडियो का संबंध बांग्लादेश में हुई एक घटना के विरोध में मुंबई में आयोजित प्रदर्शन से था। इसका पश्चिम बंगाल चुनाव, चुनावी हिंसा या किसी राजनीतिक संघर्ष से कोई संबंध नहीं था। फैक्ट चेक रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि वीडियो में दिख रही युवती का नाम शबनम शेख बताया गया है, जो स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया एक्टिविज्म से जुड़ी रही हैं। दिसंबर 2025 में यह वीडियो कई अन्य अकाउंट्स से भी शेयर किया गया था, जिससे इसकी पुरानी टाइमलाइन स्पष्ट हो गई।
सोशल मीडिया पर गलत दावों का बढ़ता खतरा यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और तस्वीरों को नए राजनीतिक या सांप्रदायिक संदर्भों के साथ जोड़कर वायरल किया जाता है। ऐसे पोस्ट्स अक्सर लोगों की भावनाओं को भड़काने और भ्रम फैलाने का काम करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावों, सांप्रदायिक घटनाओं या अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े कंटेंट को बिना जांचे-परखे शेयर करना समाज में तनाव बढ़ा सकता है। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो या दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई जांचना बेहद जरूरी है।
Continue Reading13 मई 2026
फैक्ट चेक क्यों जरूरी है? डिजिटल दौर में गलत सूचना बहुत तेजी से फैलती है। कई बार एडिटेड वीडियो, पुराने क्लिप या अधूरी जानकारी को नए घटनाक्रम से जोड़कर पेश किया जाता है। यही वजह है कि फैक्ट चेकिंग अब मीडिया और सोशल मीडिया दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन चुकी है। इस वायरल वीडियो के मामले में भी शुरुआती दावों और वास्तविक तथ्यों में बड़ा अंतर सामने आया। जांच के बाद स्पष्ट हो गया कि वीडियो को भ्रामक दावे के साथ शेयर किया गया था और इसका पश्चिम बंगाल चुनावों से कोई संबंध नहीं है। सोशल मीडिया यूज़र्स को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी वायरल कंटेंट को शेयर करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों और फैक्ट चेक रिपोर्ट्स की मदद से उसकी पुष्टि जरूर करें।
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14 मई 2026