नई दिल्ली के Bharat Mandapam में 14 और 15 मई को BRICS विदेश मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित हो रही है। इस बैठक में भारत समेत BRICS के विस्तारित सदस्य देश वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और क्लाइमेट जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जबकि भारत खुद को ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज के रूप में पेश करेगा।
नई दिल्ली एक बार फिर दुनिया की बड़ी कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है। राजधानी के Bharat Mandapam में आज से शुरू हो रही BRICS Foreign Ministers’ Meeting पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। 14 और 15 मई तक चलने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में BRICS समूह के सदस्य और पार्टनर देशों के विदेश मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। भारत इस बैठक की मेजबानी ऐसे समय कर रहा है, जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है और दुनिया नए आर्थिक तथा रणनीतिक गठबंधनों की तरफ बढ़ रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर करेंगे। बैठक में ब्राज़ील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, सऊदी अरब, UAE, मिस्र और इथियोपिया समेत विस्तारित BRICS समूह के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। यह बैठक साल के अंत में प्रस्तावित 18वें BRICS Summit की तैयारी के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में इसका विस्तार हुआ है और अब यह संगठन वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय रणनीति में बड़ा प्रभाव रखने लगा है। दुनिया की बड़ी आबादी, प्राकृतिक संसाधन और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं इस मंच को पश्चिमी देशों के प्रभाव वाले पारंपरिक संगठनों के मुकाबले एक मजबूत विकल्प बना रही हैं।
नई दिल्ली में हो रही इस बैठक में कई बड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इनमें वेस्ट एशिया में जारी तनाव, रूस-यूक्रेन संघर्ष के असर, ग्लोबल सप्लाई चेन की चुनौतियां, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य संकट, क्लाइमेट फाइनेंस और डेवलपमेंट फाइनेंस जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। इसके अलावा सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने जानकारी दी कि बैठक के दौरान सभी विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान भारत अपने विजन को ग्लोबल साउथ के सामने मजबूती से रखेगा। भारत लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर बराबरी का स्थान मिलना चाहिए।
इस बार की बैठक में भारत की भूमिका इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि भारत खुद को “ब्रिज बिल्डर” के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ भारत पश्चिमी देशों के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध बनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ वह रूस, ईरान और खाड़ी देशों के साथ भी संतुलन बनाकर चल रहा है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ BRICS मंच पर भारत को एक संतुलित और भरोसेमंद शक्ति के रूप में देख रहे हैं।
बैठक के दौरान कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भारत के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। अफ्रीकी देशों की दिलचस्पी भी इस बार खास तौर पर देखने को मिल रही है। नाइजीरिया समेत कई देशों ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वे भारत के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।
भारत इस मंच का इस्तेमाल अपनी डिजिटल और टेक्नोलॉजी उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखने के लिए भी कर सकता है। UPI, Digital Public Infrastructure, India AI और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल जैसे विषयों को भारत ग्लोबल साउथ के लिए सफल उदाहरण के तौर पर पेश कर सकता है। कई विकासशील देश भारत के डिजिटल मॉडल को कम लागत और ज्यादा प्रभाव वाला समाधान मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत क्लाइमेट जस्टिस, डेब्ट रिलीफ, वैक्सीन इक्विटी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे मुद्दों पर ठोस प्रस्ताव रखता है, तो BRICS मंच पर उसकी स्थिति और मजबूत हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया दो बड़े शक्ति केंद्रों में बंटती नजर आ रही है, भारत खुद को एक स्वतंत्र और संतुलित वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने में जुटा हुआ है।
आर्थिक दृष्टि से भी यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। अगर BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार, कॉमन फाइनेंसिंग सिस्टम या ऊर्जा खरीद के नए मैकेनिज्म पर सहमति बनती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। इससे डॉलर की वैश्विक निर्भरता कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जाएगा। भारत जैसे देशों के लिए यह भविष्य में ऊर्जा आयात और विदेशी व्यापार को अधिक स्थिर बनाने में मददगार हो सकता है।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि यह बैठक केवल साझा बयान तक सीमित रहती है या फिर इससे कोई ठोस रोडमैप निकलकर सामने आता है। दुनिया की नजर इस बात पर भी रहेगी कि क्या BRICS समूह वैश्विक संस्थाओं में सुधार, नई आर्थिक व्यवस्था और विकासशील देशों के हितों को लेकर कोई बड़ा संदेश देता है।
दिल्ली में हो रही यह दो दिवसीय बैठक केवल एक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी मानी जा रही है। आने वाले समय में BRICS की दिशा और उसमें भारत की भूमिका अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
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