राजस्थान में गर्मी ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। मौसम विभाग ने 11 से 17 मई तक कई जिलों में हीटवेव, तेज़ लू और धूलभरी आंधी को लेकर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि तापमान 46 डिग्री के पार पहुंच चुका है।
राजस्थान इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। राज्य के कई जिलों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान में 11 से 17 मई के बीच तापमान में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। विभाग का अनुमान है कि अधिकतम तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कई इलाकों में पारा 45 से 47 डिग्री के बीच पहुंच सकता है।
राजस्थान के बाड़मेर, चूरू, बीकानेर, जैसलमेर और फलोदी जैसे जिलों में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। बाड़मेर में तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया, जबकि चूरू और बीकानेर में भी तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल दिन की गर्मी नहीं है, बल्कि रातों का तापमान भी सामान्य से काफी ज्यादा बना हुआ है। कई इलाकों में रात का तापमान सामान्य से 5 डिग्री तक अधिक रिकॉर्ड किया गया, जिससे लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल पा रही।
विशेषज्ञ इसे “उष्ण रात्रि” की स्थिति बता रहे हैं। इसका मतलब है कि दिनभर की तेज़ गर्मी के बाद भी शरीर को रात में पर्याप्त ठंडक नहीं मिलती, जिससे हीट स्ट्रेस और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। बुज़ुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह स्थिति ज्यादा खतरनाक मानी जा रही है।
मौसम विभाग ने बीकानेर, जैसलमेर और फलोदी सहित कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं कुछ इलाकों में ऑरेंज अलर्ट भी लागू किया गया है। विभाग के मुताबिक अगले चार से पांच दिनों तक पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों में तीव्र लू चल सकती है। इसके अलावा तेज़ धूलभरी आंधी और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। कई शहरों में दोपहर के समय सड़कें सूनी दिखाई दे रही हैं और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
राज्य सरकार ने भी हालात को गंभीरता से लेते हुए सभी जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य, राजस्व, शिक्षा और पंचायतीराज विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए जिला कलेक्टरों को विशेष निर्देश भेजे गए हैं। सरकार ने हीट एक्शन प्लान सक्रिय कर दिया है ताकि गांवों से लेकर शहरों तक जरूरी तैयारियां समय रहते पूरी की जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ORS, जरूरी दवाइयां, आइस पैक और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा एंबुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि हीट स्ट्रोक या डिहाइड्रेशन के मामलों में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
शिक्षा विभाग स्कूलों के समय में बदलाव और छुट्टियों को आगे बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। कई जिलों में दोपहर के समय बच्चों को बाहर निकलने से रोकने की सलाह दी गई है। ग्राम पंचायत स्तर पर भी पेयजल, छाया और राहत केंद्रों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
गर्मी का असर केवल आम जनजीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि और पशुपालन क्षेत्र पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। राजस्थान में इस समय किसान खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे रहते हैं, लेकिन लगातार बढ़ती गर्मी और पानी की कमी ने चिंता बढ़ा दी है। पशुओं के लिए चारे और पानी का संकट गहराने लगा है। कई ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप और ट्यूबवेल का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिससे भूजल स्तर पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल संरक्षण और प्रबंधन पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले मानसून सीजन में भी जल संकट गंभीर रूप ले सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, जोहड़ और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सबसे ज्यादा असर रोज़ कमाने-खाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। रिक्शा चालक, मजदूर, डिलीवरी पार्टनर, ट्रैफिक पुलिसकर्मी और निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को तेज़ धूप में भी काम करना पड़ रहा है। कई मजदूरों का कहना है कि अगर वे काम छोड़ते हैं तो उनकी रोज़ की आमदनी प्रभावित होती है। ऐसे में सामाजिक संगठनों और प्रशासन से मांग उठ रही है कि दोपहर के समय काम के घंटे कम किए जाएं और सार्वजनिक स्थानों पर ठंडे पानी व छांव की व्यवस्था बढ़ाई जाए।
मौसम वैज्ञानिक लगातार बढ़ती हीटवेव को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि राजस्थान में हर साल गर्मी का रिकॉर्ड टूटना अब सामान्य होता जा रहा है। शहरों में तेजी से घटते ग्रीन कवर, कंक्रीट का फैलाव और जल स्रोतों की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि शहरों में ज्यादा पेड़ लगाए जाएं, छतों पर सोलर पैनल और रिफ्लेक्टिव पेंट का इस्तेमाल बढ़ाया जाए ताकि तापमान को नियंत्रित किया जा सके। वहीं ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।
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